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बजट अधूरा तो पूरी सड़कें कैसे हों गड्ढामुक्त
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गौरीगंज : जर्जर पड़ा कसारा-विशेषरगंज संपर्क मार्ग।
- फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। शासन की ओर से एक नवंबर से शुरू किया गया अभियान समाप्त होने को है, बावजूद इसके जिले की अधिकांश सड़कें चलने लायक नहीं बन सकीं। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए जो बजट शासन की ओर से आवंटित किया गया वह मांग का महज 58 फीसदी था। ऐसे में सड़कें गड्ढा मुक्त कैसे होंगी इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रदेश सरकार ने अक्तूबर माह में एक आदेश जारी कर कहा था कि पूरे प्रदेश की सड़कों को एक से नवंबर के बीच गड्ढा मुक्त कर दिया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों से गड्ढा युक्त सड़कों की संख्या व उनकी लंबाई के साथ अनुमानित डीपीआर भेजने को कहा गया था।
शासन की मांग पर जिले से भी प्रांतीय व निर्माण खंड की 822.95 किलोमीटर लंबी गड्ढा युक्त सड़कों को दुरुस्त करने के लिए छह करोड़ 40 लाख 79 हजार रुपये का बजट मांगा गया था। मांग की तुलना में जिले के पीडब्ल्यूडी विभाग को महज तीन करोड़ 77 लाख दो 20 हजार रुपये ही मिले। आवंटित राशि मांग की महज 58.90 प्रतिशत रही।
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प्रांतीय खंड व निर्माण खंड के अलग-अलग बजट पर गौर करें तो प्रांतीय खंड की 11 किलोमीटर लंबे राज्य मार्ग के लिए 11 लाख रुपये, 54.65 किलोमीटर लंबे प्रमुख जिला मार्ग के लिए 49.19 लाख रुपये, 102.53 किलोमीटर लंबे अन्य जिला मार्ग के लिए 87.15 लाख रुपये व 266.35 किलोमीटर लंबे ग्रामीण मार्ग (कुल लंबाई 434.53 किलोमीटर) के लिए (तीन करोड़ 47 लाख 10 हजार रुपये) मांगे गए थे, जबकि मिले सिर्फ दो करोड़ आठ लाख सात हजार रुपये मात्र।
इसी तरह निर्माण खंड के 19 किलोमीटर लंबे प्रमुख जिला मार्ग के लिए 17.10 लाख रुपये, 25.20 किलोमीटर लंबे अन्य जिला मार्ग के लिए 21.42 लाख रुपये व 344.22 किलोमीटर लंबे ग्रामीण मार्ग (कुल लंबाई 388.22 किलोमीटर) को दुरुस्त करने के लिए (दो करोड़ 93 लाख 69 हजार रुपये) मांगे गए जबकि मिले सिर्फ एक करोड़ अड़सठ लाख पांच हजार रुपये। ऐसे में जब सड़क की संख्या व लंबाई के सापेक्ष बजट लगभग आधा मिला तो सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान भी अधूरा ही रह गया।
अधिकांश सड़कें हुईं गड्ढामुक्त
एक्सईएन पीडब्ल्यूडी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि अधिकांश गड्ढा युक्त सड़कें गड्ढा मुक्त हो गई हैं। अभियान के बाद वही सड़कें बच रही हैं जो या तो नवीनीकरण योजना में शामिल या इसके करीब हैं। या फिर वे सड़कें जो इस कदर जर्जर हैं कि वे गड्ढा मुक्त की ही नहीं जा सकतीं।
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प्रदेश सरकार ने अक्तूबर माह में एक आदेश जारी कर कहा था कि पूरे प्रदेश की सड़कों को एक से नवंबर के बीच गड्ढा मुक्त कर दिया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों से गड्ढा युक्त सड़कों की संख्या व उनकी लंबाई के साथ अनुमानित डीपीआर भेजने को कहा गया था।
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शासन की मांग पर जिले से भी प्रांतीय व निर्माण खंड की 822.95 किलोमीटर लंबी गड्ढा युक्त सड़कों को दुरुस्त करने के लिए छह करोड़ 40 लाख 79 हजार रुपये का बजट मांगा गया था। मांग की तुलना में जिले के पीडब्ल्यूडी विभाग को महज तीन करोड़ 77 लाख दो 20 हजार रुपये ही मिले। आवंटित राशि मांग की महज 58.90 प्रतिशत रही।
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प्रांतीय खंड व निर्माण खंड के अलग-अलग बजट पर गौर करें तो प्रांतीय खंड की 11 किलोमीटर लंबे राज्य मार्ग के लिए 11 लाख रुपये, 54.65 किलोमीटर लंबे प्रमुख जिला मार्ग के लिए 49.19 लाख रुपये, 102.53 किलोमीटर लंबे अन्य जिला मार्ग के लिए 87.15 लाख रुपये व 266.35 किलोमीटर लंबे ग्रामीण मार्ग (कुल लंबाई 434.53 किलोमीटर) के लिए (तीन करोड़ 47 लाख 10 हजार रुपये) मांगे गए थे, जबकि मिले सिर्फ दो करोड़ आठ लाख सात हजार रुपये मात्र।
इसी तरह निर्माण खंड के 19 किलोमीटर लंबे प्रमुख जिला मार्ग के लिए 17.10 लाख रुपये, 25.20 किलोमीटर लंबे अन्य जिला मार्ग के लिए 21.42 लाख रुपये व 344.22 किलोमीटर लंबे ग्रामीण मार्ग (कुल लंबाई 388.22 किलोमीटर) को दुरुस्त करने के लिए (दो करोड़ 93 लाख 69 हजार रुपये) मांगे गए जबकि मिले सिर्फ एक करोड़ अड़सठ लाख पांच हजार रुपये। ऐसे में जब सड़क की संख्या व लंबाई के सापेक्ष बजट लगभग आधा मिला तो सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान भी अधूरा ही रह गया।
अधिकांश सड़कें हुईं गड्ढामुक्त
एक्सईएन पीडब्ल्यूडी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि अधिकांश गड्ढा युक्त सड़कें गड्ढा मुक्त हो गई हैं। अभियान के बाद वही सड़कें बच रही हैं जो या तो नवीनीकरण योजना में शामिल या इसके करीब हैं। या फिर वे सड़कें जो इस कदर जर्जर हैं कि वे गड्ढा मुक्त की ही नहीं जा सकतीं।