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Amethi News: सीबीआई जांच होने से बढ़ीं धड़कनें

Mon, 01 Jun 2026 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Mon, 01 Jun 2026 12:44 AM IST
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The CBI investigation increased the heartbeat
अमेठी सिटी। बेसिक शिक्षा विभाग में छह करोड़ रुपये से अधिक के चर्चित गबन प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद विभागीय हलकों में हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि जांच एजेंसी केवल दर्ज रिपोर्ट में नामजद लोगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धनराशि और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर सकती है। ऐसे में वर्षों पुराने भुगतान, वित्तीय अभिलेख और संदिग्ध लेनदेन भी जांच के घेरे में आ सकते हैं।
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मामले को लेकर चर्चाओं का दौर इसलिए भी तेज है क्योंकि जांच के हर चरण में गबन की संभावित राशि बढ़ती गई। प्रारंभिक विभागीय जांच में सामने आया आंकड़ा बाद की जांच में लगातार बढ़ा। अब माना जा रहा है कि सीबीआई की गहन पड़ताल में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार बैंक खातों, भुगतान आदेशों, कोषागार अभिलेखों, वित्त एवं लेखा कार्यालय के रिकॉर्ड और लाभार्थियों से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच हो सकती है।
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इससे अब तक जांच की जद से बाहर रहे कई लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि जांच केवल एक मामले तक सीमित न रहकर पूरी कार्यप्रणाली की हो सकती है।
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विभागीय जांच में 3.13 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई थी। बाद में यह राशि 4.34 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई। पुलिस जांच में संभावित गबन छह करोड़ रुपये से ऊपर आंका गया। अब सभी की निगाहें सीबीआई जांच पर टिकी हैं।



आर्थिक अपराध शाखा कर रही विवेचना

प्रकरण की जांच वर्तमान में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के पास है। शाखा वित्तीय दस्तावेजों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड का परीक्षण कर रही है। सीबीआई जांच की चर्चा के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया है


मनी लॉन्ड्रिंग की दर्ज हो सकती है रिपोर्ट
अधिवक्ता अमरेंद्र ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश में गबन राशि की रिकवरी को लेकर टिप्पणी की गई है। ऐसे में रिकवरी हो सके इसके लिए मनी लॉन्ड्रिंग में रिपोर्ट दर्ज करानी होगी। जांच में गबन की रकम को छिपाने, स्थानांतरित करने या अवैध तरीके से उपयोग करने के प्रमाण मिलते हैं तो धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़े पहलुओं की भी जांच हो सकती है। ऐसे मामलों में अवैध रूप से अर्जित धन और उससे खरीदी गई संपत्तियों की पहचान कर उनकी रिकवरी का रास्ता भी खुल सकता है।



ये है मामला
बेसिक शिक्षा विभाग में अवशेष देयक, सामान्य भविष्य निधि और बीमा मद से जुड़े भुगतानों में वित्तीय अनियमितता उजागर हुई थी। प्रकरण में शिक्षक, लिपिकीय कर्मियों और आउटसोर्स कर्मचारियों सहित कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर जारी है।
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