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Amethi News: सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं ईश्वर
Fri, 05 Jun 2026 12:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 05 Jun 2026 12:36 AM IST
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अमेठी। मुकुटनाथ ताला धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवाचक आचार्य सुभाष शांडिल्य ने भक्ति, श्रद्धा और धैर्य का महत्व बताया। कहा कि भक्ति का मार्ग देखने में सरल लगता है, लेकिन उस पर वही व्यक्ति टिक पाता है, जिसकी आस्था अटल और मन दृढ़ होता है। सच्ची भक्ति से ही ईश्वर प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि उन्हें अनेक कष्ट दिए गए। पहाड़ से गिराया गया, समुद्र में फेंका गया, विष पिलाया गया और कालकोठरी में बंद किया गया, लेकिन उनकी भक्ति कभी डगमगाई नहीं। अपने भक्त की रक्षा के लिए भगवान ने नरसिंह अवतार धारण किया।
उन्होंने बताया कि प्रह्लाद को गर्भकाल में ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो गया था। ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि माता सुनीति की प्रेरणा से बालक ध्रुव ने भगवान की आराधना का मार्ग अपनाया। मधुवन में कठोर तपस्या कर उन्होंने भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और ध्रुवलोक प्राप्त किया। आज भी ध्रुव तारा उनकी अटूट भक्ति और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
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उन्होंने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि उन्हें अनेक कष्ट दिए गए। पहाड़ से गिराया गया, समुद्र में फेंका गया, विष पिलाया गया और कालकोठरी में बंद किया गया, लेकिन उनकी भक्ति कभी डगमगाई नहीं। अपने भक्त की रक्षा के लिए भगवान ने नरसिंह अवतार धारण किया।
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उन्होंने बताया कि प्रह्लाद को गर्भकाल में ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो गया था। ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि माता सुनीति की प्रेरणा से बालक ध्रुव ने भगवान की आराधना का मार्ग अपनाया। मधुवन में कठोर तपस्या कर उन्होंने भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और ध्रुवलोक प्राप्त किया। आज भी ध्रुव तारा उनकी अटूट भक्ति और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
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