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Amethi News: उपमुख्यमंत्री जी.... अमेठी में नहीं होता दिल का इलाज
Fri, 17 Nov 2023 12:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 17 Nov 2023 12:28 AM IST
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अमेठी। 30 मई 2023, यह वही तारीख है, जब उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जिले के भ्रमण पर आए थे। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए निर्देश दिए थे लेकिन, हालात नहीं सुधरे।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 34 पदों के सापेक्ष मात्र 20 की तैनाती है। ऐसे में यहां पर न तो हृदय रोग का कोई विशेषज्ञ है न ही न्यूरो का। 172 दिन बाद एक बार फिर उप मुख्यमंत्री शुक्रवार को जिले में आ रहे हैं। वह जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों का प्राथमिक उपचार फिजीशियन करते हैं। महिला चिकित्सकों की कमी यहां पर एक बड़ी दिक्कत है। एक मात्र रेडियोलॉजिस्ट होने से आए दिन जांच में समस्या आती है। न्यूरो का भी कोई विशेषज्ञ नहीं है। इससे मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ जाती है।
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यहां पर मैटरनिटी विंग बनकर तैयार है। इसके बाद भी कर्मियों की कमी से संचालन नहीं हो पा रहा है। इसे संचालित करने के लिए कम से कम 10 स्टाफ नर्स की आवश्यकता है। इतना ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी मरीजों को चिकित्सकों की कमी से जूझना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल कहते हैं कि चिकित्सकों की कमी के बाबत अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है।
कब शुरू होगा ब्लड बैंक
ब्लड बैंक को लेकर भी बस दावे किए जा रहे हैं। यहां पर फ्रिज से लेकर अन्य उपकरण आ गए हैं। लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिए गए, लेकिन अभी तक टीम ने निरीक्षण नहीं किया है। इसके कारण मरीजों को दिक्कत होती है। आवश्यकता पड़ने पर रायबरेली या सुल्तानपुर तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
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जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 34 पदों के सापेक्ष मात्र 20 की तैनाती है। ऐसे में यहां पर न तो हृदय रोग का कोई विशेषज्ञ है न ही न्यूरो का। 172 दिन बाद एक बार फिर उप मुख्यमंत्री शुक्रवार को जिले में आ रहे हैं। वह जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
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जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों का प्राथमिक उपचार फिजीशियन करते हैं। महिला चिकित्सकों की कमी यहां पर एक बड़ी दिक्कत है। एक मात्र रेडियोलॉजिस्ट होने से आए दिन जांच में समस्या आती है। न्यूरो का भी कोई विशेषज्ञ नहीं है। इससे मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ जाती है।
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यहां पर मैटरनिटी विंग बनकर तैयार है। इसके बाद भी कर्मियों की कमी से संचालन नहीं हो पा रहा है। इसे संचालित करने के लिए कम से कम 10 स्टाफ नर्स की आवश्यकता है। इतना ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी मरीजों को चिकित्सकों की कमी से जूझना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल कहते हैं कि चिकित्सकों की कमी के बाबत अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है।
कब शुरू होगा ब्लड बैंक
ब्लड बैंक को लेकर भी बस दावे किए जा रहे हैं। यहां पर फ्रिज से लेकर अन्य उपकरण आ गए हैं। लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिए गए, लेकिन अभी तक टीम ने निरीक्षण नहीं किया है। इसके कारण मरीजों को दिक्कत होती है। आवश्यकता पड़ने पर रायबरेली या सुल्तानपुर तक की दौड़ लगानी पड़ती है।