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Amethi News: भक्ति से प्रसन्न होते हैं श्रीराम
Wed, 18 Jun 2025 12:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 18 Jun 2025 12:51 AM IST
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जायस हनुमान मंदिर परिसर में श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत- आयोजक
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फुरसतगंज (अमेठी)। भगवान राम अपने भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं। हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए। कभी भी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए। ये बातें प्रवाचक आराधना देवी ने जायस में श्रीराम कथा के दौरान कहीं। उन्होंने कैकेयी हठ, राम वनवास और केवट प्रसंग की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
श्रीराम कथा के छठे दिन प्रवाचक ने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ ने भगवान राम व उनके सभी भाइयों के विवाह के बाद राजगद्दी श्रीराम को सौंपने की तैयारी की। जानकारी होते ही रानी कैकेयी की सेविका मंथरा ने ऐसा प्रपंच रचा कि कैकेयी कोप भवन में चली गईं। राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। रघुकुल की मर्यादा से बंधे राजा दशरथ ने दोनों मांगें पूरी कीं। भगवान राम को जब यह विदित होता है तो वे राजा दशरथ व अपनी माताओं की आज्ञा लेकर भाई लक्ष्मण और माता सीता के साथ वन को निकल जाते हैं।
शृंगवेरपुर पहुंचने पर गंगा पार कराने के लिए केवट राम के चरणों को धुलने की शर्त रखता है। केवट की भक्ति और उसके मनोभाव को समझ भगवान राम इसकी अनुमति देते हैं। केवट भगवान राम के पैर धोकर चरणामृत लेता है। इसके बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराई। इसके बदले केवट को माता सीता की अंगूठी देने लगे तो उसने मना कर दिया। कहा कि प्रभु मैंने तो काठ की नाव से आपको गंगा पार कराई है आप मुझे भवसागर से पार कर दीजिएगा। इस अवसर पर मनीष केडिया, विजय जालान, वंदना अग्रवाल, अर्चना माहेश्वरी, अंशिका, राम अग्रवाल, महेश मोदनवाल, अभिषेक, राजा राम सोनी आदि मौजूद रहे।
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श्रीराम कथा के छठे दिन प्रवाचक ने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ ने भगवान राम व उनके सभी भाइयों के विवाह के बाद राजगद्दी श्रीराम को सौंपने की तैयारी की। जानकारी होते ही रानी कैकेयी की सेविका मंथरा ने ऐसा प्रपंच रचा कि कैकेयी कोप भवन में चली गईं। राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। रघुकुल की मर्यादा से बंधे राजा दशरथ ने दोनों मांगें पूरी कीं। भगवान राम को जब यह विदित होता है तो वे राजा दशरथ व अपनी माताओं की आज्ञा लेकर भाई लक्ष्मण और माता सीता के साथ वन को निकल जाते हैं।
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शृंगवेरपुर पहुंचने पर गंगा पार कराने के लिए केवट राम के चरणों को धुलने की शर्त रखता है। केवट की भक्ति और उसके मनोभाव को समझ भगवान राम इसकी अनुमति देते हैं। केवट भगवान राम के पैर धोकर चरणामृत लेता है। इसके बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराई। इसके बदले केवट को माता सीता की अंगूठी देने लगे तो उसने मना कर दिया। कहा कि प्रभु मैंने तो काठ की नाव से आपको गंगा पार कराई है आप मुझे भवसागर से पार कर दीजिएगा। इस अवसर पर मनीष केडिया, विजय जालान, वंदना अग्रवाल, अर्चना माहेश्वरी, अंशिका, राम अग्रवाल, महेश मोदनवाल, अभिषेक, राजा राम सोनी आदि मौजूद रहे।
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