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Amethi News: श्रद्धालुओं ने की मां छिन्नमस्ता की पूजा

Tue, 01 Jul 2025 12:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Tue, 01 Jul 2025 12:15 AM IST
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Devotees worshiped Maa Chhinnamasta
गुप्त नवरात्र में देवी मंदिर में कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
जगदीशपुर (अमेठी)। गुप्त नवरात्र के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने मां छिन्नमस्ता की विधिवत पूजा-अर्चना की। सोमवार को औद्योगिक क्षेत्र स्थित सेल कैंपस के आनंदेश्वर शिव मंदिर परिसर में भक्तों ने मां दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, राधा, सीता सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के दर्शन कर पूजन किया। साथ ही जयकारे लगाए। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय वातावरण रहा।
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पंडित आशुतोष पांडेय ने बताया कि मां छिन्नमस्ता को मां दुर्गा का उग्र रूप माना गया है, जो शक्ति और तेजस्विता की प्रतीक हैं। उनके स्वरूप का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि मां का सिर कटा हुआ होता है, एक हाथ में वे अपना ही सिर धारण करती हैं, जबकि दूसरे हाथ में खड्ग होती है। गले में मुंडमाला और कंधे पर यज्ञोपवीत होता है।
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उन्होंने कहा कि मां छिन्नमस्ता की पूजा करने से साधक को साहस, आत्मविश्वास और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। उनकी उपासना से भय का नाश होता है और साधक अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम होता है। उन्होंने कहा कि मां छिन्नमस्ता की कृपा से वाणी सिद्धि, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। गुप्त नवरात्र में इनकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
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सुनाई पौराणिक कथा
अनुष्ठान के दौरान उन्होंने मां छिन्नमस्ता से जुड़ी एक पौराणिक कथा का भी उल्लेख किया। बताया कि एक बार मां पार्वती मंदाकिनी नदी में अपनी दो सखियों के साथ स्नान कर रही थीं। अचानक उनकी सखियों को तीव्र भूख लगी। मां पार्वती ने कुछ समय प्रतीक्षा करने को कहा, परंतु उनकी भूख और बढ़ गई। अंततः मां पार्वती ने खड्ग से अपना सिर काट दिया। उनके कटे हुए गले से निकली रक्तधाराओं में से दो धाराएं सखियों ने ग्रहण कीं और तीसरी धार से मां पार्वती ने स्वयं अपनी प्यास बुझाई। पंडित ने कहा कि यह कथा आत्मबल, त्याग और करुणा का प्रतीक है। मां छिन्नमस्ता की उपासना करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
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