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Amethi News: आंखों के साथ याददाश्त भी कमजोर कर रहा मोबाइल
Fri, 18 Oct 2024 12:59 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 18 Oct 2024 12:59 AM IST
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अमेठी सिटी। मोबाइल फोन की लत आंखों को कमजोर बना रही है। जिला अस्पताल की नेत्र रोग ओपीडी में रोजाना 30 से 35 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों से लेकर, किशोर और युवा सभी शामिल हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ पीड़ितों को मोबाइल का ज्यादा उपयोग न करने की सलाह दे रहे हैं।
मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से आंखों में जलन, कीचड़ व सूजन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। मोबाइल और लैपटॉप की रोशनी रेटिना पर भी असर डाल रही है। इससे मायोपिया और हाइपर मेट्रोपिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीमारी में बच्चों की आंखों से लेकर पुतलियों का आकार सामान्य से घट या बढ़ रहा है।
अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे लोग
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लईक-उल-जमा ने बताया कि मोबाइल का अधिक उपयोग करने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद में कमी, भूख न लगना, एकाग्रता में कमी, शारीरिक सक्रियता में कमी, मोटापा, याददाश्त कमजोर होना, पढ़ाई में दिलचस्पी न लेने जैसी समस्याएं भी हो रही हैं। आने वाले समय में इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
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बचाव के उपाय
बच्चों को मोबाइल फोन कम से कम दें।
कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल में देख रहे हों तो उचित दूरी बना कर रखें।
दिन में तीन से चार बार आंखों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धुलें।
धूप या किसी धूल-मिट्टी वाली जगह पर जाएं तो चश्मा पहनें।
खाने में दूध, मक्खन, गाजर, अंडे, देसी घी और हरी सब्जियां खाएं।
समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहें।
ये सतर्कता बरतें
जिला अस्पताल के नेत्र परीक्षण अधिकारी सज्जन कुमार ने बताया कि मोबाइल फोन का उपयोग करते समय ध्यान रखें कि यह आंखों के एकदम पास न हो। रात में ज्यादा देर तक फोन न चलाएं। मोबाइल का उपयोग करते समय 20 मिनट के बाद कम से कम 20 सेकेंड का ब्रेक जरूर लें। इससे आंखों को राहत मिलेगी। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं।
बिना परामर्श न डालें आई ड्राॅप
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमुद सिंह ने बताया कि लंबे समय तक मोबाइल का उपयोग करने से आंखों का पानी सूखने लगता है। ऐसे में लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन न देखें। किसी भी समस्या के होने पर बिना नेत्र रोग विशेषज्ञ के परामर्श के आई ड्रॉप का उपयोग न करें।
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मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से आंखों में जलन, कीचड़ व सूजन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। मोबाइल और लैपटॉप की रोशनी रेटिना पर भी असर डाल रही है। इससे मायोपिया और हाइपर मेट्रोपिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीमारी में बच्चों की आंखों से लेकर पुतलियों का आकार सामान्य से घट या बढ़ रहा है।
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अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे लोग
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लईक-उल-जमा ने बताया कि मोबाइल का अधिक उपयोग करने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद में कमी, भूख न लगना, एकाग्रता में कमी, शारीरिक सक्रियता में कमी, मोटापा, याददाश्त कमजोर होना, पढ़ाई में दिलचस्पी न लेने जैसी समस्याएं भी हो रही हैं। आने वाले समय में इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
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बचाव के उपाय
बच्चों को मोबाइल फोन कम से कम दें।
कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल में देख रहे हों तो उचित दूरी बना कर रखें।
दिन में तीन से चार बार आंखों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धुलें।
धूप या किसी धूल-मिट्टी वाली जगह पर जाएं तो चश्मा पहनें।
खाने में दूध, मक्खन, गाजर, अंडे, देसी घी और हरी सब्जियां खाएं।
समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहें।
ये सतर्कता बरतें
जिला अस्पताल के नेत्र परीक्षण अधिकारी सज्जन कुमार ने बताया कि मोबाइल फोन का उपयोग करते समय ध्यान रखें कि यह आंखों के एकदम पास न हो। रात में ज्यादा देर तक फोन न चलाएं। मोबाइल का उपयोग करते समय 20 मिनट के बाद कम से कम 20 सेकेंड का ब्रेक जरूर लें। इससे आंखों को राहत मिलेगी। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं।
बिना परामर्श न डालें आई ड्राॅप
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमुद सिंह ने बताया कि लंबे समय तक मोबाइल का उपयोग करने से आंखों का पानी सूखने लगता है। ऐसे में लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन न देखें। किसी भी समस्या के होने पर बिना नेत्र रोग विशेषज्ञ के परामर्श के आई ड्रॉप का उपयोग न करें।