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Amethi News: कर्म का संदेश देती है श्रीमद्भागवत कथा
Mon, 05 Jan 2026 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 05 Jan 2026 12:33 AM IST
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.जामों के हरगांव में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत-आयोजक
जामों। श्रीमद्भागवत कथा जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। यह कथा मनुष्य को संस्कार, परिश्रम और निस्वार्थ कर्म का संदेश देती है। ध्रुव चरित्र से आज के बच्चों को प्रेरणा लेनी चाहिए। ध्रुव ने बचपन में कठिन परिश्रम, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ ईश्वर की आराधना कर लक्ष्य प्राप्त किया। ये बातें हरगांव बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को अयोध्या धाम से आए प्रवाचक आचार्य दिनकर महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि बच्चों को संस्कारित जीवन की शिक्षा देना जरूरी है। पढ़ाई के साथ श्रम का महत्व समझाना भी आवश्यक है। अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है। धन, पद और शरीर पर घमंड करने से व्यक्ति गलत मार्ग पर चला जाता है। अहंकार और पाप कर्म जीवन में दुख बढ़ाते हैं, जबकि विनम्रता और सद्कर्म सुख का मार्ग दिखाते हैं। कथा के दौरान बताया गया कि मनुष्य को अपने आराध्य देव पर विश्वास रखकर निस्वार्थ कर्म करना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और गरीब व असहाय लोगों की मदद करने का संदेश भी देती है।
प्रवाचक ने कहा कि वर्तमान समय में लोग भौतिक युग में धन की दौड़ में जीवन व्यर्थ कर देते हैं। यदि वही मेहनत ईश्वर भक्ति और मानव सेवा में लगाई जाए तो जीवन सफल और कल्याणकारी बन सकता है। इस मौके पर मुख्य यजमान अमित कुमार श्रीवास्तव और उनकी पत्नी कुसुमलता श्रीवास्तव, मंदिर के महंत रेखादास, कालिका प्रसाद शुक्ल, आनंद सिंह, शीतलाबख्श सिंह, गोपाल मिश्र, बबलू पांडेय, सौरभ पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि बच्चों को संस्कारित जीवन की शिक्षा देना जरूरी है। पढ़ाई के साथ श्रम का महत्व समझाना भी आवश्यक है। अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है। धन, पद और शरीर पर घमंड करने से व्यक्ति गलत मार्ग पर चला जाता है। अहंकार और पाप कर्म जीवन में दुख बढ़ाते हैं, जबकि विनम्रता और सद्कर्म सुख का मार्ग दिखाते हैं। कथा के दौरान बताया गया कि मनुष्य को अपने आराध्य देव पर विश्वास रखकर निस्वार्थ कर्म करना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और गरीब व असहाय लोगों की मदद करने का संदेश भी देती है।
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प्रवाचक ने कहा कि वर्तमान समय में लोग भौतिक युग में धन की दौड़ में जीवन व्यर्थ कर देते हैं। यदि वही मेहनत ईश्वर भक्ति और मानव सेवा में लगाई जाए तो जीवन सफल और कल्याणकारी बन सकता है। इस मौके पर मुख्य यजमान अमित कुमार श्रीवास्तव और उनकी पत्नी कुसुमलता श्रीवास्तव, मंदिर के महंत रेखादास, कालिका प्रसाद शुक्ल, आनंद सिंह, शीतलाबख्श सिंह, गोपाल मिश्र, बबलू पांडेय, सौरभ पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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