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Amethi News: दीया निर्माण से संवर रहा महिलाओं का जीवन
Sat, 26 Oct 2024 03:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 26 Oct 2024 03:03 AM IST
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अमेठी सिटी। दीया के निर्माण कार्य में लगीं महिलाओं ने नई किरन स्वयं सहायता समूह का गठन किया है, जिसमें वह विभिन्न प्रकार के डिजाइनर दीये बनाकर बाजार में बेच रही हैं। इससे महिलाओं का जीवन बेहतर हो रहा है। समूह की सभी महिलाएं अलग-अलग दायित्व निभा रही हैं।
जिला मुख्यालय से रायबरेली रोड पर स्थित बहादुरपुर ग्राम पंचायत की महिलाएं वर्ष 2016 से मिट्टी के दीये, घड़ा, गुल्लक आदि बनाने का कार्य कर रही हैं। आमतौर पर जो कार्य पुरुष कुम्हार करते हैं, उस कार्य को यह महिलाएं कई साल से लगातार कर रही हैं। वहीं लीक से हटकर यह महिलाएं न सिर्फ मिट्टी के सामान्य दीये बना रही हैं, बल्कि अलग-अलग साइज के साथ ही उसे मैनुअल व स्प्रे के माध्यम से पेंट भी कर रही हैं।
नई किरन स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष किरन ने बताया कि इस कार्य में समूह की सभी 10 महिलाओं को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। तालाब से मिट्टी लाकर निर्माण का कार्य नूरजहां, जैतुननिशा कर रही हैं, जिसमें मिट्टी से दीये निर्माण का कार्य महिलाएं मोटर वाली चाक से कर रही हैं। इसके बाद उसे सुखाने, पकाने व रंगने के साथ ही बाजार में बेचने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी तय की गई है। समूह में सचिव कुमकुम, कोषाध्यक्ष ममता आदि भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन मैनेजर अविनाश ने बताया कि स्थानीय स्तर पर सादे दीये ही पसंद किए जा रहे हैं। वहीं विभिन्न मेले व स्टाल के दौरान लोग डिजाइनर दीये पसंद कर रहे हैं। कई वेंडर भी इन दीयों को खरीद कर बाजार में बेच रहे हैं। एनआरएलएम उपायुक्त प्रवीणा शुक्ला ने बताया कि रोशनी के पर्व पर हजारों महिलाएं अलग-अलग तरह से कार्य कर रही हैं।
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जिला मुख्यालय से रायबरेली रोड पर स्थित बहादुरपुर ग्राम पंचायत की महिलाएं वर्ष 2016 से मिट्टी के दीये, घड़ा, गुल्लक आदि बनाने का कार्य कर रही हैं। आमतौर पर जो कार्य पुरुष कुम्हार करते हैं, उस कार्य को यह महिलाएं कई साल से लगातार कर रही हैं। वहीं लीक से हटकर यह महिलाएं न सिर्फ मिट्टी के सामान्य दीये बना रही हैं, बल्कि अलग-अलग साइज के साथ ही उसे मैनुअल व स्प्रे के माध्यम से पेंट भी कर रही हैं।
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नई किरन स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष किरन ने बताया कि इस कार्य में समूह की सभी 10 महिलाओं को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। तालाब से मिट्टी लाकर निर्माण का कार्य नूरजहां, जैतुननिशा कर रही हैं, जिसमें मिट्टी से दीये निर्माण का कार्य महिलाएं मोटर वाली चाक से कर रही हैं। इसके बाद उसे सुखाने, पकाने व रंगने के साथ ही बाजार में बेचने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी तय की गई है। समूह में सचिव कुमकुम, कोषाध्यक्ष ममता आदि भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन मैनेजर अविनाश ने बताया कि स्थानीय स्तर पर सादे दीये ही पसंद किए जा रहे हैं। वहीं विभिन्न मेले व स्टाल के दौरान लोग डिजाइनर दीये पसंद कर रहे हैं। कई वेंडर भी इन दीयों को खरीद कर बाजार में बेच रहे हैं। एनआरएलएम उपायुक्त प्रवीणा शुक्ला ने बताया कि रोशनी के पर्व पर हजारों महिलाएं अलग-अलग तरह से कार्य कर रही हैं।