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Amethi News: भीगी फसल सहेजने में जुटे किसान
Sun, 02 Nov 2025 12:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 02 Nov 2025 12:38 AM IST
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टेरी गांव में भीगी धान की फसल को सहेजते किसान। संवाद
अमेठी सिटी। बेमौसम बारिश होने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। शनिवार सुबह हल्की धूप निकली तो किसान खेतों में पानी में डूबी धान की फसल बचाने में जुट गए। अब कटी फसल को मेड़, सड़क व सुरक्षित स्थान पर सुखाने का प्रयास किया जा रहा है। शनिवार को भी दिनभर बादलों की लुकाछिपी जारी रही।
किसान आलोक शुक्ल ने बताया कि मजदूर लगाकर तीन बीघा धान की फसल की कटाई करा दी है। बारिश होने से खेत में पड़ी धान की फसल भीग गई है। जमीन पर बालियां पड़ी होने से उसमें अब जमाव होना शुरू हो गया है। सुबह धूप निकली तो मजदूर लगाकर धान को खेत की मेड़ पर सूखने के लिए रखने की कोशिश की जा रही है।
सरूवावां गांव निवासी किसान बाबूलाल ने कहा कि भैया यहि समय मा यह तौ कबौ नाही भा रहान, पांच दिन से लगातार पानी बरसा हुवए और सूर्य के दर्शन न भवा होय। खेते मा काटी गय धान कय फसल सड़त अहाय, धान जामय लाग अहाय। मेड़े पय झुराय का बरै रखत अही, झुराय जाय तौ पिटाई करी, भगवान ऊपर रहें तौ आधा तीहा धान चला जाय। टेरी गांवा निवासी आशा देवी व राघवराम और त्रिलोकपुर गांव निवासी रामू ने बताया कि कटी पड़ी धान की फसल पानी में भीग गई है। धान का दाना काला पड़ जाएगा। उपज प्रभावित हो गई है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में किसान क्रेडिट कार्ड से करीब डेढ़ लाख किसान आच्छादित हैं। लगभग 50 हजार किसानों के कार्ड निष्क्रिय हैं। बताया कि गेहूं और धान की ही फसल का बीमा होता है। जिले में मात्र 28 हजार किसान ही हैं, जिन्होंने फसल का बीमा कराया है।
फसल नुकसान की करें शिकायत
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मोंथा चक्रवात के प्रभाव से हुई बारिश के कारण जिले में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा कराया है, वे तुरंत टोल फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज करें। व्यक्तिगत क्षतिपूर्ति के लिए 72 घंटे के भीतर सूचना देना आवश्यक है। शिकायत दर्ज करते समय किसान अपने किसान क्रेडिट कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर और आधार संख्या अवश्य दें।
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किसान आलोक शुक्ल ने बताया कि मजदूर लगाकर तीन बीघा धान की फसल की कटाई करा दी है। बारिश होने से खेत में पड़ी धान की फसल भीग गई है। जमीन पर बालियां पड़ी होने से उसमें अब जमाव होना शुरू हो गया है। सुबह धूप निकली तो मजदूर लगाकर धान को खेत की मेड़ पर सूखने के लिए रखने की कोशिश की जा रही है।
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सरूवावां गांव निवासी किसान बाबूलाल ने कहा कि भैया यहि समय मा यह तौ कबौ नाही भा रहान, पांच दिन से लगातार पानी बरसा हुवए और सूर्य के दर्शन न भवा होय। खेते मा काटी गय धान कय फसल सड़त अहाय, धान जामय लाग अहाय। मेड़े पय झुराय का बरै रखत अही, झुराय जाय तौ पिटाई करी, भगवान ऊपर रहें तौ आधा तीहा धान चला जाय। टेरी गांवा निवासी आशा देवी व राघवराम और त्रिलोकपुर गांव निवासी रामू ने बताया कि कटी पड़ी धान की फसल पानी में भीग गई है। धान का दाना काला पड़ जाएगा। उपज प्रभावित हो गई है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में किसान क्रेडिट कार्ड से करीब डेढ़ लाख किसान आच्छादित हैं। लगभग 50 हजार किसानों के कार्ड निष्क्रिय हैं। बताया कि गेहूं और धान की ही फसल का बीमा होता है। जिले में मात्र 28 हजार किसान ही हैं, जिन्होंने फसल का बीमा कराया है।
फसल नुकसान की करें शिकायत
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मोंथा चक्रवात के प्रभाव से हुई बारिश के कारण जिले में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा कराया है, वे तुरंत टोल फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज करें। व्यक्तिगत क्षतिपूर्ति के लिए 72 घंटे के भीतर सूचना देना आवश्यक है। शिकायत दर्ज करते समय किसान अपने किसान क्रेडिट कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर और आधार संख्या अवश्य दें।