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वर्कशॉप में खड़ी बस का मेरठ आरटीओ ने भेजा 7800 का चालान
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अमेठी। जनपद मेरठ के यातायात प्रवर्तन केंद्र प्रभारी की ओर से वर्कशॉप में खड़ी स्थानीय डिपो की बस के नाम 7800 रुपये का चालान भेजा गया है। चालान आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग की ओर से उच्चाधिकारियों के साथ ही मेरठ के संबंधित अधिकारियों को उक्त संबंध में पत्र भेजा गया है।
क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्र नाथ ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर बताया है कि अमेठी डिपो की बस संख्या यूपी-15 एटी 1138 लॉकडाउन में संचालन अवरुद्ध होने के कारण एक मई से 26 मई तक अमेठी डिपो कार्यशाला में खड़ी थी।
इसके साथ ही उक्त वाहन का संचालन मेरठ क्षेत्र के किसी भी मार्ग पर नहीं होता है। बताया है कि एक डीसीएम चालक द्वारा अमेठी डिपो की उक्त बस संख्या की नंबर प्लेट अपने डीसीएम वाहन पर लगाकर मेरठ पुलिस प्रशासन, आरटीओ, निगम को धोखे में रखकर संचालन कर रहा था।
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जिसका ट्रैफिक पुलिस मेरठ द्वारा 14 मई को 12 बजे 7,800 रुपये का ऑनलाइन चालान काट दिया गया। चालान काटने का प्रकरण उस समय संज्ञान में आया जब चार जून को अमेठी डिपो की उक्त बस की फिटनेस फीस ऑनलाइन जमा कराई जा रही थी।
बस का चालान होने के कारण फिटनेस फीस नहीं जमा हो सकी। जबकि यातायात पुलिस द्वारा देखा गया कि संबंधित वाहन डीसीएम है। बावजूद इसके उक्त वाहन की आरसी बुक, बीमा कवर नोट देखे बगैर चालक एवं वाहन की फोटो समेत ऑनलाइन चालान काट दिया गया। चालान काटने के बाद भी संलग्न फोटो में डिपो की बस नहीं होने के बाद भी यूपीएसआरटीसी के नाम जानबूझ कर चालान की राशि जमा करने के लिए भेज भी दिया गया।
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क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्र नाथ ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर बताया है कि अमेठी डिपो की बस संख्या यूपी-15 एटी 1138 लॉकडाउन में संचालन अवरुद्ध होने के कारण एक मई से 26 मई तक अमेठी डिपो कार्यशाला में खड़ी थी।
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इसके साथ ही उक्त वाहन का संचालन मेरठ क्षेत्र के किसी भी मार्ग पर नहीं होता है। बताया है कि एक डीसीएम चालक द्वारा अमेठी डिपो की उक्त बस संख्या की नंबर प्लेट अपने डीसीएम वाहन पर लगाकर मेरठ पुलिस प्रशासन, आरटीओ, निगम को धोखे में रखकर संचालन कर रहा था।
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जिसका ट्रैफिक पुलिस मेरठ द्वारा 14 मई को 12 बजे 7,800 रुपये का ऑनलाइन चालान काट दिया गया। चालान काटने का प्रकरण उस समय संज्ञान में आया जब चार जून को अमेठी डिपो की उक्त बस की फिटनेस फीस ऑनलाइन जमा कराई जा रही थी।
बस का चालान होने के कारण फिटनेस फीस नहीं जमा हो सकी। जबकि यातायात पुलिस द्वारा देखा गया कि संबंधित वाहन डीसीएम है। बावजूद इसके उक्त वाहन की आरसी बुक, बीमा कवर नोट देखे बगैर चालक एवं वाहन की फोटो समेत ऑनलाइन चालान काट दिया गया। चालान काटने के बाद भी संलग्न फोटो में डिपो की बस नहीं होने के बाद भी यूपीएसआरटीसी के नाम जानबूझ कर चालान की राशि जमा करने के लिए भेज भी दिया गया।