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ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के तीन अफसरों पर केस
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गौरीगंज (अमेठी)। स्वास्थ्य उपकेंद्र के निर्माण के लिए स्वीकृत संपूर्ण राशि अवमुक्त होने के बावजूद विद्युतीकरण का कार्य नहीं कराना ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के तीन अफसरों को भारी पड़ गया। सीएमओ की तहरीर पर जायस पुलिस ने तत्कालीन एक्सईएन, एई व जेई के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
शासन ने जायस थाना क्षेत्र के बहादुरपुर में स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन निर्माण के लिए 17 अक्टूबर 2014 को 11.21 लाख रुपये की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। इस राशि में वाह्य विद्युत संयोजन के लिए 25 हजार तथा आंतरिक विद्युतीकरण के लिए 42,869 रुपये शामिल थे। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद उत्तर प्रदेश ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था।
सीएमओ डॉ. आरएम श्रीवास्तव के अनुसार फरवरी 2015 में स्वीकृत संपूर्ण राशि 11.21 लाख रुपये कोषागार अमेठी से उपलब्ध करा दी गई थी। कार्यदायी संस्था की ओर से 19 सितंबर 2017 को भवन हैंडओवर करने का प्रपत्र सौंपा गया। उस समय आवश्यकता के अनुरूप भवन हैंडओवर तो लिया गया लेकिन उसमें वाह्य व आंतरिक विद्युतीकरण कार्य नहीं कराने की बात हस्तांतरण प्रपत्र पर अंकित कराकर शेष कार्य पूर्ण कराने को कहा गया था।
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थाने में सीएमओ की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि 2015 से अब तक कार्यदायी संस्था की ओर से राजकीय राशि 67,896 रुपये प्राप्त करने के बाद भी शेष कार्य नहीं कराया जाना गबन है। इस गबन के लिए सीएमओ ने तत्कालीन एक्सईएन अशोक, एई वीरेंद्र कुमार तथा जेई आरके सिंह को जिम्मेदार बताते हुए केस दर्ज करने की मांग की थी। प्रभारी निरीक्षक जायस रमाकांत प्रसाद ने केस दर्ज करने की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रकरण की विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।
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शासन ने जायस थाना क्षेत्र के बहादुरपुर में स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन निर्माण के लिए 17 अक्टूबर 2014 को 11.21 लाख रुपये की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। इस राशि में वाह्य विद्युत संयोजन के लिए 25 हजार तथा आंतरिक विद्युतीकरण के लिए 42,869 रुपये शामिल थे। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद उत्तर प्रदेश ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था।
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सीएमओ डॉ. आरएम श्रीवास्तव के अनुसार फरवरी 2015 में स्वीकृत संपूर्ण राशि 11.21 लाख रुपये कोषागार अमेठी से उपलब्ध करा दी गई थी। कार्यदायी संस्था की ओर से 19 सितंबर 2017 को भवन हैंडओवर करने का प्रपत्र सौंपा गया। उस समय आवश्यकता के अनुरूप भवन हैंडओवर तो लिया गया लेकिन उसमें वाह्य व आंतरिक विद्युतीकरण कार्य नहीं कराने की बात हस्तांतरण प्रपत्र पर अंकित कराकर शेष कार्य पूर्ण कराने को कहा गया था।
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थाने में सीएमओ की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि 2015 से अब तक कार्यदायी संस्था की ओर से राजकीय राशि 67,896 रुपये प्राप्त करने के बाद भी शेष कार्य नहीं कराया जाना गबन है। इस गबन के लिए सीएमओ ने तत्कालीन एक्सईएन अशोक, एई वीरेंद्र कुमार तथा जेई आरके सिंह को जिम्मेदार बताते हुए केस दर्ज करने की मांग की थी। प्रभारी निरीक्षक जायस रमाकांत प्रसाद ने केस दर्ज करने की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रकरण की विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।