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Amethi News: पांच महिला चिकित्सक, फिर भी नहीं बची जच्चा-बच्चा की जान, उठ रहे सवाल

Thu, 30 Oct 2025 12:46 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 12:46 AM IST
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Five female doctors, yet the mother and child's lives were not saved, raising questions.
अमेठी। सीएचसी अमेठी में पांच महिला चिकित्सक की तैनाती के बावजूद प्रसव कराने में हीलाहवाली बरती जा रही है। सोमवार देर शाम प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उधर, सीएमओ की ओर से गठित जांच टीम बुधवार देर शाम तक सीएचसी नहीं पहुंची। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की अव्यवस्था मरीजों की जान ले रही है।
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अमेठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इकलौता अस्पताल है, जहां पर पांच महिला चिकित्सकों की तैनाती है। यहां पर तैनात सर्जन डाॅ. प्रेमा गोदी और डॉ. श्रेया मिश्रा महिला व प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। इसके अलावा डॉ. जरीना खान, डाॅ. प्रीति सिंह व डॉ. राधिका शुक्ल महिला रोग विशेषज्ञ हैं। सोमवार को मुंशीगंज के टेरी गांव निवासी अरुण कुमार की पत्नी दीपा को प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी में भर्ती कराया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अधीक्षक संग चिकित्सक व अन्य कर्मियों ने इलाज में लापरवाही बरती और जच्चा-बच्चा दोनों की जान चली गई।
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सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह की ओर से तीन सदस्यीय कमेटी जांच के लिए गठित की, लेकिन अभी तक टीम ने जांच नहीं शुरू की। आलम यह है कि अस्पताल का स्टाफ आरोपों से किनारा कर रहा है। परिजनों को झूठा साबित करते हुए बेहतर इलाज व चिकित्सक की मौजूदगी में प्रसव कराने की बात कह रहा है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि डॉ. श्रेया मिश्रा और डॉ. प्रीति सिंह की देखरेख में प्रसव कराया गया। इसके बाद उन्होंने व्यस्तता की बात कहते हुए कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया।
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गठित टीम में सीएचसी की महिला चिकित्सक
सीएमओ डाॅ. अंशुमान सिंह ने एसीएमओ डाॅ. राम प्रसाद व डॉ. पीके उपाध्याय और डाॅ. प्रेमा गोदी की तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए गठित की है। इस टीम की महिला चिकित्सक डॉ. प्रेमा गोदी सीएचसी अमेठी में ही तैनात है। इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सीएमओ ने बताया कि टीम ने अभी जांच नहीं शुरू की है। कहा कि लेबर कक्ष में डॉ. श्रेया मिश्रा की ड्यूटी थी। तीन बजे मरीज को रेफर कर दिया गया था, लेकिन परिजन नहीं ले गए।


रात में नहीं रुकते अधीक्षक और चिकित्सक
शासन व उच्चाधिकारियों की ओर से निर्देश दिया गया है कि अधीक्षक संग अन्य चिकित्सक अस्पताल परिसर में ही निवास करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर ऑन कॉल चिकित्सक उपलब्ध हाेने चाहिए। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि अधीक्षक संग कई चिकित्सक रात में सरकारी आवास पर नहीं रहते। रेफरल अस्पताल होने के बाद भी यहां मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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