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सोलर पैनल से आईटीआई को मिलेगी निर्बाध बिजली

Fri, 11 Nov 2022 11:16 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Nov 2022 11:16 PM IST
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solar pannel will be stalled in two government ITI
गौरीगंज (अमेठी)। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में निर्बाध बिजली आपूर्ति न मिल पाने से अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण में व्यवधान होता था। इस समस्या को दूर करने व बिजली के भारी भरकम बिल से बचने के लिए निदेशालय ने जिला मुख्यालय गौरीगंज व मुसाफिरखाना स्थित राजकीय आईटीआई में सोलर पैनल लगवाने का निर्णय लिया है। दोनों संस्थानों मेें 40-40 किलोवाट के सोलर पैनल लगवाने पर 96 लाख रुपये खर्च होंगे।
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युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें रोजगार हासिल करने में मदद मिलती है। अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के दौरान इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिकल्स जैसे ट्रेडों में बिजली की आवश्यकता होती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आईटीआई में निर्बाध बिजली नहीं मिल पाती है।
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इससे आईटीआई में अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण में व्यवधान उत्पन्न होता है। ऐसे में अभ्यर्थी विस्तारित तरीके से प्रशिक्षण का लाभ नहीं पाते हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए राजकीय आईटीआई निदेशालय उत्तर प्रदेश ने सोलर पैनल स्थापित करने का निर्णय लिया है। प्रथम चरण में गौरीगंज व मुसाफिरखाना आईटीआई का चयन कर सोलर पैनल स्थापित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रत्येक आईटीआई में 48 लाख रुपये की लागत से 40 किलोवाट का सोलर पैनल लगाया जा रहा है। सोलर पैनल लगने से बिजली की समस्या से निजात मिल जाएगी।
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100 किलोवाट का रहता है भार
गौरीगंज व मुसाफिरखाना के आईटीआई में प्रशिक्षण के लिए 12-12 ट्रेड हैं। अभ्यर्थियों को संबंधित ट्रेड में दक्ष करने के लिए करीब 100 किलोवाट बिजली भार की आवश्यकता होती है। लेकिन निर्बाध आपूर्ति न मिलने से संबंधित ट्रेडों की मशीनरी संचालित नहीं हो पाती। 40 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित होने से आवश्यक मशीन संचालित हो सकेंगी। जबकि भारी क्षमता वाली मशीनों को संचालित करने के लिए बिजली का उपयोग किया जाएगा।

लिथियम बैटरी में स्टोर होगी बिजली
प्रभारी प्रधानाचार्य अजय कुमार सिंह ने बताया कि सोलर पैनल लगने से काफी राहत मिलेगी। सोलर पैनल से मिलने वाली ऊर्जा को लिथियम बैटरी में एकत्र किया जाएगा। यही एकत्र बिजली बाद में कॉलेज के संसाधनों को संचालित करने के काम आएगी।
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