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Amethi News: चालक-परिचालकों की कमी से जूझ रहा रोडवेज डिपो
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अमेठी। अमेठी डिपो चालक-परिचलाकों की भारी कमी से जूझ रहा है। वर्तमान में चालकों व परिचालकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। इससे डिपो प्रबंधन को बसों के संचालन में दिक्कत हो रही है। इस वजह से रोडवेज बसों के फेरों में समस्या आती है। एआरएम ने चालकों और परिचालकों को बसों के बेहतर संचालन के साथ यात्री सुविधाओं का ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
अमेठी डिपो के बेड़े में इस समय निगम की 43 व अनुबंधित तीन बसें शामिल हैं, जिनका संचालन आगरा, लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रयागराज, कानपुर, दिल्ली सहित अन्य रूटों पर किया जा रहा है। जिसमें 15 नियमित, 65 संविदा चालक और 14 नियमित, 57 संविदा परिचालक कार्यरत हैं। जिनमें नियमित 15 चालक में छह बस चलाने योग्य नहीं हैं तो 74 चालक डिपो पर बसें चला रहे हैं। वहीं नियमित 14 परिचालक में तीन ऑफिस कार्य में लगे हैं। परिचालक कार्य में 68 है। जबकि डिपो में बसों के अनुसार करीब 100 परिचालक व 93 चालक होने चाहिए।
काफी समय से चालक और परिचालक के पद रिक्त चल रहे हैं। इनकी कमी से कुछ मार्गों पर बस सेवा ठप है। कहीं यात्रियों को बेहतर सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पहले दिल्ली व कानपुर के लिए दो बसें चलाई जाती थीं। चालक-परिचालक की कमी के चलते एक बस का परिचालन बंद कर दिया गया। इसी तरह कई रूटों पर बसों के फेरे कम हुए हैं।
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मुसाफिरों को होती है दिक्कत
परिचालकों की संख्या कम होने के कारण रोडवेज बसों के फेरे कम होते हैं, जिससे यात्रियों को बस स्टॉप पर समय से बसें नहीं मिलतीं, वहीं स्टेशन पर भी यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ता है। इसका लाभ प्राइवेट टैक्सी, निजी बस व अन्य वाहन चालक उठाते हैं। बसों का ज्यादा देर इंतजार करने के बजाय यात्री इन वाहनों से गंतव्य के लिए चले जाते हैं।
नियुक्ति की उच्चाधिकारियों से की है मांग
एआरएम काशी प्रसाद ने बताया कि रोडवेज बसों में अनुपात में चालक व परिचालकों की तैनाती की जाती है। इस समय चालक व परिचालकों की संख्या कम होने के कारण कुछ बसों के फेरे कम लग पाते हैं। स्वीकृत पदों के सापेक्ष चालक व परिचालकों की नियुक्ति की मांग उच्च अधिकारियों से की गई है।
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अमेठी डिपो के बेड़े में इस समय निगम की 43 व अनुबंधित तीन बसें शामिल हैं, जिनका संचालन आगरा, लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रयागराज, कानपुर, दिल्ली सहित अन्य रूटों पर किया जा रहा है। जिसमें 15 नियमित, 65 संविदा चालक और 14 नियमित, 57 संविदा परिचालक कार्यरत हैं। जिनमें नियमित 15 चालक में छह बस चलाने योग्य नहीं हैं तो 74 चालक डिपो पर बसें चला रहे हैं। वहीं नियमित 14 परिचालक में तीन ऑफिस कार्य में लगे हैं। परिचालक कार्य में 68 है। जबकि डिपो में बसों के अनुसार करीब 100 परिचालक व 93 चालक होने चाहिए।
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काफी समय से चालक और परिचालक के पद रिक्त चल रहे हैं। इनकी कमी से कुछ मार्गों पर बस सेवा ठप है। कहीं यात्रियों को बेहतर सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पहले दिल्ली व कानपुर के लिए दो बसें चलाई जाती थीं। चालक-परिचालक की कमी के चलते एक बस का परिचालन बंद कर दिया गया। इसी तरह कई रूटों पर बसों के फेरे कम हुए हैं।
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मुसाफिरों को होती है दिक्कत
परिचालकों की संख्या कम होने के कारण रोडवेज बसों के फेरे कम होते हैं, जिससे यात्रियों को बस स्टॉप पर समय से बसें नहीं मिलतीं, वहीं स्टेशन पर भी यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ता है। इसका लाभ प्राइवेट टैक्सी, निजी बस व अन्य वाहन चालक उठाते हैं। बसों का ज्यादा देर इंतजार करने के बजाय यात्री इन वाहनों से गंतव्य के लिए चले जाते हैं।
नियुक्ति की उच्चाधिकारियों से की है मांग
एआरएम काशी प्रसाद ने बताया कि रोडवेज बसों में अनुपात में चालक व परिचालकों की तैनाती की जाती है। इस समय चालक व परिचालकों की संख्या कम होने के कारण कुछ बसों के फेरे कम लग पाते हैं। स्वीकृत पदों के सापेक्ष चालक व परिचालकों की नियुक्ति की मांग उच्च अधिकारियों से की गई है।