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Amethi News: शामे गरीबां में छलका गम याद आई कर्बला की कुर्बानी
Sun, 28 Jun 2026 12:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 28 Jun 2026 12:24 AM IST
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जगदीशपुर। मलांवा गांव में आयोजित बारह रोजा शहीदे आजम कॉन्फ्रेंस के तहत दसवीं मुहर्रम पर मजलिस और तकरीर हुई। इस दौरान शामे गरीबां के गमगीन मंजर का जिक्र करते हुए मौलाना इस्तिखार अशरफी ने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत इंसानियत, सत्य और इंसाफ की सबसे बड़ी मिसाल है।
उन्होंने कहा कि शामे गरीबां वह रात थी, जब शहादत के बाद खेमों में सन्नाटा पसरा था। मासूम बच्चे प्यास से व्याकुल थे और बीबी जैनब ने सब्र व हिम्मत की अद्भुत मिसाल पेश की। इमाम हुसैन ने अन्याय के सामने झुकने के बजाय कुर्बानी का रास्ता चुना, जो आज भी मानवता को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मौलाना ने लोगों से इमाम हुसैन के आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में भाईचारा, अमन तथा इंसानियत कायम रखने का आह्वान किया। तकरीर के दौरान या हुसैन की सदाओं से माहौल गमगीन हो गया और अकीदतमंदों की आंखें नम हो उठीं। कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि शामे गरीबां वह रात थी, जब शहादत के बाद खेमों में सन्नाटा पसरा था। मासूम बच्चे प्यास से व्याकुल थे और बीबी जैनब ने सब्र व हिम्मत की अद्भुत मिसाल पेश की। इमाम हुसैन ने अन्याय के सामने झुकने के बजाय कुर्बानी का रास्ता चुना, जो आज भी मानवता को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मौलाना ने लोगों से इमाम हुसैन के आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में भाईचारा, अमन तथा इंसानियत कायम रखने का आह्वान किया। तकरीर के दौरान या हुसैन की सदाओं से माहौल गमगीन हो गया और अकीदतमंदों की आंखें नम हो उठीं। कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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