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Amethi News: ...मन में वीणा की झनकार भर दीजिए
Mon, 30 Jun 2025 12:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 30 Jun 2025 12:29 AM IST
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गौरीगंज पुस्तकालय में काव्य पाठ करते कवि डॉ. केशरी शुक्ल। संवाद
अमेठी सिटी। जिला मुख्यालय गौरीगंज स्थित पुस्तकालय परिसर में रविवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस दौरान गीत, गजल, मुक्तक और व्यंग्य के माध्यम से कवियों ने सामाजिक मुद्दों, राजनीतिक विडंबनाओं और मानवीय भावनाओं को स्वर दिया।
गोष्ठी की शुरुआत कवयित्री रामकुमारी ने वाणी वंदना से की। संचालन कर रहे अनिरुद्ध मिश्र ने पढ़ा कि मां हमें ज्ञान वैभव का वर दीजिए, मन में वीणा की झनकार भर दीजिए। आयोजक अनुपम पांडेय ने कहा कि धैर्य को कब तक धराया जाएगा, सत्य को कब तक छिपाया जाएगा। कभी कोई पूछे ये कुंती से भी, कर्ण को कब तक बहाया जाएगा।
डॉ. केशरी शुक्ल ने पढ़ा कि मुंह से छीने गए लोगों के निवाले देखे, दूर जलती हुई बस्ती के उजाले देखे। भूख से रोते हुए बच्चों को क्या न देखें, बेवजह मस्जिद देखें कि शिवाले देखें। पप्पू सिंह कसक ने कहा कि मुझको ही लूट कर मुझे दान दिया है, इतना भी गिरा नहीं हूं, जितना जान लिया है।
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मकसूद जाफरी ने राजनीति पर तंज कसते हुए पढ़ा कि गुनाहों को न जाने किस सजा में बांट लेती है, सियासत थूकती है फिर उसी को चाट लेती है। दिवस प्रताप सिंह ने कहा कि सक्रिय फिर से मदारी हो गए, ये बाबा पुन: ब्रह्मचारी हो गए, जनता जाए तो आखिर कहां जाए, सारे रहनुमा शिकारी हो गए। उदयराज वर्मा, दीपेंद्र तन्हा, सूर्यलाल समेत कई अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में समरसता और जागरूकता का संचार किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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गोष्ठी की शुरुआत कवयित्री रामकुमारी ने वाणी वंदना से की। संचालन कर रहे अनिरुद्ध मिश्र ने पढ़ा कि मां हमें ज्ञान वैभव का वर दीजिए, मन में वीणा की झनकार भर दीजिए। आयोजक अनुपम पांडेय ने कहा कि धैर्य को कब तक धराया जाएगा, सत्य को कब तक छिपाया जाएगा। कभी कोई पूछे ये कुंती से भी, कर्ण को कब तक बहाया जाएगा।
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डॉ. केशरी शुक्ल ने पढ़ा कि मुंह से छीने गए लोगों के निवाले देखे, दूर जलती हुई बस्ती के उजाले देखे। भूख से रोते हुए बच्चों को क्या न देखें, बेवजह मस्जिद देखें कि शिवाले देखें। पप्पू सिंह कसक ने कहा कि मुझको ही लूट कर मुझे दान दिया है, इतना भी गिरा नहीं हूं, जितना जान लिया है।
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मकसूद जाफरी ने राजनीति पर तंज कसते हुए पढ़ा कि गुनाहों को न जाने किस सजा में बांट लेती है, सियासत थूकती है फिर उसी को चाट लेती है। दिवस प्रताप सिंह ने कहा कि सक्रिय फिर से मदारी हो गए, ये बाबा पुन: ब्रह्मचारी हो गए, जनता जाए तो आखिर कहां जाए, सारे रहनुमा शिकारी हो गए। उदयराज वर्मा, दीपेंद्र तन्हा, सूर्यलाल समेत कई अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में समरसता और जागरूकता का संचार किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।