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2730 को ही मिली प्रसाधन निर्माण की पहली किस्त
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गौरीगंज (अमेठी)। वर्तमान वित्तीय वर्ष में शासन की ओर से जिले में व्यक्तिगत प्रसाधन निर्माण के लिए 12861 का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। डीपीआरओ कार्यालय की ओर से अब तक महज 2730 लाभार्थियों को निर्माण के लिए पहली किस्त की राशि भेजी जा सकी है।
शासन ने खुले में शौच पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में जिले को 12861 व्यक्तिगत प्रसाधन भवन निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया था। शासन से लक्ष्य निर्धारित होने के बाद निदेशालय की ओर से लाभार्थियों का चयन कर प्रसाधन भवनों का निर्माण कराने को कहा गया था। डीपीआरओ कार्यालय लक्ष्य से कोसों दूर है।
11 जून को 825 लाभार्थियों के प्रसाधन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत के ग्राम निधि-6 खाते में छह-छह हजार रुपये पहली किस्त के रूप में भेजा गया था। इसके दो माह बाद 16 अगस्त को 757 लाभार्थियों तो सात सितंबर को 1148 लाभार्थियों के खाते में पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट) सिस्टम के तहत पहली किस्त के रुप में छह-छह हजार रुपये भेजे गए हैं।
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पहली किस्त भेजने के बाद संबंधित ब्लॉक के एडीओ पंचायतों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेते हुए निर्माण कार्य शुरू कराकर उसकी जियोटैगिंग कराने का निर्देश दिया है। वित्तीय वर्ष के पांच माह बीतने के बावजूद अब तक 10 हजार 131 लाभार्थियों को पहली किस्त तक नहीं दी जा सकी है।
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक आरपी सिंह ने बताया कि सभी ब्लॉकों को लाभार्थी चयन कर उनकी फीडिंग कराने को कहा गया है। कहा कि जैसे-जैसे लाभार्थियों की फीडिंग हो रही है। उनकी पात्रता की जांच कराकर पात्र लाभार्थियों के खाते में राशि भेजी जा रही है।
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शासन ने खुले में शौच पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में जिले को 12861 व्यक्तिगत प्रसाधन भवन निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया था। शासन से लक्ष्य निर्धारित होने के बाद निदेशालय की ओर से लाभार्थियों का चयन कर प्रसाधन भवनों का निर्माण कराने को कहा गया था। डीपीआरओ कार्यालय लक्ष्य से कोसों दूर है।
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11 जून को 825 लाभार्थियों के प्रसाधन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत के ग्राम निधि-6 खाते में छह-छह हजार रुपये पहली किस्त के रूप में भेजा गया था। इसके दो माह बाद 16 अगस्त को 757 लाभार्थियों तो सात सितंबर को 1148 लाभार्थियों के खाते में पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट) सिस्टम के तहत पहली किस्त के रुप में छह-छह हजार रुपये भेजे गए हैं।
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पहली किस्त भेजने के बाद संबंधित ब्लॉक के एडीओ पंचायतों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेते हुए निर्माण कार्य शुरू कराकर उसकी जियोटैगिंग कराने का निर्देश दिया है। वित्तीय वर्ष के पांच माह बीतने के बावजूद अब तक 10 हजार 131 लाभार्थियों को पहली किस्त तक नहीं दी जा सकी है।
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक आरपी सिंह ने बताया कि सभी ब्लॉकों को लाभार्थी चयन कर उनकी फीडिंग कराने को कहा गया है। कहा कि जैसे-जैसे लाभार्थियों की फीडिंग हो रही है। उनकी पात्रता की जांच कराकर पात्र लाभार्थियों के खाते में राशि भेजी जा रही है।