{"_id":"6148ca9e8ebc3e88394c9b4d","slug":"no-gynacologist-in-amethi-how-could-women-get-treatment-amethi-news-lko5964625107","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला डॉक्टर नहीं, कैसे हो महिलाओं का इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला डॉक्टर नहीं, कैसे हो महिलाओं का इलाज
विज्ञापन
02 : गौरीगंज : जिला अस्पताल में सोमवार को मरीजों को उपचार करते चिकित्सक। -संवाद
- फोटो : AMETHI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौरीगंज (अमेठी)। जिले में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की कमी से महिलाओं के इलाज में दिक्कतें आ रही हैं। महिला रोगों का इलाज जहां जनरल फिजीशियन (पुरुष डॉक्टर) के भरोसे है। वहीं जिले भर में प्रसव स्टाफ नर्सों के भरोसे कराया जा रहा है।
सिजेरियन (ऑपरेशन) का जिम्मा भी जनरल सर्जन पर है। जिला अस्पताल से लेकर सभी सीएचसी तक महिला डॉक्टर न होने से दुष्कर्म के मामलों में मेडिको लीगल के लिए भी पीड़िताओं को दूसरे जिले में भटकना पड़ रहा है। हालत यह है कि जिले भर में स्वीकृत महिला डॉक्टरों के 17 पदों में कुल तीन की ही तैनाती है उसमें भी दो मैटरनिटी अवकाश पर हैं।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 147.96 करोड़ रुपये की लागत से मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला अस्पताल के साथ तिलोई में 200 शैय्या, अमेठी में 50 शैय्या, ट्रॉमा सेंटर निर्माण के साथ 13 सीएचसी, 30 पीएचसी व 102 हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। बावजूद इसके लिए जिले में चिकित्सकों की भारी कमी है।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा मुश्किलें महिलाओं के इलाज में आ रही हैं। क्योंकि जिले भर में महिला डॉक्टरों का टोटा है। जिला अस्पताल की बात करें तो इस समय प्रतिदिन करीब 500-600 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें 150 के करीब महिला मरीज होती हैं।
जिला अस्पताल में इस समय एक भी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं है। अमेठी व जायस सीएचसी से दो महिला चिकित्सक (डॉ. जरीना खान व डॉ. काजल साहू) को महिलाओं के इलाज के लिए जिला अस्पताल से संबद्ध किया गया था। लेकिन दोनों ही इस समय अवकाश पर हैं। ऐसे में सामान्य महिला रोगों व गर्भवती महिलाओं दोनों का इलाज मुश्किल है। इनका इलाज सामान्य फिजीशियन के ही भरोसे है।
सोमवार को अस्पताल उपचार कराने पहुंची सारीपुर की आरती मिश्र ने बताया कि वह लगातार अस्पताल आ रही हैं। महिला चिकित्सक ने नहीं आने से उन्हें उपचार कराने में परेशानी हो रही है। अस्पताल में मौजूद नसरीन, सुनीता, नीशा, रानी, सुषमा व सिमरन ने बताया कि जिले में महिला उपचार की कोई व्यवस्था न होने से यहां से बिना इलाज लौटना पड़ रहा है। निजी चिकित्सक से उपचार कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रसव भी स्टाफ नर्स के भरोसे
जिले की सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक प्रसव का जिम्मा स्टाफ नर्सों पर है। ऐसे में अगर प्रसव में जटिलता होती है तो जच्चा-बच्चा का क्या होगा इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इसके अलावा सिजेरियन (ऑपरेशन) भी गायनी सर्जन के बजाए जनरल सर्जन ही कराते हैं।
मेडिको लीगल के लिए करते हैं रेेफर
महिला डॉक्टरों की कमी से हो रही परेशानी महज गर्भवती व प्रसूताओं तक सीमित नहीं है। मेडिको लीगल के लिए भी जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक कोई व्यवस्था नहीं है। दुष्कर्म पीड़िताओं को दूसरे जिले रेफर किया जाता है। ऐसे में पीड़िता के साथ पुलिस कर्मियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
13 सीएचसी में महज तीन महिला डॉक्टर
जिला अस्पताल में तीन ईएमओ व एक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत हैं। जिसमें एक भी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। वहीं जिले के 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुल तीन जगह ही महिला डॉक्टरों की तैनाती है। जिसमें अमेठी सीएचसी में डॉ. जरीना खान व जायस सीएचसी में डॉ. काजल साहू की तैनाती है। लेकिन इस समय दोनों ही डॉक्टर छुट्टी पर चल रही हैं। जगदीशपुर सीएचसी में डॉ. ईला सिंह की तैनाती है।
की गई है डिमांड: सीएमएस
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में महिला चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। शासन से डॉक्टरों के तैनाती की डिमांड की गई है। बताया कि इस समय दोनों महिला चिकित्सक मेडिकल अवकाश पर हैं।
विज्ञापन
सिजेरियन (ऑपरेशन) का जिम्मा भी जनरल सर्जन पर है। जिला अस्पताल से लेकर सभी सीएचसी तक महिला डॉक्टर न होने से दुष्कर्म के मामलों में मेडिको लीगल के लिए भी पीड़िताओं को दूसरे जिले में भटकना पड़ रहा है। हालत यह है कि जिले भर में स्वीकृत महिला डॉक्टरों के 17 पदों में कुल तीन की ही तैनाती है उसमें भी दो मैटरनिटी अवकाश पर हैं।
विज्ञापन
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 147.96 करोड़ रुपये की लागत से मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला अस्पताल के साथ तिलोई में 200 शैय्या, अमेठी में 50 शैय्या, ट्रॉमा सेंटर निर्माण के साथ 13 सीएचसी, 30 पीएचसी व 102 हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। बावजूद इसके लिए जिले में चिकित्सकों की भारी कमी है।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा मुश्किलें महिलाओं के इलाज में आ रही हैं। क्योंकि जिले भर में महिला डॉक्टरों का टोटा है। जिला अस्पताल की बात करें तो इस समय प्रतिदिन करीब 500-600 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें 150 के करीब महिला मरीज होती हैं।
जिला अस्पताल में इस समय एक भी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं है। अमेठी व जायस सीएचसी से दो महिला चिकित्सक (डॉ. जरीना खान व डॉ. काजल साहू) को महिलाओं के इलाज के लिए जिला अस्पताल से संबद्ध किया गया था। लेकिन दोनों ही इस समय अवकाश पर हैं। ऐसे में सामान्य महिला रोगों व गर्भवती महिलाओं दोनों का इलाज मुश्किल है। इनका इलाज सामान्य फिजीशियन के ही भरोसे है।
सोमवार को अस्पताल उपचार कराने पहुंची सारीपुर की आरती मिश्र ने बताया कि वह लगातार अस्पताल आ रही हैं। महिला चिकित्सक ने नहीं आने से उन्हें उपचार कराने में परेशानी हो रही है। अस्पताल में मौजूद नसरीन, सुनीता, नीशा, रानी, सुषमा व सिमरन ने बताया कि जिले में महिला उपचार की कोई व्यवस्था न होने से यहां से बिना इलाज लौटना पड़ रहा है। निजी चिकित्सक से उपचार कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रसव भी स्टाफ नर्स के भरोसे
जिले की सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक प्रसव का जिम्मा स्टाफ नर्सों पर है। ऐसे में अगर प्रसव में जटिलता होती है तो जच्चा-बच्चा का क्या होगा इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इसके अलावा सिजेरियन (ऑपरेशन) भी गायनी सर्जन के बजाए जनरल सर्जन ही कराते हैं।
मेडिको लीगल के लिए करते हैं रेेफर
महिला डॉक्टरों की कमी से हो रही परेशानी महज गर्भवती व प्रसूताओं तक सीमित नहीं है। मेडिको लीगल के लिए भी जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक कोई व्यवस्था नहीं है। दुष्कर्म पीड़िताओं को दूसरे जिले रेफर किया जाता है। ऐसे में पीड़िता के साथ पुलिस कर्मियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
13 सीएचसी में महज तीन महिला डॉक्टर
जिला अस्पताल में तीन ईएमओ व एक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत हैं। जिसमें एक भी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। वहीं जिले के 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुल तीन जगह ही महिला डॉक्टरों की तैनाती है। जिसमें अमेठी सीएचसी में डॉ. जरीना खान व जायस सीएचसी में डॉ. काजल साहू की तैनाती है। लेकिन इस समय दोनों ही डॉक्टर छुट्टी पर चल रही हैं। जगदीशपुर सीएचसी में डॉ. ईला सिंह की तैनाती है।
की गई है डिमांड: सीएमएस
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में महिला चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। शासन से डॉक्टरों के तैनाती की डिमांड की गई है। बताया कि इस समय दोनों महिला चिकित्सक मेडिकल अवकाश पर हैं।