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Amethi News: ईंधन संकट बढ़ा, कई पंप सूखे, लगीं लंबी कतारें, सीमित आपूर्ति
Mon, 30 Mar 2026 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 30 Mar 2026 12:25 AM IST
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गौरीगंज में पेट्रोलपंप पर लगी लोगों की भीड़। -संवाद
अमेठी सिटी। जिले में पेट्रोल-डीजल की अचानक बढ़ी मांग से आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा गई है। कई पंपों पर ईंधन खत्म हो गया, जबकि जहां उपलब्ध है वहां सीमित मात्रा में दिया जा रहा है। कटाई के मौसम में बढ़ी मांग और भंडारण से दबाव और बढ़ गया है। लोग 10-15 किमी तक ईंधन के लिए भटक रहे हैं।
पंपों पर सुबह से देर शाम तक वाहनों की कतारें लगी रहीं। आम लोगों के साथ ट्रक चालक भी परेशान दिखे। खेती के मौसम में बढ़ी जरूरत और भंडारण की प्रवृत्ति से दबाव बढ़ गया है। टैंकर से आपूर्ति पहुंचते ही कुछ ही घंटों में पंप खाली हो जा रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के बावजूद गैलन में ईंधन लेने का सिलसिला जारी है।
जिले में 141 पेट्रोल पंप होने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था असंतुलित बनी हुई है। गौरीगंज, अमेठी, जगदीशपुर, जायस, वारिसगंज, मोहनगंज और रामगंज समेत कई क्षेत्रों में अलग-अलग स्थिति रही। कहीं केवल पेट्रोल मिला, कहीं केवल डीजल, तो कई पंप पूरी तरह बंद रहे।
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ग्रामीण इलाकों में अधिकांश पंपों पर दोनों ईंधन समाप्त हो गए, जिससे लोगों को शहर का रुख करना पड़ा। वाहन चालक 10 से 15 किलोमीटर तक ईंधन की तलाश में भटकते रहे।
जिला मुख्यालय गौरीगंज में भी सीमित आपूर्ति रही। एक पेट्रोल पंप पर आई 12 हजार लीटर डीजल और छह हजार लीटर पेट्रोल की खेप महज चार घंटे में खत्म हो गई। अन्य पंपों पर भी आपूर्ति समाप्त होते ही लोगों को लौटना पड़ा।
डीजल की कमी का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। गेहूं की कटाई और मड़ाई के समय मांग बढ़ गई है। कंबाइन मशीन संचालक अधिक किराया मांग रहे हैं, जिससे लागत बढ़ने की आशंका है। मौसम में बदलाव के बीच किसान जल्द फसल समेटना चाहते हैं, लेकिन ईंधन न मिलने से काम प्रभावित हो रहा है।
उधर, गेहूं की कटाई के चलते किसानों को लगातार डीजल की जरूरत है। मौसम की अनिश्चितता के बीच अतिरिक्त ईंधन रखने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
डीएसओ शशिकांत ने बताया कि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने के प्रयास जारी हैं। कुछ स्थानों पर बढ़ी मांग के कारण अस्थायी समस्या आई है। जिले में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
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पंपों पर सुबह से देर शाम तक वाहनों की कतारें लगी रहीं। आम लोगों के साथ ट्रक चालक भी परेशान दिखे। खेती के मौसम में बढ़ी जरूरत और भंडारण की प्रवृत्ति से दबाव बढ़ गया है। टैंकर से आपूर्ति पहुंचते ही कुछ ही घंटों में पंप खाली हो जा रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के बावजूद गैलन में ईंधन लेने का सिलसिला जारी है।
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जिले में 141 पेट्रोल पंप होने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था असंतुलित बनी हुई है। गौरीगंज, अमेठी, जगदीशपुर, जायस, वारिसगंज, मोहनगंज और रामगंज समेत कई क्षेत्रों में अलग-अलग स्थिति रही। कहीं केवल पेट्रोल मिला, कहीं केवल डीजल, तो कई पंप पूरी तरह बंद रहे।
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ग्रामीण इलाकों में अधिकांश पंपों पर दोनों ईंधन समाप्त हो गए, जिससे लोगों को शहर का रुख करना पड़ा। वाहन चालक 10 से 15 किलोमीटर तक ईंधन की तलाश में भटकते रहे।
जिला मुख्यालय गौरीगंज में भी सीमित आपूर्ति रही। एक पेट्रोल पंप पर आई 12 हजार लीटर डीजल और छह हजार लीटर पेट्रोल की खेप महज चार घंटे में खत्म हो गई। अन्य पंपों पर भी आपूर्ति समाप्त होते ही लोगों को लौटना पड़ा।
डीजल की कमी का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। गेहूं की कटाई और मड़ाई के समय मांग बढ़ गई है। कंबाइन मशीन संचालक अधिक किराया मांग रहे हैं, जिससे लागत बढ़ने की आशंका है। मौसम में बदलाव के बीच किसान जल्द फसल समेटना चाहते हैं, लेकिन ईंधन न मिलने से काम प्रभावित हो रहा है।
उधर, गेहूं की कटाई के चलते किसानों को लगातार डीजल की जरूरत है। मौसम की अनिश्चितता के बीच अतिरिक्त ईंधन रखने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
डीएसओ शशिकांत ने बताया कि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने के प्रयास जारी हैं। कुछ स्थानों पर बढ़ी मांग के कारण अस्थायी समस्या आई है। जिले में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।