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सावन के पहले सोमवार को लेकर शिवालय तैयार

Sun, 25 Jul 2021 11:19 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jul 2021 11:19 PM IST
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temples are ready for first monday of sawan
05 : जगदीशपुर : सावन में सज-धज कर तैयार इंडोगल्फ परिसर स्थित शिवालय। - फोटो : AMETHI
गौरीगंज/जगदीशपुर (अमेठी)। श्रावण मास शुरू होने के दूसरे ही दिन पहला सोमवार पड़ रहा है। पहले सोमवार को शिवालयों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। भीड़ का अनुमान लगाते हुए मंदिर संचालकों की ओर से व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया।
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इस वर्ष श्रावण मास का शुभारंभ 25 जुलाई रविवार को हुआ है। पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार इस वर्ष श्रावण माह में कुल चार सोमवार पड़ेंगे। बताया की श्रावण माह में किसी वर्ष चार तो किसी वर्ष पांच सोमवार पड़ते हैं। मास के पहले सोमवार का व्रत 26 जुलाई, दूसरा दो अगस्त, तीसरा नौ अगस्त तथा चौथे सोमवार का व्रत 16 अगस्त को पड़ेगा।
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वैसे तो पूरा श्रावण मास भगवान शिव का माना जाता है, लेकिन सोमवार का दिन खासतौर पर महादेव की आराधना के लिए माना गया है। ऐसे में इस माह में पड़ने वाले सोमवार का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। कई श्रद्धालु तो पूरा श्रावण मास भगवान भोलेनाथ का व्रत रखते हैं।
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जो श्रद्धालु पूरा माह महादेव का व्रत नहीं रख पाते वह लोग प्रत्येक सोमवार का व्रत रखकर उनकी आराधना करते हैं। इस वर्ष कोविड के चलते कांवड़ यात्रा की अनुमति नहीं मिलने से हर वर्ष कांवड़ लेकर बड़ी संख्या में जाने वाले श्रद्धालु शिवालयों पहुंचेंगे। भोलेनाथ की पूजा-अर्चना श्रद्धालु पूरे माह अपने-अपने तरीके से करेंगे।
ये है मान्यता
सावन के सोमवार के दिन ही माता पार्वती ने महादेव के व्रत की शुरुआत की थी। मान्यता है कि कुंवारी लड़कियों को व्रत रखने से महादेव जैसा आदर्श पति प्राप्त होता है। शादीशुदा लोगों के जीवन की वैवाहिक परेशानियां दूर होती हैं और जीवन अत्यंत सुखमय हो जाता है। इसके अलावा अकाल मृत्यु और दुर्घटना आदि से मुक्ति मिलने के साथ ही व्यक्ति निरोगी हो जाता है।

इस तरह करें आयोजन
जगदीशपुर। पंडित अनिल शास्त्री ने बताया कि सोमवार के दिन सुबह बह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद महादेव और माता पार्वती के समक्ष व्रत का संकल्प लें। इसके बाद दोनों के साथ वाली प्रतिमा या शिवलिंग को स्थापित कर जलाभिषेक करें। जलाभिषेक के बाद महादेव को चंदन और माता पार्वती को सिंदूर अर्पित कर उन्हें फूल, धतूरा, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित करना चाहिए। इसके बाद माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित कर धूप, दीप और प्रसाद आदि चढ़ाकर भगवान के सामने शांत बैठ कर ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप, शिव चालीसा पाठ व आरती का गायन करना चाहिए। अंत में भगवान से अपनी भूल चूक को माफ करने के लिए प्रार्थना करना चाहिए।
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