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कृषि रक्षा इकाईयों से गायब कीटनाशक रसायन
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अमेठी। जिले के सभी 13 ब्लॉकों के मुख्यालय परिसर में संचालित कृषि रक्षा इकाइयां इन दिनों खाली पड़ी हैं। इन इकाइयों पर कृषि रक्षा से जुड़े रसायन की अनुपलब्धता के चलते किसान इनकी खरीद निजी दुकानों से करने को विवश हैं। हालांकि विभाग ने खरीफ सीजन में केंद्रों पर कृषि रक्षा रसायन रहने और बिक्री होने का दावा किया है।
किसानों को फसल की बुआई व बाद में फसलों में कीड़ों का प्रकोप होने की दशा में कृषि रक्षा रसायन मुहैया कराने के लिए कई दशक पूर्व जिले के सभी ब्लॉकों में कृषि रक्ष इकाइयों की स्थापना हुई थी। शुरुआत में किसानों को सुविधा प्रदान करने वाले यह केंद्र इन दिनों खाली पड़े हैं।
आलम यह है कि रवी सीजन में गेहूं समेत अन्य फसलों की बुआई से पहले व बोई जा चुकी फसलों को कीट पतंगों से बचाने के लिए किसान इन इकाइयों पर पहुंचता है तो उसे बताया जाता है कि अभी कोई भी रसायन शासन से उपलब्ध नहीं कराया गया है।
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इन इकाइयों पर कृषि रक्षा से जुड़ी दवाइयां व खर पतवार नाशक नहीं होने से किसानों को मजबूरन ऐसी निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ा है जहां मिलने वाली दवाइयों महंगी तो हैं लेकिन उनकी कोई गारंटी नहीं है। जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने बताया कि शासन से दवाओं की मांग की गई है।
दवाएं मिलते ही सभी केंद्रों को मुहैया करा दी जाएंगी। पांडेय ने बताया कि खरीफ सीजन में जिले को 387 लीटर इमिजाथापर, नौ लीटर क्यूनाल फास, 2242 किलोग्राम ट्राइकोडरमा व 874 किलोग्राम ब्यूवेरिया बैसियाना नाम की दवा मिली थी। कहा कि इन इकाइयों पर बिकने वाली सभी दवाओं पर किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान मिलता है।
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किसानों को फसल की बुआई व बाद में फसलों में कीड़ों का प्रकोप होने की दशा में कृषि रक्षा रसायन मुहैया कराने के लिए कई दशक पूर्व जिले के सभी ब्लॉकों में कृषि रक्ष इकाइयों की स्थापना हुई थी। शुरुआत में किसानों को सुविधा प्रदान करने वाले यह केंद्र इन दिनों खाली पड़े हैं।
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आलम यह है कि रवी सीजन में गेहूं समेत अन्य फसलों की बुआई से पहले व बोई जा चुकी फसलों को कीट पतंगों से बचाने के लिए किसान इन इकाइयों पर पहुंचता है तो उसे बताया जाता है कि अभी कोई भी रसायन शासन से उपलब्ध नहीं कराया गया है।
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इन इकाइयों पर कृषि रक्षा से जुड़ी दवाइयां व खर पतवार नाशक नहीं होने से किसानों को मजबूरन ऐसी निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ा है जहां मिलने वाली दवाइयों महंगी तो हैं लेकिन उनकी कोई गारंटी नहीं है। जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने बताया कि शासन से दवाओं की मांग की गई है।
दवाएं मिलते ही सभी केंद्रों को मुहैया करा दी जाएंगी। पांडेय ने बताया कि खरीफ सीजन में जिले को 387 लीटर इमिजाथापर, नौ लीटर क्यूनाल फास, 2242 किलोग्राम ट्राइकोडरमा व 874 किलोग्राम ब्यूवेरिया बैसियाना नाम की दवा मिली थी। कहा कि इन इकाइयों पर बिकने वाली सभी दवाओं पर किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान मिलता है।