{"_id":"67f17e5400f885af3b0b38ce","slug":"friends-are-companions-in-happiness-and-sorrow-amethi-news-c-96-1-ame1008-137769-2025-04-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: सुख-दुख के साथी होते हैं मित्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: सुख-दुख के साथी होते हैं मित्र
Sun, 06 Apr 2025 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 06 Apr 2025 12:32 AM IST
विज्ञापन
जामों के पूरे द्वारिका पांडेय गांव में कथा के दौरान आकर्षक वेश में सजे बच्चे। स्रोत-आयोजक।
जामों (अमेठी)। मनुष्य के सुख-दुख के साथी हमेशा मित्र ही होते हैं। सच्चे मित्र जीवन में किसी भी परिस्थिति में दिन-रात साथ खड़े होकर मदद करते हैं। भारतीय परंपरा में मित्रता की कई कहानियां हैं। उसी में भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा की कहानी है। ये बातें ग्राम पंचायत लोरिकपुर के द्वारिका पांडेय गांव में स्थित बाबा नागेश्वर धाम पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शनिवार को पं. माताफेर तिवारी निर्मोही महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि भारतीय परंपरा में जीवन में मित्र का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। जीवन में माता-पिता के बाद मित्र को बड़ा स्थान दिया गया है। जब कभी मित्रता की बात चलती है तो लोग कृष्ण-सुदामा की मित्रता की मिसाल देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने राजघराने में जन्म लिया और गरीब परिवार में सुदामा पैदा हुए थे। दोनों की मित्रता शिक्षा-दीक्षा के दौरान हो गई।
प्रवाचक ने बताया कि सुदामा का परिवार गरीबी से परेशान हो गया। पत्नी की जिद के कारण सुदामा अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने द्वारिका गए। सुदामा के आने का संदेश पाकर भगवान श्रीकृष्ण नंगे पैर ही दौड़ पडते हैं। उनको अपने महल में लाकर बैठा कर कहते हैं कि मित्र इतना कष्ट झेलने के बाद भी मेरे पास नहीं आए। यह घटना ही श्रीकृष्ण का अपने मित्र सुदामा के प्रति अनन्य प्रेम दर्शाती है। इस अवसर पर मुख्य यजमान अशोक कुमार पांडेय, दूधनाथ पांडेय, शिवम पांडेय, शुभम पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रवाचक ने बताया कि भारतीय परंपरा में जीवन में मित्र का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। जीवन में माता-पिता के बाद मित्र को बड़ा स्थान दिया गया है। जब कभी मित्रता की बात चलती है तो लोग कृष्ण-सुदामा की मित्रता की मिसाल देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने राजघराने में जन्म लिया और गरीब परिवार में सुदामा पैदा हुए थे। दोनों की मित्रता शिक्षा-दीक्षा के दौरान हो गई।
विज्ञापन
प्रवाचक ने बताया कि सुदामा का परिवार गरीबी से परेशान हो गया। पत्नी की जिद के कारण सुदामा अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने द्वारिका गए। सुदामा के आने का संदेश पाकर भगवान श्रीकृष्ण नंगे पैर ही दौड़ पडते हैं। उनको अपने महल में लाकर बैठा कर कहते हैं कि मित्र इतना कष्ट झेलने के बाद भी मेरे पास नहीं आए। यह घटना ही श्रीकृष्ण का अपने मित्र सुदामा के प्रति अनन्य प्रेम दर्शाती है। इस अवसर पर मुख्य यजमान अशोक कुमार पांडेय, दूधनाथ पांडेय, शिवम पांडेय, शुभम पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन