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डेंगू से नवजात की मौत
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अमेठी/संग्रामपुर। इलाज के दौरान मंगलवार देर रात डेंगू पॉजिटिव नवजात की मौत हो गई। नवजात की मौत से जहां परिवारीजनों में कोहराम मचा हुआ है, वहीं ठेंगहा गांव में भय का माहौल है। डेंगू व बुखार से जिले में यह सातवीं मौत है। कई दिनों से बुखार से पीड़ित नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंचकर औपचारिकता पूरी करने में जुटी है।
संग्रामपुर के ठेंगहा गांव निवासी श्रीप्रकाश का डेढ़ वर्षीय पुत्र यश सोमवार को बुखार से पीड़ित हो गया। परिवारीजन पहले उसे सीएचसी अमेठी ले गए। चिकित्सक की सलाह पर प्राइवेट पैथालॉजी में जांच कराई तो यश की सस्पेक्टेड डेंगू पॉजिटिव तथा प्लेटलेट्स कम होने की रिपोर्ट आई।
हालत गंभीर होने पर उसे रेफर कर दिया गया। परिवारीजन यश को मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल ले गए। आराम न होने पर उसे जिला अस्पताल सुल्तानपुर ले गए।
सुल्तानपुर में भी आराम न मिलने पर परिवारीजन यश को लेकर प्रतापगढ़ स्थित एक निजी चिकित्सालय गए जहां इलाज के दौरान मंगलवार देर रात उसकी मौत हो गई। नवजात की मौत से जहां परिवार सदमे में है, वहीं गांव में भय का माहौल व्याप्त है।
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सूचना पर प्रभारी अधीक्षक डॉ. सौरभ सिंह की अगुवाई में बुधवार सुबह गांव पहुंची मेडिकल टीम ने परिवार वालों के साथ ही गांव के अन्य बुखार पीड़ितों की जांच के साथ ही दवाई का वितरण शुरू किया। सफाई कर्मियों के सहयोग से गांव में लार्वीसाइड व ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। डॉ. सौरभ ने बताया कि 10 लोगों की डेंगू, मलेरिया व टाइफाइड की जांच की गई है। सभी निगेटिव पाए गए हैं।
जिले में वायरल बुखार व डेंगू से अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। सबसे पहले अमेठी के परसावां गांव में दो दिन के भीतर भाई-बहन की मौत हो गई। उसके बाद भगवानपुर निवासी डेंगू पीड़ित रतीपाल (65) की भी इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई।
इसी सीएचसी क्षेत्र के गांव बेनीपुर निवासी जिलालाल की एक वर्षीय पुत्री रागिनी व शिव कुमार की चार वर्षीय पुत्री खुशी की भी मौत हो चुकी है। भेटुआ ब्लॉक के गांव पूरे दुनिया मजरे मई निवासी 13 वर्षीय सचिन की भी बुखार से 12 सितंबर को मौत हो चुकी है।
तीन दिन से बुखार से पीड़ित नवजात का सीएचसी अमेठी में इलाज कराया गया। अमेठी के ही अधीक्षक के पास संग्रामपुर की जिम्मेदारी है। उसके बाद भी तीन दिनों तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई टीम गांव नहीं गई।
नवजात की मौत होने के बाद स्वास्थ्य टीम के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की नींद संक्रामक बीमारी से मौत होने के बाद ही खुलती है। इसके बाद टीम गांव में औपचारिकता पूरी करने पहुंच जाती है।
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संग्रामपुर के ठेंगहा गांव निवासी श्रीप्रकाश का डेढ़ वर्षीय पुत्र यश सोमवार को बुखार से पीड़ित हो गया। परिवारीजन पहले उसे सीएचसी अमेठी ले गए। चिकित्सक की सलाह पर प्राइवेट पैथालॉजी में जांच कराई तो यश की सस्पेक्टेड डेंगू पॉजिटिव तथा प्लेटलेट्स कम होने की रिपोर्ट आई।
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हालत गंभीर होने पर उसे रेफर कर दिया गया। परिवारीजन यश को मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल ले गए। आराम न होने पर उसे जिला अस्पताल सुल्तानपुर ले गए।
सुल्तानपुर में भी आराम न मिलने पर परिवारीजन यश को लेकर प्रतापगढ़ स्थित एक निजी चिकित्सालय गए जहां इलाज के दौरान मंगलवार देर रात उसकी मौत हो गई। नवजात की मौत से जहां परिवार सदमे में है, वहीं गांव में भय का माहौल व्याप्त है।
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सूचना पर प्रभारी अधीक्षक डॉ. सौरभ सिंह की अगुवाई में बुधवार सुबह गांव पहुंची मेडिकल टीम ने परिवार वालों के साथ ही गांव के अन्य बुखार पीड़ितों की जांच के साथ ही दवाई का वितरण शुरू किया। सफाई कर्मियों के सहयोग से गांव में लार्वीसाइड व ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। डॉ. सौरभ ने बताया कि 10 लोगों की डेंगू, मलेरिया व टाइफाइड की जांच की गई है। सभी निगेटिव पाए गए हैं।
जिले में वायरल बुखार व डेंगू से अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। सबसे पहले अमेठी के परसावां गांव में दो दिन के भीतर भाई-बहन की मौत हो गई। उसके बाद भगवानपुर निवासी डेंगू पीड़ित रतीपाल (65) की भी इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई।
इसी सीएचसी क्षेत्र के गांव बेनीपुर निवासी जिलालाल की एक वर्षीय पुत्री रागिनी व शिव कुमार की चार वर्षीय पुत्री खुशी की भी मौत हो चुकी है। भेटुआ ब्लॉक के गांव पूरे दुनिया मजरे मई निवासी 13 वर्षीय सचिन की भी बुखार से 12 सितंबर को मौत हो चुकी है।
तीन दिन से बुखार से पीड़ित नवजात का सीएचसी अमेठी में इलाज कराया गया। अमेठी के ही अधीक्षक के पास संग्रामपुर की जिम्मेदारी है। उसके बाद भी तीन दिनों तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई टीम गांव नहीं गई।
नवजात की मौत होने के बाद स्वास्थ्य टीम के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की नींद संक्रामक बीमारी से मौत होने के बाद ही खुलती है। इसके बाद टीम गांव में औपचारिकता पूरी करने पहुंच जाती है।