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जिले की सभी न्याय पंचायतों में बनेगी गोशाला
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गौरीगंज (अमेठी)। छुट्टा मवेशियों को लेकर शासन गंभीर है। शासन के निर्देश पर विकास विभाग ने अब जिले की सभी न्याय पंचायतों में गोशाला बनवाने की योजना बनाई है। अब तक जिले में संचालित 80 गोशाला में 8100 मवेशी संरक्षित किए गए हैं। रिक्त न्याय पंचायतों में गोशाला निर्माण कराने की कवायद तेज कर दी गई है।
विधानसभा चुनाव के दौरान योगी सरकार को छुट्टा मवेशियों से किसानों के फसलों का हो रहे नुकसान से दो-चार होना पड़ा था। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद योगी सरकार छुट्टा मवेशियों को लेकर गंभीर है। शासन ने प्रत्येक न्याय पंचायत में गोशाला निर्माण कराने का निर्देश दिया है। शासन का निर्देश मिलने के बाद विकास विभाग सक्रिय हो गया है।
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने सभी खंड विकास अधिकारियों को अपने ब्लॉक क्षेत्र की ऐसी न्याय पंचायतों की कार्ययोजना तैयार करने को कहा है जहां अब तक गोशाला नहीं है। उस क्षेत्र में 100 मवेशियों की क्षमता वाले गोशाला निर्माण के लिए भूमि चिह्नित कराने का निर्देश दिया है। सभी को अपनी तहसील क्षेत्र के एसडीएम से समन्यव स्थापित कर भूमि चिह्नित कराकर निर्माण कार्य शुरू कराने को कहा गया है।
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सीडीओ ने बताया कि जिले में अब तक 80 गोशाला संचालित हो रही हैं। इन गोशालाओं में 8100 गोवंश संरक्षित हैं। बताया कि जिले में अभी 40 न्याय पंचायतें ऐसी हैं कि वहां अब तक गोशाला नहीं है। ऐसे में उस क्षेत्र के छुट्टा मवेशियों संरक्षित करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कहा कि न्याय पंचायत स्तर पर गोशाला निर्माण होने पर मवेशियों को संरक्षित करने में सहूलियत मिलेगी।
15वें वित्त आयोग से होगा निर्माण
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने बताया कि जिले में रिक्त चल रही 40 ग्राम पंचायतों में 100 गोवंश क्षमता वाली गोशाला का निर्माण होना है। कहा कि इसका निर्माण ग्राम पंचायत के 15वें वित्त आयोग तथा मनरेगा योजना की राशि से होना है। सभी बीडीओ को इस संबंध में दिशा-निर्देश दे दिया गया है। प्रत्येक गोशाला में 100 मवेशियों को रहने के लिए दो-दो सेड, बाउंड्रीवॉल, पानी की चरही आदि का निर्माण होना है।
क्षमता से अधिक संरक्षित हैं गोवंश
सीडीओ ने बताया कि जिले में संचालित 80 गोशालाओं में उनकी क्षमता से ज्यादा मवेशी संरक्षित किए गए हैं। पशुपालकों द्वारा आए दिन मवेशी को छुट्टा छोड़ देने से अब ऐसे मवेशियों को संरक्षित करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिक्त चल रही 40 न्याय पंचायतों में गोशाला का निर्माण होने के बाद छुट्टा मवेशियों को संरक्षित करने में सहूलियत होगी। सीडीओ ने पशु पालकों से अपने गोवंशों को छुट्टा नहीं छोड़ने की अपील की है।
संरक्षित होने थे 8519 मवेशी
सीवीओ डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि पिछले दिनों हुई पशु गणना के आधार पर जिले भर में 8519 मवेशी छुट्टा पाए गए थे। गणना के आधार पर मिले छुट्टा मवेशियों के आधार पर ही गोशाला का निर्माण कराया गया था। कहा कि पशु पालकों द्वारा दुधारु पशुओं के खाली होने पर वह उन्हें छुट्टा छोड़ दे रहे हैं। आए दिन बड़ी मात्रा में पालकों द्वारा उन्हें छोड़ देने के चलते इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब अतिरिक्त गोशाला बनाने की आवश्यकता पड़ रही है।
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विधानसभा चुनाव के दौरान योगी सरकार को छुट्टा मवेशियों से किसानों के फसलों का हो रहे नुकसान से दो-चार होना पड़ा था। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद योगी सरकार छुट्टा मवेशियों को लेकर गंभीर है। शासन ने प्रत्येक न्याय पंचायत में गोशाला निर्माण कराने का निर्देश दिया है। शासन का निर्देश मिलने के बाद विकास विभाग सक्रिय हो गया है।
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सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने सभी खंड विकास अधिकारियों को अपने ब्लॉक क्षेत्र की ऐसी न्याय पंचायतों की कार्ययोजना तैयार करने को कहा है जहां अब तक गोशाला नहीं है। उस क्षेत्र में 100 मवेशियों की क्षमता वाले गोशाला निर्माण के लिए भूमि चिह्नित कराने का निर्देश दिया है। सभी को अपनी तहसील क्षेत्र के एसडीएम से समन्यव स्थापित कर भूमि चिह्नित कराकर निर्माण कार्य शुरू कराने को कहा गया है।
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सीडीओ ने बताया कि जिले में अब तक 80 गोशाला संचालित हो रही हैं। इन गोशालाओं में 8100 गोवंश संरक्षित हैं। बताया कि जिले में अभी 40 न्याय पंचायतें ऐसी हैं कि वहां अब तक गोशाला नहीं है। ऐसे में उस क्षेत्र के छुट्टा मवेशियों संरक्षित करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कहा कि न्याय पंचायत स्तर पर गोशाला निर्माण होने पर मवेशियों को संरक्षित करने में सहूलियत मिलेगी।
15वें वित्त आयोग से होगा निर्माण
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने बताया कि जिले में रिक्त चल रही 40 ग्राम पंचायतों में 100 गोवंश क्षमता वाली गोशाला का निर्माण होना है। कहा कि इसका निर्माण ग्राम पंचायत के 15वें वित्त आयोग तथा मनरेगा योजना की राशि से होना है। सभी बीडीओ को इस संबंध में दिशा-निर्देश दे दिया गया है। प्रत्येक गोशाला में 100 मवेशियों को रहने के लिए दो-दो सेड, बाउंड्रीवॉल, पानी की चरही आदि का निर्माण होना है।
क्षमता से अधिक संरक्षित हैं गोवंश
सीडीओ ने बताया कि जिले में संचालित 80 गोशालाओं में उनकी क्षमता से ज्यादा मवेशी संरक्षित किए गए हैं। पशुपालकों द्वारा आए दिन मवेशी को छुट्टा छोड़ देने से अब ऐसे मवेशियों को संरक्षित करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिक्त चल रही 40 न्याय पंचायतों में गोशाला का निर्माण होने के बाद छुट्टा मवेशियों को संरक्षित करने में सहूलियत होगी। सीडीओ ने पशु पालकों से अपने गोवंशों को छुट्टा नहीं छोड़ने की अपील की है।
संरक्षित होने थे 8519 मवेशी
सीवीओ डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि पिछले दिनों हुई पशु गणना के आधार पर जिले भर में 8519 मवेशी छुट्टा पाए गए थे। गणना के आधार पर मिले छुट्टा मवेशियों के आधार पर ही गोशाला का निर्माण कराया गया था। कहा कि पशु पालकों द्वारा दुधारु पशुओं के खाली होने पर वह उन्हें छुट्टा छोड़ दे रहे हैं। आए दिन बड़ी मात्रा में पालकों द्वारा उन्हें छोड़ देने के चलते इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब अतिरिक्त गोशाला बनाने की आवश्यकता पड़ रही है।