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Amethi News: आरक्षण बदलने से टूट गया सभासद बनने का सपना
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गौरीगंज (अमेठी)। चारों निकायों में वार्ड की सत्ता पर काबिज होने के प्रयास में जुटे लोगों को आरक्षण सूची ने करारा झटका दिया है। जिला मुख्यालय की नगर पालिका परिषद गौरीगंज में छह सभासदों के पुन: चुनाव लड़ पाने का सपना टूट गया है तो 13 को साख बचाने का मौका मिला है। यहां वार्ड संख्या 14 सरैया, 19 रग्घूपुर व 25 रेलवे स्टेशन को छोड़कर सभी सीटों का आरक्षण बदल गया है। मनचाहा आरक्षण न मिलने से निराश मौजूदा सभासद आपत्ति लगाने की तैयारी में हैं।
निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बाद से संभावित प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के प्रयास में जुटे थे। आरक्षण सूची जारी नहीं होने से असमंजस में थे। सभी को आरक्षण सूची का बेसब्री से इंतजार था। हालांकि जारी सूची ने कइयों के अरमानों को तोड़ दिया है। जारी आरक्षण सूची यथावत रही तो 13 सभासद दोबारा चुनाव लड़ सकेंगे।
वहीं छह वार्डों के सभासद ऐसे हैं जो आरक्षण में हुए बदलाव के बाद कहीं के नहीं रहे। ऐसे में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए इन्हें दूसरा वार्ड तलाशना होगा। यह स्थिति अकेले गौरीगंज की नहीं है। अनंतिम वार्ड आरक्षण से जिले की सबसे पुरानी नगर पालिका जायस और नगर पंचायत अमेठी व मुसाफिरखाना के भी मौजूदा व पूर्व सभासदों के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे लोग निराश हैं।
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इन सभासदों का बिगड़ा खेल
नगर पालिका परिषद गौरीगंज का गठन 2015 में हुआ था। 2017 में पहली बार यहां चुनाव हुआ। इस बार का चुनाव दूसरा होगा। आरक्षण की अधिसूचना जारी होने के बाद वार्ड नंबर सात के सभासद रवि, वार्ड संख्या नौ के सभासद बृजेश कुमार, वार्ड संख्या 11 की सभासद ललिता, वार्ड संख्या 13 के सभासद ओम प्रकाश, वार्ड संख्या 16 के सभासद आशीष व वार्ड संख्या 17 के सभासद सुनील कुमार को झटका लगा है।
पिछली बार यह सभी लोग सामान्य सीट पर निर्वाचित हुए थे। जारी आरक्षण सूची में यह सभी सीटें अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। नौ सभासद दोबारा उस वार्ड से लड़ सकेंगे जहां से पहली बार निर्वाचित हुए थे। इनमें वार्ड संख्या एक, दो, चार, छह, 14, 15, 18, 19, 20, 21, 22, 24 व 25 शामिल है।
एक पर कांग्रेस तो दो सीटों पर भाजपा का कब्जा
2007 के चुनाव में 25 वार्डों में 22 पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। वार्ड संख्या आठ खगा पाठक का पुरवा की घोषित अन्य पिछड़ा वर्ग सीट पर कांग्रेस, सामान्य सीट पर वार्ड संख्या 16 व वार्ड संख्या 19 में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी।
परिसीमन ने बिगाड़ा दो सभासदों को झटका
जायस (अमेठी)। 1982 में नगर पालिका परिषद जायस का गठन हुआ था। जिले की सबसे पुरानी नगर पालिका का 2022 में सीमा विस्तार हुआ। सीमा विस्तार के बाद हुए नए परिसीमन में वार्ड संख्या 12 व 24 को जोड़कर वार्ड संख्या 18 बना दिया गया। 2017 के चुनाव में दोनों सीटें अनारक्षित थीं। इस बार वार्ड संख्या 18 अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है।
वार्ड संख्या 12 से लगातार तीन बार से इसरार खान या उनकी पत्नी अंजू सभासद रहीं। इसी तरह वार्ड संख्या 24 में सादिक मेंहदी या उनकी पत्नी परवीन बानो लगातार चार बार से निर्वाचित होते रहे हैं। दोनों दंपती जारी आरक्षण पर आपत्ति लगाने की बात कह रहे हैं। आरोप है कि नगर पालिका बोर्ड की बैठक में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से जानबूझ कर उनके वार्ड के आरक्षण में बदलाव कराया गया। (संवाद)
कुछ प्रत्याशियों की मुराद पूरी तो कुछ के सपने टूटे
अमेठी। नगर पंचायत अमेठी में 12 वार्ड हैं। 2017 के चुनाव में वार्ड संख्या पांच की सीट अनारक्षित थी। हालांकि अनारक्षित सीट पर विजय हासिल की थी लालता ने। उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई थी। इस बार वे पुन: इस वार्ड से चुनाव लड़ सकेंगे। यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। वार्ड संख्या सात में पिछड़ा वर्ग व अनारक्षित सीट पर हरिशंकर जायसवाल या उनकी पत्नी रीना पिछले चार चुनाव से लगातार जीतते रहे हैं। हरिशंकर जायसवाल (जिलाध्यक्ष आम आदमी पार्टी) को एक बार फिर मौका मिला है।
जारी अधिसूचना में यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई है। वार्ड संख्या चार से जीत की हैट्रिक लगा चुके फूलचंद कसौधन के सपने टूट गए हैं। यह वार्ड इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया है। उन्होंने आरक्षण में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए आपत्ति करने की बात कही है। (संवाद)
चौथी बार भी सीट अनारक्षित
अमेठी। नगर पंचायत की वार्ड संख्या 11 पिछले तीन बार से लगातार अनारक्षित थी। इस सीट पर सभासद आशुतोष व उनकी मां निर्वाचित हुई हैं। इस बार भी यह सीट अनारक्षित घोषित की गई है। वैसे इस बार इस सीट पर कई सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की संभावना है। (संवाद)
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निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बाद से संभावित प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के प्रयास में जुटे थे। आरक्षण सूची जारी नहीं होने से असमंजस में थे। सभी को आरक्षण सूची का बेसब्री से इंतजार था। हालांकि जारी सूची ने कइयों के अरमानों को तोड़ दिया है। जारी आरक्षण सूची यथावत रही तो 13 सभासद दोबारा चुनाव लड़ सकेंगे।
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वहीं छह वार्डों के सभासद ऐसे हैं जो आरक्षण में हुए बदलाव के बाद कहीं के नहीं रहे। ऐसे में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए इन्हें दूसरा वार्ड तलाशना होगा। यह स्थिति अकेले गौरीगंज की नहीं है। अनंतिम वार्ड आरक्षण से जिले की सबसे पुरानी नगर पालिका जायस और नगर पंचायत अमेठी व मुसाफिरखाना के भी मौजूदा व पूर्व सभासदों के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे लोग निराश हैं।
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इन सभासदों का बिगड़ा खेल
नगर पालिका परिषद गौरीगंज का गठन 2015 में हुआ था। 2017 में पहली बार यहां चुनाव हुआ। इस बार का चुनाव दूसरा होगा। आरक्षण की अधिसूचना जारी होने के बाद वार्ड नंबर सात के सभासद रवि, वार्ड संख्या नौ के सभासद बृजेश कुमार, वार्ड संख्या 11 की सभासद ललिता, वार्ड संख्या 13 के सभासद ओम प्रकाश, वार्ड संख्या 16 के सभासद आशीष व वार्ड संख्या 17 के सभासद सुनील कुमार को झटका लगा है।
पिछली बार यह सभी लोग सामान्य सीट पर निर्वाचित हुए थे। जारी आरक्षण सूची में यह सभी सीटें अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। नौ सभासद दोबारा उस वार्ड से लड़ सकेंगे जहां से पहली बार निर्वाचित हुए थे। इनमें वार्ड संख्या एक, दो, चार, छह, 14, 15, 18, 19, 20, 21, 22, 24 व 25 शामिल है।
एक पर कांग्रेस तो दो सीटों पर भाजपा का कब्जा
2007 के चुनाव में 25 वार्डों में 22 पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। वार्ड संख्या आठ खगा पाठक का पुरवा की घोषित अन्य पिछड़ा वर्ग सीट पर कांग्रेस, सामान्य सीट पर वार्ड संख्या 16 व वार्ड संख्या 19 में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी।
परिसीमन ने बिगाड़ा दो सभासदों को झटका
जायस (अमेठी)। 1982 में नगर पालिका परिषद जायस का गठन हुआ था। जिले की सबसे पुरानी नगर पालिका का 2022 में सीमा विस्तार हुआ। सीमा विस्तार के बाद हुए नए परिसीमन में वार्ड संख्या 12 व 24 को जोड़कर वार्ड संख्या 18 बना दिया गया। 2017 के चुनाव में दोनों सीटें अनारक्षित थीं। इस बार वार्ड संख्या 18 अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है।
वार्ड संख्या 12 से लगातार तीन बार से इसरार खान या उनकी पत्नी अंजू सभासद रहीं। इसी तरह वार्ड संख्या 24 में सादिक मेंहदी या उनकी पत्नी परवीन बानो लगातार चार बार से निर्वाचित होते रहे हैं। दोनों दंपती जारी आरक्षण पर आपत्ति लगाने की बात कह रहे हैं। आरोप है कि नगर पालिका बोर्ड की बैठक में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से जानबूझ कर उनके वार्ड के आरक्षण में बदलाव कराया गया। (संवाद)
कुछ प्रत्याशियों की मुराद पूरी तो कुछ के सपने टूटे
अमेठी। नगर पंचायत अमेठी में 12 वार्ड हैं। 2017 के चुनाव में वार्ड संख्या पांच की सीट अनारक्षित थी। हालांकि अनारक्षित सीट पर विजय हासिल की थी लालता ने। उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई थी। इस बार वे पुन: इस वार्ड से चुनाव लड़ सकेंगे। यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। वार्ड संख्या सात में पिछड़ा वर्ग व अनारक्षित सीट पर हरिशंकर जायसवाल या उनकी पत्नी रीना पिछले चार चुनाव से लगातार जीतते रहे हैं। हरिशंकर जायसवाल (जिलाध्यक्ष आम आदमी पार्टी) को एक बार फिर मौका मिला है।
जारी अधिसूचना में यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई है। वार्ड संख्या चार से जीत की हैट्रिक लगा चुके फूलचंद कसौधन के सपने टूट गए हैं। यह वार्ड इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया है। उन्होंने आरक्षण में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए आपत्ति करने की बात कही है। (संवाद)
चौथी बार भी सीट अनारक्षित
अमेठी। नगर पंचायत की वार्ड संख्या 11 पिछले तीन बार से लगातार अनारक्षित थी। इस सीट पर सभासद आशुतोष व उनकी मां निर्वाचित हुई हैं। इस बार भी यह सीट अनारक्षित घोषित की गई है। वैसे इस बार इस सीट पर कई सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की संभावना है। (संवाद)