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Amethi News: सस्ती दवा के दावे हवा-हवाई, मरीज परेशान
Wed, 28 May 2025 12:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 28 May 2025 12:04 AM IST
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जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र पर खड़े मरीज। संवाद।
अमेठी सिटी। जिला अस्पताल में निशुल्क दवा नहीं मिल पाने के कारण मरीजों को बाहर निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल के परचे पर कुछ दवाएं ही अंदर की दी जा रही हैं तो ज्यादातर बाहर मेडिकल स्टोर से मिल रही हैं। ऐसे में निशुल्क या सस्ती दवा का दावा फेल दिखाई दे रहा है।
जिला अस्पताल परिसर में मरीजों को जहां निशुल्क दवा उपलब्ध कराने के लिए दवा वितरण काउंटर हैं, वहीं रियायती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र संचालित है। मरीजों के अनुसार ओपीडी और इमरजेंसी में लिखी जाने वाली ज्यादातर दवाएं दवा वितरण काउंटर व जनऔषधि केंद्र पर नहीं मिलती हैं। इसके लिए बाहर मेडिकल स्टोर पर जेब ढीली करनी होती है।
सूत्रों के अनुसार चिकित्सक अपने मुताबिक दवा लिखते हैं। मरीज जब निशुल्क दवा वितरण काउंटर पर दवा लेने जाते हैं तो पता चलता है कि उन्हें कुछ दवाएं यहां नहीं मिलेंगी। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवा मजबूरन लेनी पड़ती है। जिला अस्पताल परिसर के बाहर खुले निजी मेडिकल स्टोरों पर मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
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जिला अस्पताल में नहीं हैं 45 प्रकार की दवाएं
जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट महेंद्र पाल के मुताबिक ड्रग वेयर हाउस में 280 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, जिसमें इस समय जिला अस्पताल के स्टोर में 235 प्रकार की दवाएं हैं। इस तरह कुल 45 प्रकार की दवाएं जिला अस्पताल में मौजूद नहीं हैं। जबकि प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर मौजूद अमित सिंह ने बताया कि जनऔषधि केंद्र पर एक हजार प्रकार की दवाएं आती हैं। करीब 350 प्रकार की दवाएं इस समय स्टोर में मौजूद हैं।
बाहर की दवा लिखने पर है मनाही
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि चिकित्सकों को बाहर की दवाएं लिखने पर मनाही है। अस्पताल व जन औषधि केंद्र पर जो दवाएं मौजूद हैं, वही लिखने के लिए कहा गया है। अगर कोई बाहर की दवा लिखेगा, तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
केस एक
मुंशीगंज निवासी अशोक कुमार गुप्ता मंगलवार को पत्नी नीता गुप्ता को जिला अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में दिखाने आए थे। डॉक्टर ने देखने के बाद अस्पताल के परचे पर पांच व एक छोटी परची पर दवाएं लिखीं। निशुल्क दवा काउंटर पर उनको चार दवाएं ही मिलीं। बताया कि दो दवाएं उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
केस दो
शाहगढ़ के कसरावां गांव निवासी निवासी करन ने बताया कि उन्होंने अपने भाई अंकुर को जिला अस्पताल की ओपीडी में दिखाया। बुखार था, जांच हुई, अस्पताल के परचे पर पहले चार दवाएं लिखी थीं जो दवा वितरण काउंटर पर मिलीं, उसके बाद जब चिकित्सक को दवा दिखाने गए तो डॉक्टर ने एक दवा रख ली और तीन दवाएं फिर बाहर की लिखी हैं, जो बाहर मेडिकल स्टोर पर मिलीं।
केस तीन
मुंशीगंज निवासी जितेंद्र कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल के ऑर्थो विभाग की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया। उनके परचे पर सात दवाएं लिखी गईं हैं। इनमें से चार दवाएं ही अंदर के दवा काउंटर पर मिल सकीं। कहा कि शेष अन्य तीन दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ेंगी।
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जिला अस्पताल परिसर में मरीजों को जहां निशुल्क दवा उपलब्ध कराने के लिए दवा वितरण काउंटर हैं, वहीं रियायती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र संचालित है। मरीजों के अनुसार ओपीडी और इमरजेंसी में लिखी जाने वाली ज्यादातर दवाएं दवा वितरण काउंटर व जनऔषधि केंद्र पर नहीं मिलती हैं। इसके लिए बाहर मेडिकल स्टोर पर जेब ढीली करनी होती है।
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सूत्रों के अनुसार चिकित्सक अपने मुताबिक दवा लिखते हैं। मरीज जब निशुल्क दवा वितरण काउंटर पर दवा लेने जाते हैं तो पता चलता है कि उन्हें कुछ दवाएं यहां नहीं मिलेंगी। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवा मजबूरन लेनी पड़ती है। जिला अस्पताल परिसर के बाहर खुले निजी मेडिकल स्टोरों पर मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
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जिला अस्पताल में नहीं हैं 45 प्रकार की दवाएं
जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट महेंद्र पाल के मुताबिक ड्रग वेयर हाउस में 280 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, जिसमें इस समय जिला अस्पताल के स्टोर में 235 प्रकार की दवाएं हैं। इस तरह कुल 45 प्रकार की दवाएं जिला अस्पताल में मौजूद नहीं हैं। जबकि प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर मौजूद अमित सिंह ने बताया कि जनऔषधि केंद्र पर एक हजार प्रकार की दवाएं आती हैं। करीब 350 प्रकार की दवाएं इस समय स्टोर में मौजूद हैं।
बाहर की दवा लिखने पर है मनाही
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि चिकित्सकों को बाहर की दवाएं लिखने पर मनाही है। अस्पताल व जन औषधि केंद्र पर जो दवाएं मौजूद हैं, वही लिखने के लिए कहा गया है। अगर कोई बाहर की दवा लिखेगा, तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
केस एक
मुंशीगंज निवासी अशोक कुमार गुप्ता मंगलवार को पत्नी नीता गुप्ता को जिला अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में दिखाने आए थे। डॉक्टर ने देखने के बाद अस्पताल के परचे पर पांच व एक छोटी परची पर दवाएं लिखीं। निशुल्क दवा काउंटर पर उनको चार दवाएं ही मिलीं। बताया कि दो दवाएं उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
केस दो
शाहगढ़ के कसरावां गांव निवासी निवासी करन ने बताया कि उन्होंने अपने भाई अंकुर को जिला अस्पताल की ओपीडी में दिखाया। बुखार था, जांच हुई, अस्पताल के परचे पर पहले चार दवाएं लिखी थीं जो दवा वितरण काउंटर पर मिलीं, उसके बाद जब चिकित्सक को दवा दिखाने गए तो डॉक्टर ने एक दवा रख ली और तीन दवाएं फिर बाहर की लिखी हैं, जो बाहर मेडिकल स्टोर पर मिलीं।
केस तीन
मुंशीगंज निवासी जितेंद्र कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल के ऑर्थो विभाग की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया। उनके परचे पर सात दवाएं लिखी गईं हैं। इनमें से चार दवाएं ही अंदर के दवा काउंटर पर मिल सकीं। कहा कि शेष अन्य तीन दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ेंगी।