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गोमती में बड़ी संख्या में मरी मिलीं मछलियां
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बाजार शुकुल (अमेठी)। स्थानीय विकास क्षेत्र के कई गांवों के समीप से बह रही गोमती नदी में मछलियों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया है। ज्यादा संख्या में मछलियों के मरने से संक्रामक बीमारियों की आशंका प्रबल हो गई है। लोग मछलियों के मरने की वजह नदी में आने वाले गंदे व जहरीले पानी को मान रहे हैं।
सरकार नदियों की सफाई के नाम पर भले ही प्रति वर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हो लेकिन शहरों के बैराजों से निकले गंदे व जहरीले पानी के नदियों में छोड़ने का सिलसिला नहीं बंद हो रहा है। इस वजह से प्रति वर्ष विभिन्न नदियों में बड़ी संख्या में मछलियां तड़प-तड़प कर मर जाती हैं।
यदि शहर के बैराजों का गंदा पानी नदियों में छोड़ने से पहले उसे शुद्ध कर दिया जाए तो मछलियों की जान बचाई जा सकती है। स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र के करीब 20 किलोमीटर से अधिक दायरे में गोमती बहती है। उरेरमऊ, खेममऊ, मीरमऊ, किशनी तथा पाली गांव के समीप गोमती नदी के किनारे बुधवार सुबह बड़ी संख्या में मछलियां मरी पड़ी मिलीं।
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बड़ी संख्या में मछलियों को मृत पड़ा देख ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि कोरोना महामारी से अभी निजात नहीं मिली कि अब मछलियों के मरे पड़े होने से अन्य संक्रामक बीमारी फैलने का अंदेशा बढ़ गया है।
वन दरोगा रामदुलार मिश्र के अनुसार लखनऊ से हर वर्ष बैराजों में इकट्ठा गंदा पानी गोमती नदी में छोड़ा जाता है। इस पानी में विभिन्न प्रकार के केमिकल भी होते हैं जिससे पानी जहरीला हो जाता है। इसी कारण प्रतिवर्ष मछलियां नदियों में मर जाती हैं। उनका कहना है कि पानी में जहां तक केमिकल का असर रहता है, वहां तक मछलियां मर जाती हैं।
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सरकार नदियों की सफाई के नाम पर भले ही प्रति वर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हो लेकिन शहरों के बैराजों से निकले गंदे व जहरीले पानी के नदियों में छोड़ने का सिलसिला नहीं बंद हो रहा है। इस वजह से प्रति वर्ष विभिन्न नदियों में बड़ी संख्या में मछलियां तड़प-तड़प कर मर जाती हैं।
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यदि शहर के बैराजों का गंदा पानी नदियों में छोड़ने से पहले उसे शुद्ध कर दिया जाए तो मछलियों की जान बचाई जा सकती है। स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र के करीब 20 किलोमीटर से अधिक दायरे में गोमती बहती है। उरेरमऊ, खेममऊ, मीरमऊ, किशनी तथा पाली गांव के समीप गोमती नदी के किनारे बुधवार सुबह बड़ी संख्या में मछलियां मरी पड़ी मिलीं।
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बड़ी संख्या में मछलियों को मृत पड़ा देख ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि कोरोना महामारी से अभी निजात नहीं मिली कि अब मछलियों के मरे पड़े होने से अन्य संक्रामक बीमारी फैलने का अंदेशा बढ़ गया है।
वन दरोगा रामदुलार मिश्र के अनुसार लखनऊ से हर वर्ष बैराजों में इकट्ठा गंदा पानी गोमती नदी में छोड़ा जाता है। इस पानी में विभिन्न प्रकार के केमिकल भी होते हैं जिससे पानी जहरीला हो जाता है। इसी कारण प्रतिवर्ष मछलियां नदियों में मर जाती हैं। उनका कहना है कि पानी में जहां तक केमिकल का असर रहता है, वहां तक मछलियां मर जाती हैं।