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Amethi News: प्रेम का संदेश देती हैं भगवान की बाल लीलाएं
Sun, 07 Dec 2025 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 07 Dec 2025 12:23 AM IST
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संग्रामपुर। ठेंगहा में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को पंडाल श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह से सराबोर दिखा। प्रवाचक आचार्य पंडित शिवशंकर त्रिपाठी महाराज ने नंदोत्सव, बाल लीलाएं, माखन चोरी प्रसंग, गोचारण व श्री गिरिराज गोवर्धन पूजन का मनमोहक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
प्रवाचक ने नंदबाबा के यहां आनंदोत्सव के बारे में बताते हुए कहा कि बालकृष्ण के नन्हें कदमों से गोकुल की गलियां पावन हो उठीं। इस दौरान पूरे पंडाल में नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल का जयघोष गूंजता रहा। प्रवाचक ने बाल लीलाओं, श्रीकृष्ण के रुदन, मुस्कान, बांसुरी धारण और गोकुलवासियों के स्नेह का भावपूर्ण वर्णन किया। माखन चोरी लीला का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान की लीला भक्तों को स्नेह, सरलता और प्रेम का संदेश देती हैं। नामकरण संस्कार और गोचारण लीला सुनते ही पंडाल तालियों से गूंज उठता है।
कथा का मुख्य आकर्षण रहा श्री गिरिराज गोवर्धन पूजन, जिसमें बताया कि भगवान ने इंद्र के अभिमान को दूर कर गोकुलवासियों को सुरक्षित रखने के लिए गिरिराज पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर धारण किया। इस दौरान जगदीश नारायण अग्रहरि, हुकुम चंद्र, यज्ञ नारायण तिवारी, रघुनाथ पांडेय, लक्ष्मी कांत, महादेव बरनवाल आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने नंदबाबा के यहां आनंदोत्सव के बारे में बताते हुए कहा कि बालकृष्ण के नन्हें कदमों से गोकुल की गलियां पावन हो उठीं। इस दौरान पूरे पंडाल में नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल का जयघोष गूंजता रहा। प्रवाचक ने बाल लीलाओं, श्रीकृष्ण के रुदन, मुस्कान, बांसुरी धारण और गोकुलवासियों के स्नेह का भावपूर्ण वर्णन किया। माखन चोरी लीला का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान की लीला भक्तों को स्नेह, सरलता और प्रेम का संदेश देती हैं। नामकरण संस्कार और गोचारण लीला सुनते ही पंडाल तालियों से गूंज उठता है।
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कथा का मुख्य आकर्षण रहा श्री गिरिराज गोवर्धन पूजन, जिसमें बताया कि भगवान ने इंद्र के अभिमान को दूर कर गोकुलवासियों को सुरक्षित रखने के लिए गिरिराज पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर धारण किया। इस दौरान जगदीश नारायण अग्रहरि, हुकुम चंद्र, यज्ञ नारायण तिवारी, रघुनाथ पांडेय, लक्ष्मी कांत, महादेव बरनवाल आदि मौजूद रहे।
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