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लगातार बारिश में भीग गए दुर्गा पंडाल
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11 : जगदीशपुर : दुर्गा पूजा पंडाल में एकत्र बरसात के पानी को साफ करते श्रद्धालु। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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जगदीशपुर (अमेठी)। तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही लगातार बारिश से जिले में लगे दुर्गा पंडाल भीग गए हैं। आयोजक प्रतिमाओं को भीगने से बचाने के लिए पॉलीथिन, टिन शेड, प्लाई आदि का सहारा ले रहे हैं। वहीं लोगों की आवाजाही बंद होने से अधिकांश पंडाल सूने पड़े हैं।
क्षेत्र के तकरीबन 100 पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं सप्तमी/अष्टमी तिथि में स्थापित की गई थीं। प्रतिमाओं को स्थापित करने के बाद प्रतिदिन सुबह शाम वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इनका पूजन-अर्चन किया जा रहा है। प्रतिमाओं का विसर्जन पूर्णिमा तिथि पर होना है। कस्बे में अलग-अलग पूजा पंडाल में स्थापित मां के विभिन्न स्वरूपों के दर्शनों के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु परिवार और बच्चों सहित मां के दर्शनों के लिए जुटते थे।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु ग्रामीण क्षेत्र से भी आते हैं। अंतिम दो दिनों में भीड़ ज्यादा बढ़ती है। लेकिन रविवार शाम से लगातार रुक-रुक हो रही बारिश ने आयोजकों के साथ श्रद्धालुओं की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के कारण मां के दरबार भीग गए हैं।
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वहीं दूसरी ओर मां की प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त न हों इसके लिए आयोजक उन्हें पॉलिथिन, टिन शेड, प्लाई आदि से ढक कर वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं। अधिकांश स्थलों पर पंडाल खुले में बांस-बल्ली और कपड़े के सहारे बनाए गए हैं। मौसम का रुख देखते हुए अब कुछ पूजा समितियों के लोग पूरे पंडाल को वाटरप्रूफ बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
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क्षेत्र के तकरीबन 100 पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं सप्तमी/अष्टमी तिथि में स्थापित की गई थीं। प्रतिमाओं को स्थापित करने के बाद प्रतिदिन सुबह शाम वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इनका पूजन-अर्चन किया जा रहा है। प्रतिमाओं का विसर्जन पूर्णिमा तिथि पर होना है। कस्बे में अलग-अलग पूजा पंडाल में स्थापित मां के विभिन्न स्वरूपों के दर्शनों के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु परिवार और बच्चों सहित मां के दर्शनों के लिए जुटते थे।
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बड़ी संख्या में श्रद्धालु ग्रामीण क्षेत्र से भी आते हैं। अंतिम दो दिनों में भीड़ ज्यादा बढ़ती है। लेकिन रविवार शाम से लगातार रुक-रुक हो रही बारिश ने आयोजकों के साथ श्रद्धालुओं की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के कारण मां के दरबार भीग गए हैं।
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वहीं दूसरी ओर मां की प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त न हों इसके लिए आयोजक उन्हें पॉलिथिन, टिन शेड, प्लाई आदि से ढक कर वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं। अधिकांश स्थलों पर पंडाल खुले में बांस-बल्ली और कपड़े के सहारे बनाए गए हैं। मौसम का रुख देखते हुए अब कुछ पूजा समितियों के लोग पूरे पंडाल को वाटरप्रूफ बनाने की कोशिश में जुटे हैं।