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Amethi News: बीसी सखी बनकर बनाई अपनी पहचान
Sat, 22 Feb 2025 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 22 Feb 2025 11:46 PM IST
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अमेठी सिटी। आजाद महिला स्वयं सहायता समूह के अध्यक्ष ने मेहनत की बदौलत क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस समय बीसी सखी और कोटे का संचालन कर अपनी आमदनी को जहां बढ़ाया है, वहीं दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनीं हुई हैं।
देश के आर्थिक विकास में महिलाओं की हिस्सेदारी बराकर है। अमेठी की ग्राम पंचायत लोहरता निवासी मानी यादव ने आजाद महिला स्वयं सहायता समूह का वर्ष 2008 में गठन हुआ। समूह में अध्यक्ष मानी यादव, सदस्य के रूप में अमरावती, आशा, पुष्पा, चंद्रावती, माधुरी, मीना, शकुंतला, धर्मावती, कमला व राजकुमारी शामिल हैं। वर्ष 2014 में एनआरएलएम के माध्यम से समूह मेें महिलाएं जुड़ीं।
वर्ष 2021 में मानी बीसी सखी बनीं। मानी ने बताया कि गांव वालों को बैंकिंग संबंधी कार्यों के लिए चार किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इस वजह से बहुत सारी ग्रामीण महिलाएं बैंकिंग सुविधाओं से कोसों दूर थीं। इसके लिए उन्होंने प्रशिक्षण लेकर अपना कार्य शुरू किया। इन प्रयासों से ग्रामीणों को अपने ही गांव में बैंक मिल गया।
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ग्राम पंचायत पर शिविर लगाकर लोगों को बैंक व सरकार की योजनाओं के बारे में भी जानकारी देती हैं। इस समय समूह के माध्यम से बतौर संचालक कोटे की दुकान का संचालन कर रही हैं। मानी ने बताया कि वह अब तक करीब दो हजार ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ चुकी हैं।
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देश के आर्थिक विकास में महिलाओं की हिस्सेदारी बराकर है। अमेठी की ग्राम पंचायत लोहरता निवासी मानी यादव ने आजाद महिला स्वयं सहायता समूह का वर्ष 2008 में गठन हुआ। समूह में अध्यक्ष मानी यादव, सदस्य के रूप में अमरावती, आशा, पुष्पा, चंद्रावती, माधुरी, मीना, शकुंतला, धर्मावती, कमला व राजकुमारी शामिल हैं। वर्ष 2014 में एनआरएलएम के माध्यम से समूह मेें महिलाएं जुड़ीं।
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वर्ष 2021 में मानी बीसी सखी बनीं। मानी ने बताया कि गांव वालों को बैंकिंग संबंधी कार्यों के लिए चार किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इस वजह से बहुत सारी ग्रामीण महिलाएं बैंकिंग सुविधाओं से कोसों दूर थीं। इसके लिए उन्होंने प्रशिक्षण लेकर अपना कार्य शुरू किया। इन प्रयासों से ग्रामीणों को अपने ही गांव में बैंक मिल गया।
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ग्राम पंचायत पर शिविर लगाकर लोगों को बैंक व सरकार की योजनाओं के बारे में भी जानकारी देती हैं। इस समय समूह के माध्यम से बतौर संचालक कोटे की दुकान का संचालन कर रही हैं। मानी ने बताया कि वह अब तक करीब दो हजार ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ चुकी हैं।