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Amethi News: जिले में खुलेगा पहला राजकीय संस्कृत विद्यालय
Tue, 06 Feb 2024 01:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 06 Feb 2024 01:10 AM IST
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अमेठी सिटी। सरकार ने बजट में नए राजकीय संस्कृत विद्यालयों की स्थापना को लेकर स्वीकृति दी है। ऐसे में धार्मिक अनुष्ठान व कर्मकांड से जुड़ी शिक्षा ग्रहण करने के लिए काशी, प्रयागराज व हरिद्वार की परिक्रमा से निजात मिलेगी। अब जिले में ही पहला राजकीय संस्कृत विद्यालय का निर्माण होगा।
पूजा-पाठ व कर्मकांड के साथ संस्कृत विषय में शिक्षण कार्य को प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्कृत स्कूलों में घटती छात्र संख्या व विद्वान पंडित व आचार्यों की आवश्यकता को देखते हुए माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने पहल की है। वैसे टीकर माफी स्थित परमहंस संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत से जुड़े विभिन्न कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं। संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के बीते दिनों शासन को प्रस्ताव भेजकर राजकीय संस्कृत विद्यालय की स्थापना की बात कही थी।
इन कोर्स की होगी विशेष पढ़ाई
राजकीय संस्कृत विद्यालय में उत्तर मध्यमा (12वीं) पास विद्यार्थी को प्रवेश मिलेगा। खास बात यह है कि इन कक्षाओं में प्रवेश की कोई उम्र सीमा निर्धारित नहीं है। प्रवेश के बाद पुरोहित कर्मकांड, व्यवहारिक वास्तुशास्त्र, व्यवहारिक ज्योतिष व योग विज्ञान कोर्स में शिक्षित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त इन कोर्स के संचालन को मानक पूरी करने वाले संस्थानों का मान्यता भी प्रदान की जाएगी।
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आवासीय होगा विद्यालय
जायस स्थित जीआईसी परिसर में एक एकड़ भूमि पर राजकीय संस्कृत विद्यालय का निर्माण कराया जाना है। यूपी सिडको को 100 बेड के आवासीय संस्कृत विद्यालय भवन निर्माण समेत अन्य प्रस्तावित कार्य का अनुमानित आगणन तैयार करने को कहा गया है। आगणन तैयार होने और बजट आवंटित होने के बाद जायस में चिह्नित भूमि पर 100 बेड के छात्रावास के साथ स्कूल भवन का निर्माण होगा।
बढ़ेगा संस्कृत विषय महत्व
शिक्षाविद् पं जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी ने प्रदेश सरकार की ओर से जिले में आवासीय संस्कृत विद्यालय निर्माण के लिए बजट आवंटित करने पर खुशी जाहिर की है। कहा कि इससे संस्कृत विषय का महत्व बढ़ेगा।
शिव महेश शिक्षण संस्थान के प्रबंधक कमलाकर मिश्र ने कहा कि राजकीय संस्कृत आवासीय विद्यालय जिले में प्राचीन विरासत को सुरक्षित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
आचार्य कपिल देव मिश्र ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान व कर्मकांड से जुड़ी शिक्षा ग्रहण करने का मौका जिले में मिलने से न सिर्फ जिले में आचार्य व पंडित धार्मिक कार्य के लिए आसानी से उपलब्ध होंगे, बल्कि रोजगार का अवसर भी बढ़ेगा।
बजट के बाद होगा निर्माण
संस्कृत विद्यालय के लिए पहले से ही भूमि प्रस्तावित की गई है। शासन का निर्देश व धन मिलने के बाद विद्यालय का निर्माण कराते हुए संस्कृत पाठ्यक्रमों में शिक्षण कार्य शुरू कराया जाएगा।
-रीता सिंह, डीआईओएस
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पूजा-पाठ व कर्मकांड के साथ संस्कृत विषय में शिक्षण कार्य को प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्कृत स्कूलों में घटती छात्र संख्या व विद्वान पंडित व आचार्यों की आवश्यकता को देखते हुए माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने पहल की है। वैसे टीकर माफी स्थित परमहंस संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत से जुड़े विभिन्न कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं। संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के बीते दिनों शासन को प्रस्ताव भेजकर राजकीय संस्कृत विद्यालय की स्थापना की बात कही थी।
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इन कोर्स की होगी विशेष पढ़ाई
राजकीय संस्कृत विद्यालय में उत्तर मध्यमा (12वीं) पास विद्यार्थी को प्रवेश मिलेगा। खास बात यह है कि इन कक्षाओं में प्रवेश की कोई उम्र सीमा निर्धारित नहीं है। प्रवेश के बाद पुरोहित कर्मकांड, व्यवहारिक वास्तुशास्त्र, व्यवहारिक ज्योतिष व योग विज्ञान कोर्स में शिक्षित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त इन कोर्स के संचालन को मानक पूरी करने वाले संस्थानों का मान्यता भी प्रदान की जाएगी।
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आवासीय होगा विद्यालय
जायस स्थित जीआईसी परिसर में एक एकड़ भूमि पर राजकीय संस्कृत विद्यालय का निर्माण कराया जाना है। यूपी सिडको को 100 बेड के आवासीय संस्कृत विद्यालय भवन निर्माण समेत अन्य प्रस्तावित कार्य का अनुमानित आगणन तैयार करने को कहा गया है। आगणन तैयार होने और बजट आवंटित होने के बाद जायस में चिह्नित भूमि पर 100 बेड के छात्रावास के साथ स्कूल भवन का निर्माण होगा।
बढ़ेगा संस्कृत विषय महत्व
शिक्षाविद् पं जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी ने प्रदेश सरकार की ओर से जिले में आवासीय संस्कृत विद्यालय निर्माण के लिए बजट आवंटित करने पर खुशी जाहिर की है। कहा कि इससे संस्कृत विषय का महत्व बढ़ेगा।
शिव महेश शिक्षण संस्थान के प्रबंधक कमलाकर मिश्र ने कहा कि राजकीय संस्कृत आवासीय विद्यालय जिले में प्राचीन विरासत को सुरक्षित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
आचार्य कपिल देव मिश्र ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान व कर्मकांड से जुड़ी शिक्षा ग्रहण करने का मौका जिले में मिलने से न सिर्फ जिले में आचार्य व पंडित धार्मिक कार्य के लिए आसानी से उपलब्ध होंगे, बल्कि रोजगार का अवसर भी बढ़ेगा।
बजट के बाद होगा निर्माण
संस्कृत विद्यालय के लिए पहले से ही भूमि प्रस्तावित की गई है। शासन का निर्देश व धन मिलने के बाद विद्यालय का निर्माण कराते हुए संस्कृत पाठ्यक्रमों में शिक्षण कार्य शुरू कराया जाएगा।
-रीता सिंह, डीआईओएस