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Amethi News: शुरू हुआ नवजात की विकलांगता का इलाज
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बच्चे का इलाज करते हुए डॉक्टर
गौरीगंज (अमेठी)। जन्म से पैर की विकलांगता से पीड़ित नवजातों का इलाज अब जिला अस्पताल में होने लगा है। इसके लिए लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। अप्रैल माह में 13 नवजात का पंजीकरण कर इलाज किया जा रहा है।
अमूमन पैदा होते कई नवजात क्लबफुट नामक बीमारी की वजह से पैर की विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। जन्म के समय इस बीमारी की पहचान नहीं होने से कई बच्चे पूरा जीवन विकलांग रह जाते हैं। प्रसव केंद्रों पर इनकी पहचान होने के बाद संबंधित चिकित्सक उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर करते हैं।
इस बीमारी का उपचार करने के लिए अनुष्का फाउंडेशन स्वास्थ्य विभाग का सहयोग कर रहा है। फाउंडेशन जिला अस्पताल को टेक्निकल सहयोग कर मुहैया करा रहा है। इलाज के दौरान फाउंडेशन के टेक्निकल स्टॉफ भी मौजूद रहते हैं।
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जिला अस्पताल में प्रत्येक मंगलवार को ऐसे मरीजों के लिए ओपीडी की जाती है। ऐसे मरीजों का परीक्षण कर सामान्य मरीजों की तरह प्लास्टर लगाया जाता है। नवजातों को तीन से छह सप्ताह प्लास्टर लगाने से वे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति वाले मरीजों का एक छोटा ऑपरेशन कर नसों को ढीला किया जाता है।
13 नवजात का चल रहा इलाज
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि अप्रैल में क्लबफूड बीमारी से ग्रसित 13 नवजातों का पंजीकरण जिला अस्पताल में हुआ है। 12 को प्लास्टर लगाया जा रहा है, जबकि दो का ऑपरेशन किया गया है। सभी बच्चों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल में तैनात आर्थो सर्जन डॉ. बृजेश गुप्ता व डॉ. हनुमान प्रसाद इन नवजातों को प्लास्टर लगाने व ऑपरेशन करने का काम कर रहे हैं।
प्रशिक्षित किए जो चुके सीएचसी व पीएचसी के स्टॉफ
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लईक उज्ज जमा ने बताया कि इस बीमारी की पहचान जन्म के समय होने पर ही इलाज संभव है। तीन सप्ताह के बाद जानकारी होने पर इलाज संभव नहीं हैं। सभी सीएचसी व पीएचसी के चिकित्सक व स्टॉफ को जन्म के समय इस बीमारी को पहचानने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसी का परिणाम है कि जन्म के समय इसकी पहचान होने से ऐसे नवजात के परिजन उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ला रहे हैं।
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अमूमन पैदा होते कई नवजात क्लबफुट नामक बीमारी की वजह से पैर की विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। जन्म के समय इस बीमारी की पहचान नहीं होने से कई बच्चे पूरा जीवन विकलांग रह जाते हैं। प्रसव केंद्रों पर इनकी पहचान होने के बाद संबंधित चिकित्सक उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर करते हैं।
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इस बीमारी का उपचार करने के लिए अनुष्का फाउंडेशन स्वास्थ्य विभाग का सहयोग कर रहा है। फाउंडेशन जिला अस्पताल को टेक्निकल सहयोग कर मुहैया करा रहा है। इलाज के दौरान फाउंडेशन के टेक्निकल स्टॉफ भी मौजूद रहते हैं।
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जिला अस्पताल में प्रत्येक मंगलवार को ऐसे मरीजों के लिए ओपीडी की जाती है। ऐसे मरीजों का परीक्षण कर सामान्य मरीजों की तरह प्लास्टर लगाया जाता है। नवजातों को तीन से छह सप्ताह प्लास्टर लगाने से वे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति वाले मरीजों का एक छोटा ऑपरेशन कर नसों को ढीला किया जाता है।
13 नवजात का चल रहा इलाज
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि अप्रैल में क्लबफूड बीमारी से ग्रसित 13 नवजातों का पंजीकरण जिला अस्पताल में हुआ है। 12 को प्लास्टर लगाया जा रहा है, जबकि दो का ऑपरेशन किया गया है। सभी बच्चों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल में तैनात आर्थो सर्जन डॉ. बृजेश गुप्ता व डॉ. हनुमान प्रसाद इन नवजातों को प्लास्टर लगाने व ऑपरेशन करने का काम कर रहे हैं।
प्रशिक्षित किए जो चुके सीएचसी व पीएचसी के स्टॉफ
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लईक उज्ज जमा ने बताया कि इस बीमारी की पहचान जन्म के समय होने पर ही इलाज संभव है। तीन सप्ताह के बाद जानकारी होने पर इलाज संभव नहीं हैं। सभी सीएचसी व पीएचसी के चिकित्सक व स्टॉफ को जन्म के समय इस बीमारी को पहचानने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसी का परिणाम है कि जन्म के समय इसकी पहचान होने से ऐसे नवजात के परिजन उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ला रहे हैं।