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Amethi News: कहीं ऐसा न हो मौत आ जाए जवानी में...
Mon, 30 Jun 2025 12:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 30 Jun 2025 12:27 AM IST
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गौरीगंज पुस्तकालय में काव्य पाठ करते कवि डॉ. केशरी शुक्ल। संवाद
अमेठी। अवधी साहित्य संस्थान की ओर से रविवार को स्थानीय डाक बंगले में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जिलेभर के कवियों ने अवधी भाषा में रचना पाठ कर श्रोताओं को रीति-रिवाज, सामाजिक विडंबना, प्रेम, पीड़ा और विरह से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि कुंज बिहारी मौर्य काका श्री ने पढ़ा कि रीति-रिवाज, आदर, सत्कार सब भरा बा, कइसे कह्या हे बाबू गउंवा मा काव धरा बा। वहीं संस्थान अध्यक्ष डॉ अर्जुन पांडेय ने माया नगरी मा फंसा दुखिया सबै संसार... जैसी मार्मिक रचना से श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। कवि रामेश्वर सिंह निराश ने कहा कि ऐसी घटे घटना, जे देश कै शीश झुकावत बा...। अमरनाथ गुप्ता बेजोड़ की रचना कहीं ऐसा न हो मौत आ जाए जवानी में... पर खूब तालियां बजीं।
कवयित्री रामकुमारी संस्सृति ने सावन पर भावपूर्ण गीत सुनाया बारिश की रितु आइ गइल मोरी गोइयां हो…। रामबदन शुक्ल पथिक ने विरह गीत में कहा कि तुम बोलो न कोयल बाग, मेरे पपिहा तुहू नाही...। कवि शब्बीर अहमद सूरी की पंक्ति समंदर, समंदर, समंदर है दुनिया… ने जीवन के गूढ़ रहस्य को उजागर किया। इस अवसर पर ज्ञानेन्द्र पांडेय अवधी मधुरस, जगदंबा तिवारी मधुर, फतेह बहादुर सिंह, अमर बहादुर सिंह अमर, कवि समीर मिश्रा, कैलाश नाथ शर्मा, डॉ अभिमन्यु कुमार पांडेय सहित कई साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम के समापन पर अध्यक्ष कुंज बिहारी मौर्य ने अवधी भाषा के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि अवधी बोलि नाही बिसारो, इहै मोरे गाम कै शान बा। माैके पर बड़ी संख्या में लोग माैजूद रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि कुंज बिहारी मौर्य काका श्री ने पढ़ा कि रीति-रिवाज, आदर, सत्कार सब भरा बा, कइसे कह्या हे बाबू गउंवा मा काव धरा बा। वहीं संस्थान अध्यक्ष डॉ अर्जुन पांडेय ने माया नगरी मा फंसा दुखिया सबै संसार... जैसी मार्मिक रचना से श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। कवि रामेश्वर सिंह निराश ने कहा कि ऐसी घटे घटना, जे देश कै शीश झुकावत बा...। अमरनाथ गुप्ता बेजोड़ की रचना कहीं ऐसा न हो मौत आ जाए जवानी में... पर खूब तालियां बजीं।
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कवयित्री रामकुमारी संस्सृति ने सावन पर भावपूर्ण गीत सुनाया बारिश की रितु आइ गइल मोरी गोइयां हो…। रामबदन शुक्ल पथिक ने विरह गीत में कहा कि तुम बोलो न कोयल बाग, मेरे पपिहा तुहू नाही...। कवि शब्बीर अहमद सूरी की पंक्ति समंदर, समंदर, समंदर है दुनिया… ने जीवन के गूढ़ रहस्य को उजागर किया। इस अवसर पर ज्ञानेन्द्र पांडेय अवधी मधुरस, जगदंबा तिवारी मधुर, फतेह बहादुर सिंह, अमर बहादुर सिंह अमर, कवि समीर मिश्रा, कैलाश नाथ शर्मा, डॉ अभिमन्यु कुमार पांडेय सहित कई साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम के समापन पर अध्यक्ष कुंज बिहारी मौर्य ने अवधी भाषा के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि अवधी बोलि नाही बिसारो, इहै मोरे गाम कै शान बा। माैके पर बड़ी संख्या में लोग माैजूद रहे।

गौरीगंज पुस्तकालय में काव्य पाठ करते कवि डॉ. केशरी शुक्ल। संवाद