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Amethi News: बिना मजदूर लगे हो गया पांच करोड़ का काम
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गौरीगंज (अमेठी)। ओडीएफ प्लस में चयनित 44 ग्राम पंचायतों के 53 राजस्व गांवों में बिना मजदूर लगे ही करीब पांच करोड़ रुपये लागत का काम कर लिया गया। विभाग की ओर से अब तक किया गया भुगतान यही साबित कर रहा है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत मिले 17.44 करोड़ रुपये को ठिकाने लगाने की जल्दी में ग्राम पंचायतों ने बिना पत्रावली काम किया और बिना वर्क ऑर्डर व टेंडर के आपूर्ति लेकर भुगतान भी कर दिया।
स्वच्छ भारत मिशन फेज-1 के बाद जिले में इस अभियान का फेज-2 चल रहा है। अभियान में 10 ब्लॉकों के 44 ग्राम पंचायतों के उन 53 राजस्व गांवों को शामिल किया गया है जिनकी आबादी पांच हजार या इससे अधिक है। अभियान के तहत करीब पांच माह पूर्व 17.44 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि शासन से मिली थी। शासन से धनावंटन होने के बाद से ही विभागीय अफसर व पंचायतें ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आए इस धन को ठिकाने लगाने में जुटी हैं।
धन मिलने के बाद गांवों में कराए गए कार्यों के अधोमानक को छोड़ भी दें तो जिम्मेदारों ने अभियान के संचालन को लेकर जारी दिशा निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं। आलम यह रहा कि धनावंटन होने व विभागीय अफसरों का इशारा मिलते ही विभाग के चुनिंदा करीबी ठेकेदारों ने ग्राम प्रधानों को मिलाकर अधिकतर ग्राम पंचायतों में काम शुरू कर दिया।
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काम शुरू करने से पहले न तो कोई पत्रावली तैयार हुई न ही सामग्री की आपूर्ति के लिए टेंडर या वर्क ऑर्डर जारी हुआ। और तो और अब तक जितने भी कार्य कराए गए उसका पूरा पैसा आपूर्तिकर्ता फर्मों के खाते में डाल दिया गया। यानी जो भी भुगतान हुआ वह सिर्फ सामग्री की आपूर्ति के लिए हुआ। यहां सवाल उठता है कि यदि अब तक किया गया रनिंग पेमेंट सिर्फ सामग्री के लिए था तो मजदूरों का भुगतान कहां गया। क्या पूरा काम बिना मजदूरों के कराया गया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि रनिंग पेमेंट के नाम पर अब तक करीब पांच करोड़ या इससे अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
दुरुस्त की जा रहीं गड़बड़ियां
शासकी धन के दुरुपयोग व उसकी बंदरबांट का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि विभाग जांच टीम गठित होने से पहले अभिलेखों के अलावा उन गड़बड़ियों को दुरुस्त करने में जुटा है जिन पर सबसे पहले निगाह पड़नी है।
श्रमदान घोषित होंगे कार्य, होगी रिकवरी
मैंने जिस गांव (बाजार शुकुल के महोना पश्चिम) का निरीक्षण किया था वहां बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। सभी 44 ग्राम पंचायतों में अभियान के तहत कराए गए कार्यों की जांच होगी। रिपोर्ट मिलने के बाद उन सभी गांवों में कार्यों को श्रमदान घोषित करते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई व खर्च किए गए संपूर्ण धन की रिकवरी कराई जाएगी। - सान्या छाबड़ा, सीडीओ
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स्वच्छ भारत मिशन फेज-1 के बाद जिले में इस अभियान का फेज-2 चल रहा है। अभियान में 10 ब्लॉकों के 44 ग्राम पंचायतों के उन 53 राजस्व गांवों को शामिल किया गया है जिनकी आबादी पांच हजार या इससे अधिक है। अभियान के तहत करीब पांच माह पूर्व 17.44 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि शासन से मिली थी। शासन से धनावंटन होने के बाद से ही विभागीय अफसर व पंचायतें ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आए इस धन को ठिकाने लगाने में जुटी हैं।
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धन मिलने के बाद गांवों में कराए गए कार्यों के अधोमानक को छोड़ भी दें तो जिम्मेदारों ने अभियान के संचालन को लेकर जारी दिशा निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं। आलम यह रहा कि धनावंटन होने व विभागीय अफसरों का इशारा मिलते ही विभाग के चुनिंदा करीबी ठेकेदारों ने ग्राम प्रधानों को मिलाकर अधिकतर ग्राम पंचायतों में काम शुरू कर दिया।
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काम शुरू करने से पहले न तो कोई पत्रावली तैयार हुई न ही सामग्री की आपूर्ति के लिए टेंडर या वर्क ऑर्डर जारी हुआ। और तो और अब तक जितने भी कार्य कराए गए उसका पूरा पैसा आपूर्तिकर्ता फर्मों के खाते में डाल दिया गया। यानी जो भी भुगतान हुआ वह सिर्फ सामग्री की आपूर्ति के लिए हुआ। यहां सवाल उठता है कि यदि अब तक किया गया रनिंग पेमेंट सिर्फ सामग्री के लिए था तो मजदूरों का भुगतान कहां गया। क्या पूरा काम बिना मजदूरों के कराया गया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि रनिंग पेमेंट के नाम पर अब तक करीब पांच करोड़ या इससे अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
दुरुस्त की जा रहीं गड़बड़ियां
शासकी धन के दुरुपयोग व उसकी बंदरबांट का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि विभाग जांच टीम गठित होने से पहले अभिलेखों के अलावा उन गड़बड़ियों को दुरुस्त करने में जुटा है जिन पर सबसे पहले निगाह पड़नी है।
श्रमदान घोषित होंगे कार्य, होगी रिकवरी
मैंने जिस गांव (बाजार शुकुल के महोना पश्चिम) का निरीक्षण किया था वहां बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। सभी 44 ग्राम पंचायतों में अभियान के तहत कराए गए कार्यों की जांच होगी। रिपोर्ट मिलने के बाद उन सभी गांवों में कार्यों को श्रमदान घोषित करते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई व खर्च किए गए संपूर्ण धन की रिकवरी कराई जाएगी। - सान्या छाबड़ा, सीडीओ