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घरों में भरा पानी, एक हजार बीघा फसल जलमग्न
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संग्रामपुर (अमेठी)। शारदा सहायक खंड-41 से निकले जायस रजबहा का पानी गुरुवार रात मिश्रौली बड़गांव में उफना गया। पानी उफनाने से पटरी कट गई और खेतों में खड़ी फसल जलमग्न हो गई। पटरी कटने से तीन गांव की करीब एक हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई। वहीं गांवों के घरों तक पानी पहुंच गया। इससे बड़ी संख्या में किसानों के सामने भोजन का संकट उत्पन्न हो गया है।
संग्रामपुर के बड़गांव में शारदा सहायक खंड-41 से एक दिन पहले ही जायस रजबहा से पानी छोड़ा गया था। रजबहा की सफाई न होने से गुरुवार रात पानी मिश्रौली बड़गांव के आगे उफनाने लगा। इससे गरीब का पुरवा, छोटा कुर्मियान व जोगापुर गांव के आसपास के एक हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई।
वहीं दो 20 से 25 घरों में भी पानी जा घुसा। ग्रामीणों ने घरों से सामान निकालकर और जानवरों को सुरक्षित स्थान पर बांध दिया। स्थानीय लोगों ने फोन के माध्यम से अधिकारियों को सूचित कर पानी बंद कराया। लेकिन तब तक तीन से चार किलोमीटर तक खेत खलिहान, सड़कें व घर पानी में डूब चुके थे।
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नहीं हुई थी रजबहा की सफाई
ग्रामीण विजय सिंह सहित आदि ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रजबहा की सफाई नहीं की जा रही है। नहर जलकुंभी और कुश-सरपत और कूड़े से पट गया है। इसके चलते पानी आगे नहीं जा पाया और उफनाने लगा। वहीं बताया कि बीते कई महीने पहले कुछ लोग आए थे। जेसीबी लेकर पर एक से दो जगह थोड़ा बहुत खोद कर चले गए। सफाई नहीं की गई। इसकी वजह से आज सैकड़ों किसानों की फसलें नष्ट होने की कगार पर हैं।
हर साल होती हैं फसलें जलमग्न
ग्रामीण बताते हैं कि गेहूं की फसल हर बार जलमग्न हो जाती है। पर इस बार तो गांव के घरों के अंदर पानी पहुंच गया है। कोई अधिकारी देखने तक नहीं आया। ग्रामीणों ने कहा धान के फसल के सिंचाई के समय जब सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है तब नहर में पानी ही नहीं आता। गेहूं की फसल हर बार सत्यानाश कर के जाता है।
इनकी फसलें पानी में डूबीं
ग्रामीण अशोक कुमार सिंह, राम अभिलाष सिंह, पंचम सिंह, श्रीनाथ वर्मा, वीरेंद्र बहादुर सिंह, बब्बन सिंह व विजय सिंह समेत सैकड़ों किसानों की फसल जलमग्न हो गई। इसमें गेहूं, मटर, चना, हल्दी, प्याज और बागवानी समेत सब्जी की खेती ज्यादा प्रभावित हुई है। वहीं पटाई पर खेती कर रहे बब्लू मौर्य व राम सुंदर वर्मा समेत दो दर्जन पटाई पर खेती करने वाले किसानों ने बताया कि सब नष्ट हो गया सारी लागत नष्ट हो गई। अब साल भर क्या खाएंगे। अगर नहर की सफाई हुई होती तो आज ऐसा न होता।
इनके घरों में घुसा पानी
ग्रामीण प्रीति देवी, बड़का, पुष्पा देवी, कलिका प्रसाद, संतराम, शिवलाल वर्मा, बुद्धिराम, चंद्रिका, रामकेवल, बाबूलाल, भगेलू, पूरन सिंह व गहरू वर्मा समेत दो दर्जन से लोगों के घरों में पानी पहुंच गया। सभी ग्रामीण दिन भर पानी निकालने में लगे हुए थे। वहीं गांव की संपत्ति और सुखराजी देवी ने बताया कि घर में पानी घुस गया है जानवर भी निकाल कर गांव के बाहर बंधे हैं। खाने पीने का सारा सामान नष्ट हो गया। आगे पानी कुछ लोग नहीं जाने दे रहे हैं। पानी नहीं निकला घर से और ऐसे ही रहा तो हमारा कच्चा मकान गिर जाएगा।
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संग्रामपुर के बड़गांव में शारदा सहायक खंड-41 से एक दिन पहले ही जायस रजबहा से पानी छोड़ा गया था। रजबहा की सफाई न होने से गुरुवार रात पानी मिश्रौली बड़गांव के आगे उफनाने लगा। इससे गरीब का पुरवा, छोटा कुर्मियान व जोगापुर गांव के आसपास के एक हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई।
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वहीं दो 20 से 25 घरों में भी पानी जा घुसा। ग्रामीणों ने घरों से सामान निकालकर और जानवरों को सुरक्षित स्थान पर बांध दिया। स्थानीय लोगों ने फोन के माध्यम से अधिकारियों को सूचित कर पानी बंद कराया। लेकिन तब तक तीन से चार किलोमीटर तक खेत खलिहान, सड़कें व घर पानी में डूब चुके थे।
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नहीं हुई थी रजबहा की सफाई
ग्रामीण विजय सिंह सहित आदि ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रजबहा की सफाई नहीं की जा रही है। नहर जलकुंभी और कुश-सरपत और कूड़े से पट गया है। इसके चलते पानी आगे नहीं जा पाया और उफनाने लगा। वहीं बताया कि बीते कई महीने पहले कुछ लोग आए थे। जेसीबी लेकर पर एक से दो जगह थोड़ा बहुत खोद कर चले गए। सफाई नहीं की गई। इसकी वजह से आज सैकड़ों किसानों की फसलें नष्ट होने की कगार पर हैं।
हर साल होती हैं फसलें जलमग्न
ग्रामीण बताते हैं कि गेहूं की फसल हर बार जलमग्न हो जाती है। पर इस बार तो गांव के घरों के अंदर पानी पहुंच गया है। कोई अधिकारी देखने तक नहीं आया। ग्रामीणों ने कहा धान के फसल के सिंचाई के समय जब सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है तब नहर में पानी ही नहीं आता। गेहूं की फसल हर बार सत्यानाश कर के जाता है।
इनकी फसलें पानी में डूबीं
ग्रामीण अशोक कुमार सिंह, राम अभिलाष सिंह, पंचम सिंह, श्रीनाथ वर्मा, वीरेंद्र बहादुर सिंह, बब्बन सिंह व विजय सिंह समेत सैकड़ों किसानों की फसल जलमग्न हो गई। इसमें गेहूं, मटर, चना, हल्दी, प्याज और बागवानी समेत सब्जी की खेती ज्यादा प्रभावित हुई है। वहीं पटाई पर खेती कर रहे बब्लू मौर्य व राम सुंदर वर्मा समेत दो दर्जन पटाई पर खेती करने वाले किसानों ने बताया कि सब नष्ट हो गया सारी लागत नष्ट हो गई। अब साल भर क्या खाएंगे। अगर नहर की सफाई हुई होती तो आज ऐसा न होता।
इनके घरों में घुसा पानी
ग्रामीण प्रीति देवी, बड़का, पुष्पा देवी, कलिका प्रसाद, संतराम, शिवलाल वर्मा, बुद्धिराम, चंद्रिका, रामकेवल, बाबूलाल, भगेलू, पूरन सिंह व गहरू वर्मा समेत दो दर्जन से लोगों के घरों में पानी पहुंच गया। सभी ग्रामीण दिन भर पानी निकालने में लगे हुए थे। वहीं गांव की संपत्ति और सुखराजी देवी ने बताया कि घर में पानी घुस गया है जानवर भी निकाल कर गांव के बाहर बंधे हैं। खाने पीने का सारा सामान नष्ट हो गया। आगे पानी कुछ लोग नहीं जाने दे रहे हैं। पानी नहीं निकला घर से और ऐसे ही रहा तो हमारा कच्चा मकान गिर जाएगा।