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बाहर से लिखी दवा, घायल मजदूर ने पैसे मांग कर खरीदी
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गौरीगंज (अमेठी)। जिला अस्पताल में इलाज कराने गए घायल मजदूर को डॉक्टर ने अलग से पर्ची थमा कर बाहर से दवा लिख दी। सरकारी अस्पताल से मुफ्त इलाज मिलने की आस में पहुंचे मजदूर के पास इतने पैसे नहीं थे। कुछ लोगों से मदद मांगी तो उन्होंने उसे दवाएं और पर्चे पर लिखी अन्य सामग्री खरीद कर दी।
मजदूरी कर जीवन-यापन करने वाले अमेठी के गंगागंज मोहल्ले का रहने वाले अफसर अली का पैर पिछले दिनों फ्रैक्चर हो गया था। पैर फ्रैक्चर होने के बाद वह अमेठी शहर स्थित सीएचसी गया जहां उसके पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया।
प्लास्टर चढ़ने के बाद भी जब उसे दर्द में आराम नहीं मिला तो वह अपने रिश्ते के मामा के साथ बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल आया। जिला अस्पताल में एक रुपये का पर्चा बनवाकर वह अस्थि रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचा। डॉक्टर ने अफसर अली की जांच करने के बाद कहा कि उसका प्लास्टर गलत बंध गया है। इसे काटकर दोबारा प्लास्टर करना पड़ेगा।
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इसके बाद चिकित्सक ने उसे सरकारी पर्चे के इतर एक छोटी पर्ची पर दवाएं व प्लास्टर से जुड़ी अन्य सामग्री लिखकर लाने को कहा। जब अफसर पर्चा लेकर दवा वितरण काउंटर पर पहुंचा तो उसे बताया गया कि यह दवाएं बाहर से मिलेंगी। बाहर मेडिकल स्टोर पर जाने पर उसे बताया कि यह दवाएं व सामग्री 1,400 रुपये की हैैं। मजदूर के पास पैसे नहीं थे। जिसके बाद उसने अपने इलाज के लिए सहायता मांगी। मदद मांगने पर किसी ने उसे दवा व सामग्री खरीद कर दी। मजदूर का आरोप था कि उसे दो-दो रुपये की पट्टी तक बाहर मेडिकल से खरीदनी पड़ी।
आरोप निराधार
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. हनुमान प्रसाद ने कहा कि अफसर नाम का मरीज ओपीडी में आया था। उसे देखकर अस्पताल की दवाएं लिखी गईं। यह कहा गया कि उसका दोबारा प्लास्टर बांधना पड़ेगा। अस्पताल में सामग्री व दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। बाहर से दवा लिखने का सवाल ही नहीं उठता।
होगी जांच : सीएमएस
संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि मरीज के आरोपों से जुड़ा वीडियो उन्हें मिला है। वीडियो की जांच कराई जाएगी कि मरीज के आरोप में कितनी सच्चाई है। जांच में यदि मामला सही मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
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मजदूरी कर जीवन-यापन करने वाले अमेठी के गंगागंज मोहल्ले का रहने वाले अफसर अली का पैर पिछले दिनों फ्रैक्चर हो गया था। पैर फ्रैक्चर होने के बाद वह अमेठी शहर स्थित सीएचसी गया जहां उसके पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया।
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प्लास्टर चढ़ने के बाद भी जब उसे दर्द में आराम नहीं मिला तो वह अपने रिश्ते के मामा के साथ बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल आया। जिला अस्पताल में एक रुपये का पर्चा बनवाकर वह अस्थि रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचा। डॉक्टर ने अफसर अली की जांच करने के बाद कहा कि उसका प्लास्टर गलत बंध गया है। इसे काटकर दोबारा प्लास्टर करना पड़ेगा।
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इसके बाद चिकित्सक ने उसे सरकारी पर्चे के इतर एक छोटी पर्ची पर दवाएं व प्लास्टर से जुड़ी अन्य सामग्री लिखकर लाने को कहा। जब अफसर पर्चा लेकर दवा वितरण काउंटर पर पहुंचा तो उसे बताया गया कि यह दवाएं बाहर से मिलेंगी। बाहर मेडिकल स्टोर पर जाने पर उसे बताया कि यह दवाएं व सामग्री 1,400 रुपये की हैैं। मजदूर के पास पैसे नहीं थे। जिसके बाद उसने अपने इलाज के लिए सहायता मांगी। मदद मांगने पर किसी ने उसे दवा व सामग्री खरीद कर दी। मजदूर का आरोप था कि उसे दो-दो रुपये की पट्टी तक बाहर मेडिकल से खरीदनी पड़ी।
आरोप निराधार
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. हनुमान प्रसाद ने कहा कि अफसर नाम का मरीज ओपीडी में आया था। उसे देखकर अस्पताल की दवाएं लिखी गईं। यह कहा गया कि उसका दोबारा प्लास्टर बांधना पड़ेगा। अस्पताल में सामग्री व दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। बाहर से दवा लिखने का सवाल ही नहीं उठता।
होगी जांच : सीएमएस
संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि मरीज के आरोपों से जुड़ा वीडियो उन्हें मिला है। वीडियो की जांच कराई जाएगी कि मरीज के आरोप में कितनी सच्चाई है। जांच में यदि मामला सही मिला तो कार्रवाई की जाएगी।