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परीक्षक के भरोसे हो रहा आंखों का इलाज

Fri, 10 Sep 2021 11:14 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 11:14 PM IST
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Eye's treatment is going on in district hospital without eye specialist
गौरीगंज(अमेठी)। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा संयुक्त जिला अस्पताल में झूठा साबित हो रहा है। अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद दवाओं की कमी से इलाज प्रभावित हो रहा है।
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तो दूसरी तरफ बिना नेत्र चिकित्सक आंखों का इलाज किया जा रहा है। ऐसे में मोतियाबिंद समेत आंख की अनेक बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को गैर जिलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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कोविड संक्रमण काल में संसाधनों के अभाव में इलाज में हुई परेशानी को देखते हुए इनमें सुधार के लिए जिला प्रशासन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने में जुटा है। संयुक्त जिला अस्पताल व 200 शैय्या वाले रेफरल अस्पताल संचालित कर ट्रॉमा सेंटर संचालित कराने की कोशिश की जा रही है।
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ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए कई प्लांटों की स्थापना भी की गई। इसके बावजूद मरीजों को न तो इलाज मुहैया है न ही जरूरी दवाएं। वायरल फीवर के बढ़ते संक्रमण के साथ डेंगू/मलेरिया ने जहां लोगों को भयभीत कर रखा है वहीं इलाज के लिए न पर्याप्त संसाधन हैं न दवाएं।
यही नहीं नेत्र चिकित्सक व आंख से संबंधित दवाओं के अभाव में जिला अस्पताल में आंख के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। संयुक्त जिला अस्पताल में आंख के मरीजों का उपचार करने के लिए शासन से एक वरिष्ठ परामर्शदाता नेत्र डॉ. एसएन राय व डॉ. संजीव सिंह की तैनाती की गई है।
डॉ. एसएन राय को 200 शैय्या रेफरल अस्पताल में सीएसएस की जिम्मेदारी देते हुए संबद्ध किया गया है, वहीं डॉ. संजीव सिंह लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं। अस्पताल पहुंच रहे मोतियाबिंद समेत आंखों की अन्य समस्याओं का इलाज न होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
मरीजों को गैर जिले का चक्कर काट इलाज करना पड़ रहा है। अस्पताल में आई ड्रॉप समेत संबंधित कई भी दवाएं भी मौजूद नहीं है। शुक्रवार को आंख का उपचार कराने पहुंचे शिवबरन, मालती, रामसनेही व सुभाष को अस्पताल में आंख के डॉक्टर न होने से बिना इलाज ही लौटना पड़ा। वहीं कुछ मरीजों को परीक्षक परामर्श देते नजर आए। अस्पताल की फार्मेसी में मामूली आई ड्रॉप तक नहीं मिलीं।
तैनाती की गई है मांग: सीएमएस
संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल मेें नेत्र विशेषज्ञ की तैनाती शासन से नहीं की गई है। सीएमओ के अधीनस्थ दो चिकित्सकों में एक रेफरल अस्पताल से संबद्ध है तो दूसरे में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के रूप में सीएमओ कार्यालय में कार्य देख रहे हैं। शासन को पत्र भेजकर अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ की तैनाती का अनुरोध किया है। आईड्रॉप की भी मांग की गई है जल्द ही आपूर्ति मिलने की संभावना है।

कार्रवाई के लिए भेजा गया पत्र: सीएमओ
डॉ. आशुतोष दुबे ने बताया कि डॉ. संजीव सिंह एसीएमओ के पद पर जिले मेें तैनात हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल से संबद्ध करते हुए मरीजों का उपचार करने का निर्देश दिया गया है। निर्देश के बावजूद बिना सूचना डॉ. संजीव लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं। उनके अनुपस्थित रहने की सूचना शासन को देते हुए कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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