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ओपीडी में नहीं मिलतीं महिला डॉक्टर
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गौरीगंज (अमेठी)। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों की मनमानी का शिकार हो रही है। आलम यह है कि एक भी महिला चिकित्सक की ओपीडी न होने से गर्भवती व महिला संबंधी बीमारी से ग्रसित मरीजों को गैर जिले या निजी चिकित्सालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। बुधवार सुबह 9:40 से 10:30 बजे तक ज्यादातर चिकित्सकों के ओपीडी कक्ष में ताला बंद रहा।
मरीजों के बेहतर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मुख्यालय पर मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला अस्पताल के साथ तिलोई के रस्तामऊ में 200 बेड व जगदीशपुर में ट्रॉमा सेंटर के साथ 13 सीएचसी व 30 पीएचसी संचालित की जाती हैं। जिला अस्पताल में दवा व वित्तीय कोड अलॉट होने के बाद एक तरफ जहां कई रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त चल रहे हैं तो वहीं, तैनात चिकित्सक भी मरीजों का बेहतर उपचार करने के बजाय मनमानी पर आमादा हैं।
जिला अस्पताल से संबद्ध महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचिका सेठ कार्यभार ग्रहण करने के बाद मेडिकल अवकाश पर चल रही हैं। दूसरी चिकित्सक डॉ. जरीना खान भी दस दिन के मेडिकल अवकाश पर हैं। ऐसे में गर्भवती के साथ महिलाओं की अन्य बीमारियों का उपचार जिला अस्पताल में पूरी तरह बंद पड़ा है। अस्पताल पहुंचने वाली महिला मरीजों को गैर जिले या निजी डॉक्टरों की शरण लेनी पड़ रही है।
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बुधवार को अमर उजाला टीम 9:40 बजे जिला अस्पताल पहुंची तो डॉ. पीतांबर कनौजिया, डॉ. अनीस, डॉ. बीबी सिंह अपने चैंबर में तो डॉ. शुभम पांडेय इमरजेंसी में मरीजों का उपचार करते मिले। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय गुप्ता, नेत्र सर्जन डॉ. शैलेंद्र बाथम व डॉ. कुमुद, एनेस्थीसिया एंड क्रिटिकल केयर डॉ. अभय गोयल, आर्थो सर्जन डॉ. हनुमान प्रसाद व चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके त्रिपाठी अपने चैंबर में नहीं मिले।
टीम 10:30 बजे अस्पताल से लौटी, तब तक इन चिकित्सकों से उपचार कराने पहुंचे लोग वापस लौटते मिले। ऐसे में जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके, इसकी कोशिश पूरी तरह फ्लाप हो रही है। परिसर के अंदर व बाहर मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते दिखे। कई मरीजों ने बताया कि प्रतिदिन सुबह दस बजे से पहले अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं आता है।
जिला अस्पताल में महिला अपराध पीड़ितों के मेडिकोलगील की कोई निर्धारित व्यवस्था नहीं है। यहां तैनात महिला चिकित्सकों के न होने से सीएचसी में तैनात महिला चिकित्सकों को मेडिकोलीगल करना पड़ रहा है। गौरीगंज सीएचसी अधीक्षक डॉ. पीके उपाध्याय ने बताया डॉ. श्रेया मिश्रा, डॉ. काजल साहू, डॉ. पूजा मौर्या व डॉ. रूबी सिंह सेे निर्धारित रोस्टर में प्रतिदिन मेडिकोलीगल कराया जा रहा है। हालांकि बुधवार सुबह 10:30 बजे तक मेडिकोलीगल के लिए नामित डॉ. रूबी सिंह अस्पताल नहीं पहुंची थीं।
अस्पताल में टीम को मिली मरीज आशा ने बताया कि वह सुबह 8:00 बजे से महिला रोग विशेषज्ञ का इंतजार कर रही है। अब तक कोई डॉक्टर नहीं आया है, ऐसे में अब उसे निजी अस्पताल जाकर उपचार कराना पड़ेगा। मऊ गांव निवासी केवला ने बताया कि जिला अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ से उपचार करना था लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने से बैरंग लौटना पड़ रहा है। सुनीता ने बताया कि जिला अस्पताल में महिला डॉक्टर कभी नहीं मिलती हैं। वह पांचवीं बार अस्पताल आई लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। ऐसे में दिक्कत हो रही है।
आकस्मिक ड्यूटी पर चिकित्सकों के न रहने से कई बार जिला अस्पताल में मरीज के तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बवाल हो चुका है। बवाल के बाद विभाग सिर्फ मरीजों के तीमारदारों पर केस दर्ज कराकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। जिम्मेदार चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में डॉक्टरों की मनमानी बढ़ती जा रही है।
जिला अस्पताल में नियमित रूप से महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। शासन से भी पत्राचार कर जिला अस्पताल में सृजित पद के सापेक्ष नियुक्ति करने का अनुरोध किया गया है। जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती होने की उम्मीद है। नियमित जांच कराई जाती है। यदि चिकित्सक समय से ओपीडी नहीं कर रहे तो औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल, सीएमएस
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मरीजों के बेहतर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मुख्यालय पर मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला अस्पताल के साथ तिलोई के रस्तामऊ में 200 बेड व जगदीशपुर में ट्रॉमा सेंटर के साथ 13 सीएचसी व 30 पीएचसी संचालित की जाती हैं। जिला अस्पताल में दवा व वित्तीय कोड अलॉट होने के बाद एक तरफ जहां कई रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त चल रहे हैं तो वहीं, तैनात चिकित्सक भी मरीजों का बेहतर उपचार करने के बजाय मनमानी पर आमादा हैं।
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जिला अस्पताल से संबद्ध महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचिका सेठ कार्यभार ग्रहण करने के बाद मेडिकल अवकाश पर चल रही हैं। दूसरी चिकित्सक डॉ. जरीना खान भी दस दिन के मेडिकल अवकाश पर हैं। ऐसे में गर्भवती के साथ महिलाओं की अन्य बीमारियों का उपचार जिला अस्पताल में पूरी तरह बंद पड़ा है। अस्पताल पहुंचने वाली महिला मरीजों को गैर जिले या निजी डॉक्टरों की शरण लेनी पड़ रही है।
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बुधवार को अमर उजाला टीम 9:40 बजे जिला अस्पताल पहुंची तो डॉ. पीतांबर कनौजिया, डॉ. अनीस, डॉ. बीबी सिंह अपने चैंबर में तो डॉ. शुभम पांडेय इमरजेंसी में मरीजों का उपचार करते मिले। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय गुप्ता, नेत्र सर्जन डॉ. शैलेंद्र बाथम व डॉ. कुमुद, एनेस्थीसिया एंड क्रिटिकल केयर डॉ. अभय गोयल, आर्थो सर्जन डॉ. हनुमान प्रसाद व चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके त्रिपाठी अपने चैंबर में नहीं मिले।
टीम 10:30 बजे अस्पताल से लौटी, तब तक इन चिकित्सकों से उपचार कराने पहुंचे लोग वापस लौटते मिले। ऐसे में जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके, इसकी कोशिश पूरी तरह फ्लाप हो रही है। परिसर के अंदर व बाहर मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते दिखे। कई मरीजों ने बताया कि प्रतिदिन सुबह दस बजे से पहले अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं आता है।
जिला अस्पताल में महिला अपराध पीड़ितों के मेडिकोलगील की कोई निर्धारित व्यवस्था नहीं है। यहां तैनात महिला चिकित्सकों के न होने से सीएचसी में तैनात महिला चिकित्सकों को मेडिकोलीगल करना पड़ रहा है। गौरीगंज सीएचसी अधीक्षक डॉ. पीके उपाध्याय ने बताया डॉ. श्रेया मिश्रा, डॉ. काजल साहू, डॉ. पूजा मौर्या व डॉ. रूबी सिंह सेे निर्धारित रोस्टर में प्रतिदिन मेडिकोलीगल कराया जा रहा है। हालांकि बुधवार सुबह 10:30 बजे तक मेडिकोलीगल के लिए नामित डॉ. रूबी सिंह अस्पताल नहीं पहुंची थीं।
अस्पताल में टीम को मिली मरीज आशा ने बताया कि वह सुबह 8:00 बजे से महिला रोग विशेषज्ञ का इंतजार कर रही है। अब तक कोई डॉक्टर नहीं आया है, ऐसे में अब उसे निजी अस्पताल जाकर उपचार कराना पड़ेगा। मऊ गांव निवासी केवला ने बताया कि जिला अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ से उपचार करना था लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने से बैरंग लौटना पड़ रहा है। सुनीता ने बताया कि जिला अस्पताल में महिला डॉक्टर कभी नहीं मिलती हैं। वह पांचवीं बार अस्पताल आई लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। ऐसे में दिक्कत हो रही है।
आकस्मिक ड्यूटी पर चिकित्सकों के न रहने से कई बार जिला अस्पताल में मरीज के तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बवाल हो चुका है। बवाल के बाद विभाग सिर्फ मरीजों के तीमारदारों पर केस दर्ज कराकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। जिम्मेदार चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में डॉक्टरों की मनमानी बढ़ती जा रही है।
जिला अस्पताल में नियमित रूप से महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। शासन से भी पत्राचार कर जिला अस्पताल में सृजित पद के सापेक्ष नियुक्ति करने का अनुरोध किया गया है। जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती होने की उम्मीद है। नियमित जांच कराई जाती है। यदि चिकित्सक समय से ओपीडी नहीं कर रहे तो औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल, सीएमएस