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साहित्यिक अभिरुचि वाले कर्मचारी पाएंगे सम्मान
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गौरीगंज (अमेठी)। राज्य सरकार ऐसे कार्यरत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुरस्कृत व सम्मनित करेगी जो देवनागरी लिपि में साहित्यिक सेवा कर रहे हैं। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने दायरे में आने वाले सभी साहित्यिक प्रवृत्ति के कर्मचारियों से निर्धारित प्रारूप पर आवेदन मांगा है। पद्य व गद्य विधा में अलग-अलग चयनित कर्मचारियों को शासन से एक-एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
एडीएम एसपी सिंह ने बताया कि राज्य के मौजूदा व सेवानिवृत्त कर्मियों के अलावा हिंदीतर भाषा-भाषी प्रदेशों के राज्यकर्मियों को पुरस्कृत किया जाना है। शासन की योजना के अंतर्गत मौजूदा वित्तीय वर्ष में देवनागरी लिपि में लिखित यूपी की भाषाओं/बोलियों में साहित्यिक सेवाओं के लिए कार्यरत कर्मियों को 12 पुरस्कार, सेवानिवृत्त कर्मियों को चार पुरस्कार एवं हिंदीतर भाषा-भाषी प्रदेशों/केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यकर्मियों को दो पुरस्कार दिए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि फारसी लिपि में लिखित उर्दू भाषा में साहित्यिक सेवाओं के लिए कार्यरत कर्मियों को चार, सेवानिवृत्त राज्य कर्मियों को दो पुरस्कार दिए जाने हैं। उक्त भाषाओं/बोलियों में दीर्घकाल तक साहित्यिक सेवा करने वाले तथा गद्य या पद्य की पिछले छह वर्षों के अंदर प्रकाशित मौलिक कृतियों के लिए एक-एक लाख रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे।
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बताया कि हिंदी/उर्दू, गद्य/पद्य में सृजनात्मक साहित्य के अतिरिक्त यात्रा वृत्तांत, आत्मकथा, जीवनी, संस्कृति, संस्मरण, विज्ञान, पर्यावरण, अद्यावधिक विषय, आलोचनात्मक साहित्य, भूगोल, इतिहास, दर्शन, पौराणिक, शिक्षा एवं वित्त से संबंधित पुस्तकें या अन्य भाषा में लिखी गई उपयोगी पुस्तकों का हिंदी/उर्दू में किए गए अनुवाद की पुस्तकें भी पुरस्कार हेतु विचारणीय होंगी।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार/हिंदीतर भाषा-भाषी प्रदेशों/केंद्र शासित प्रदेशों के अंतर्गत नियमित या तीन वर्ष से (पद के लिये निर्धारित वेतनक्रम में) लगातार कार्य करने वाले साहित्यकार सरकारी कर्मियों एवं यूपी सरकार के सेवानिवृत्त कर्मियों से निर्धारित प्रारूप पर प्रविष्टियां 30 नवंबर तक ली जाएंगी।
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एडीएम एसपी सिंह ने बताया कि राज्य के मौजूदा व सेवानिवृत्त कर्मियों के अलावा हिंदीतर भाषा-भाषी प्रदेशों के राज्यकर्मियों को पुरस्कृत किया जाना है। शासन की योजना के अंतर्गत मौजूदा वित्तीय वर्ष में देवनागरी लिपि में लिखित यूपी की भाषाओं/बोलियों में साहित्यिक सेवाओं के लिए कार्यरत कर्मियों को 12 पुरस्कार, सेवानिवृत्त कर्मियों को चार पुरस्कार एवं हिंदीतर भाषा-भाषी प्रदेशों/केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यकर्मियों को दो पुरस्कार दिए जाएंगे।
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उन्होंने बताया कि फारसी लिपि में लिखित उर्दू भाषा में साहित्यिक सेवाओं के लिए कार्यरत कर्मियों को चार, सेवानिवृत्त राज्य कर्मियों को दो पुरस्कार दिए जाने हैं। उक्त भाषाओं/बोलियों में दीर्घकाल तक साहित्यिक सेवा करने वाले तथा गद्य या पद्य की पिछले छह वर्षों के अंदर प्रकाशित मौलिक कृतियों के लिए एक-एक लाख रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे।
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बताया कि हिंदी/उर्दू, गद्य/पद्य में सृजनात्मक साहित्य के अतिरिक्त यात्रा वृत्तांत, आत्मकथा, जीवनी, संस्कृति, संस्मरण, विज्ञान, पर्यावरण, अद्यावधिक विषय, आलोचनात्मक साहित्य, भूगोल, इतिहास, दर्शन, पौराणिक, शिक्षा एवं वित्त से संबंधित पुस्तकें या अन्य भाषा में लिखी गई उपयोगी पुस्तकों का हिंदी/उर्दू में किए गए अनुवाद की पुस्तकें भी पुरस्कार हेतु विचारणीय होंगी।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार/हिंदीतर भाषा-भाषी प्रदेशों/केंद्र शासित प्रदेशों के अंतर्गत नियमित या तीन वर्ष से (पद के लिये निर्धारित वेतनक्रम में) लगातार कार्य करने वाले साहित्यकार सरकारी कर्मियों एवं यूपी सरकार के सेवानिवृत्त कर्मियों से निर्धारित प्रारूप पर प्रविष्टियां 30 नवंबर तक ली जाएंगी।