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Amethi News: दर्द में मुस्कुराना कठिन काम है...
Sat, 08 Feb 2025 12:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 08 Feb 2025 12:22 AM IST
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अमेठी। अवधी साहित्य संस्थान एवं साधना फाउंडेशन की ओर से शहर के चाणक्यपुरी मोहल्ले में सम्मान समारोह एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा पर पूजन, माल्यार्पण एवं रामेश्वर सिंह की वाणी वंदना के साथ हुआ।
कवि गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बांधा। समीर मिश्रा ने पढ़ा, दूसरों को अन्न देता, पर स्वयं भूखा हूं, मैं देश का किसान हूं। नरेंद्र प्रताप शुक्ल ने पढ़ा, दर्द में मुस्कुराना कठिन काम है, हाले-दिल भी छुपाना कठिन काम है। राधेश्याम पांडेय दीन ने पढ़ा, भारत माता हमका जान से ज्यादा प्यारी बाटै, सारे जहां से न्यारी बाटै। डॉ. केशरी शुक्ल ने पढ़ा, उम्रभर कहती हैं जो मायके को घर अपना, कैसे कहते हैं लोग होती पराई बेटी। श्रीनाथ शुक्ला ने पढ़ा, पांच तत्वों से पिंजरा बनाया। ज्ञानेंद्र पांडे अवध मधुरस ने पढ़ा, बेरि केरि के संग है न, अंधी भक्ति सरीना।
इससे पहले अवधी साहित्य संस्थान अमेठी के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पाण्डेय ने कहा कि धर्म एवं संस्कृति सामाजिक समरसता के मेरुदंड हैं, जिनका संवर्धन साहित्य के बिना संभव नहीं है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बाबा मनोहर सिंह ने मातृभूमि और मातृभाषा को आत्मा का रक्त बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया। मुख्य अतिथि पं. अवधेश नारायण पाण्डेय ने कहा कि कौन जानता था मुझे तेरी बंदगी से पहले, कर्म और धर्म की भावना मैंने अपनी मां से सीखी। हमें निज भाषा, संस्कृति और धर्म पर गर्व होना चाहिए।
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इसके अलावा राजकुमारी संस्कृति, जगदंबा तिवारी मधुर, सुरेश चंद्र शुक्ल, रामबदन शुक्ल, अमर बहादुर सिंह, शब्बीर अहमद सूरी, चंद्र प्रकाश पांडेय मंजुल सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर साधना तिवारी, अनुभव मिश्र, शिवकुमार शुक्ल, सुनील तिवारी, यज्ञ नारायण उपाध्याय, कैलाश नाथ शर्मा, डॉ. अभिमन्यु पाण्डेय, अमरीश मिश्र, सदाशिव पांडेय आदि मौजूद रहे।
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कवि गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बांधा। समीर मिश्रा ने पढ़ा, दूसरों को अन्न देता, पर स्वयं भूखा हूं, मैं देश का किसान हूं। नरेंद्र प्रताप शुक्ल ने पढ़ा, दर्द में मुस्कुराना कठिन काम है, हाले-दिल भी छुपाना कठिन काम है। राधेश्याम पांडेय दीन ने पढ़ा, भारत माता हमका जान से ज्यादा प्यारी बाटै, सारे जहां से न्यारी बाटै। डॉ. केशरी शुक्ल ने पढ़ा, उम्रभर कहती हैं जो मायके को घर अपना, कैसे कहते हैं लोग होती पराई बेटी। श्रीनाथ शुक्ला ने पढ़ा, पांच तत्वों से पिंजरा बनाया। ज्ञानेंद्र पांडे अवध मधुरस ने पढ़ा, बेरि केरि के संग है न, अंधी भक्ति सरीना।
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इससे पहले अवधी साहित्य संस्थान अमेठी के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पाण्डेय ने कहा कि धर्म एवं संस्कृति सामाजिक समरसता के मेरुदंड हैं, जिनका संवर्धन साहित्य के बिना संभव नहीं है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बाबा मनोहर सिंह ने मातृभूमि और मातृभाषा को आत्मा का रक्त बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया। मुख्य अतिथि पं. अवधेश नारायण पाण्डेय ने कहा कि कौन जानता था मुझे तेरी बंदगी से पहले, कर्म और धर्म की भावना मैंने अपनी मां से सीखी। हमें निज भाषा, संस्कृति और धर्म पर गर्व होना चाहिए।
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इसके अलावा राजकुमारी संस्कृति, जगदंबा तिवारी मधुर, सुरेश चंद्र शुक्ल, रामबदन शुक्ल, अमर बहादुर सिंह, शब्बीर अहमद सूरी, चंद्र प्रकाश पांडेय मंजुल सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर साधना तिवारी, अनुभव मिश्र, शिवकुमार शुक्ल, सुनील तिवारी, यज्ञ नारायण उपाध्याय, कैलाश नाथ शर्मा, डॉ. अभिमन्यु पाण्डेय, अमरीश मिश्र, सदाशिव पांडेय आदि मौजूद रहे।