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Amethi News: शहीदों की वीरगाथा सुनकर सेना का सपना संजो रहे युवा

Mon, 27 Jul 2026 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Mon, 27 Jul 2026 12:35 AM IST
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Youth nurturing dreams of joining the army after hearing the heroic tales of martyrs.
कारगिल में शहीद वीरेंद्र सिंह की फाइल फोटो। स्रोत: परिजन  
अमेठी सिटी। कारगिल विजय दिवस केवल शहीदों के बलिदान को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रसेवा का संकल्प मजबूत करने का भी माध्यम बन गया है। भादर ब्लॉक के सोनारी गांव निवासी शहीद राम निहोर यादव और मुसाफिरखाना क्षेत्र के दादरा गांव निवासी शहीद वीरेंद्र सिंह की वीरगाथाएं आज भी युवाओं को सेना की वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना देखने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ग्रामीणों और पूर्व सैनिकों का कहना है कि इन दोनों वीरों का साहस, अनुशासन और समर्पण युवाओं के लिए आदर्श बन चुका है।
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राम निहोर यादव ने कारगिल युद्ध के दौरान 12 जून 1999 को दुश्मनों से मुकाबला करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनके बलिदान का प्रभाव केवल उस समय तक सीमित नहीं रहा। उनके दो भाई भी बाद में भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा से जुड़े। गांव के बुजुर्ग आज भी बच्चों और युवाओं को उनकी वीरता, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की कहानियां सुनाते हैं, जिससे उनमें सेना के प्रति आकर्षण बढ़ता है।
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दादरा गांव के वीरेंद्र सिंह ने राजपूताना राइफल्स में रहते हुए देश की सीमाओं की रक्षा की। सात अक्तूबर 2000 को नियंत्रण रेखा पर दुश्मनों से लड़ते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी शहादत के बाद गांव के कई युवाओं ने सेना में भर्ती होने का लक्ष्य तय किया। आज भी उनके जीवन संघर्ष और देशभक्ति की चर्चा युवाओं में जोश भर देती है।
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पूर्व सैनिक बजरंगी मिश्र बताते हैं कि कारगिल के वीर केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं। उनका त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज भी युवाओं को सेना, अर्द्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा सेवाओं में कॅरियर बनाने की प्रेरणा देता है। उनका कहना है कि शहीदों के आदर्शों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। अमेठी के इन दोनों अमर वीरों की गाथा आज भी यह संदेश देती है कि मातृभूमि के लिए दिया गया बलिदान पीढ़ियों तक राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहता है।
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