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इमाम हुसैन की शहादत को याद कर नम हुईं आंखें
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49 : मुसाफिरखाना : अंजुमन कार्यक्रम को संबोधित करता वक्ता। -संवाद
- फोटो : AMETHI
मुसाफिरखाना (अमेठी)। भनौली गांव में बुधवार को अय्याम ए अजा के आखिरी दिन सोगवारों ने नम आंखों से अमारी का जुलूस निकाला। जिसमें आसपास के कई जिलों से आईं अंजुमनें शामिल हुईं। जुलूस का आयोजन अंजुमन सिपाहे हुसैनी की ओर से किया गया। अजादारों ने नौहाख्वानी कर इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों की शहादत को याद किया।
बुधवार की सुबह सात बजे जामा मस्जिद इमाम बाग से जुलूस उठाया गया। यह जुलूस इसौली रोड, दरगाह ए आलिया, मेंहदी खाना, छोटे इमामबाड़े होते हुए बड़े इमामबाड़े पर पहुंचा। जुलूस में अयोध्या, सुल्तानपुर, बाराबंकी, मऊ, अमेठी जिले से दर्जनों अंजुमनें शामिल हुईं। अंजुमनों ने नौहख्वानी व सीनाजनी की। जुलूस में भारी संख्या में अजादार मौजूद रहे। जुलूस इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से आठ रबीउल अव्वल को पिछले 24 सालों से लगातार उठाया जा रहा है।
जुलूस कर्बला के शहीदों और कर्बला के बाद इमाम हुसैन के परिजनों पर पड़ी मुसीबतों की याद में निकाला जाता है। जुलूस के दौरान मौलाना इकबाल हुसैन ने पहली तकरीर की। उसके बाद जुलूस रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंचा, तो मौलाना खादिम अब्बास ने अपनी तकरीर में लोगों को इमाम हुसैन का संदेश दिया।
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जुलूस में मौलाना आसिफ हुसैन के अलावा अंत में मौलाना हैदर मेहदी ने तकरीर की। इस दौरान अजादारों को जिंदान-ए-शाम, जन्नतुल बकी, मकतल-ए-शोहदा और रौजा-ए-रसूल की शबीह की जियारत कराई गई। जुलूस के अंत में बशीर का मदीने में आकर खबर-ए-गम सुनाने का मंजर भी पेश किया गया। उसके बाद अंजुमन सिपाहे हुसैनी के नौजवानों ने जंजीरजनी की। जुलूस में शारिब अब्बास ने निजामत की। इस दौरान प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रहा।
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बुधवार की सुबह सात बजे जामा मस्जिद इमाम बाग से जुलूस उठाया गया। यह जुलूस इसौली रोड, दरगाह ए आलिया, मेंहदी खाना, छोटे इमामबाड़े होते हुए बड़े इमामबाड़े पर पहुंचा। जुलूस में अयोध्या, सुल्तानपुर, बाराबंकी, मऊ, अमेठी जिले से दर्जनों अंजुमनें शामिल हुईं। अंजुमनों ने नौहख्वानी व सीनाजनी की। जुलूस में भारी संख्या में अजादार मौजूद रहे। जुलूस इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से आठ रबीउल अव्वल को पिछले 24 सालों से लगातार उठाया जा रहा है।
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जुलूस कर्बला के शहीदों और कर्बला के बाद इमाम हुसैन के परिजनों पर पड़ी मुसीबतों की याद में निकाला जाता है। जुलूस के दौरान मौलाना इकबाल हुसैन ने पहली तकरीर की। उसके बाद जुलूस रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंचा, तो मौलाना खादिम अब्बास ने अपनी तकरीर में लोगों को इमाम हुसैन का संदेश दिया।
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जुलूस में मौलाना आसिफ हुसैन के अलावा अंत में मौलाना हैदर मेहदी ने तकरीर की। इस दौरान अजादारों को जिंदान-ए-शाम, जन्नतुल बकी, मकतल-ए-शोहदा और रौजा-ए-रसूल की शबीह की जियारत कराई गई। जुलूस के अंत में बशीर का मदीने में आकर खबर-ए-गम सुनाने का मंजर भी पेश किया गया। उसके बाद अंजुमन सिपाहे हुसैनी के नौजवानों ने जंजीरजनी की। जुलूस में शारिब अब्बास ने निजामत की। इस दौरान प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रहा।