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स्कूली बच्चों की जान से हो रहा खिलवाड़
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12 : संग्रामपुर : ई-रिक्शा पर बैठकर स्कूल जा रहे बच्चे। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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संग्रामपुर (अमेठी)। अमेठी जिले की सीमा पर बसे बड़गांव, विशेषरगंज व शीतलागंज समेत कई अन्य क्षेत्रों में अनफिट और अनाधिकृत स्कूली वाहन विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचाने व लाने में जुटे हैं। जिले की सीमा पर होने के कारण यहां तक परिवहन विभाग भी ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नहीं पहुंच पाता है।
छात्रों को स्कूल से घर लाने और ले जाने के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित वाहन बसों को माना जाता रहा है। लेकिन समय के साथ वैन व अन्य वाहन भी बच्चों को लाने और ले जाने लगे। इस दौरान अधिकांश वाहन नियमों का उल्लंघन करते हैं। लेकिन इस दिशा में कार्रवाई नहीं होती।
अब अभिभावकों की लापरवाही के कारण बच्चों को लाने और ले जाने में संग्रामपुर में ई-रिक्शा का चलन भी धड़ल्ले से बढ़ता जा रहा है। इसमें ई-रिक्शा चालक नियमों की अनदेखी करते हुए एक साथ कई बच्चों को बैठाते हैं। ऐसे में हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। हैरानी की बात यह है कि इस ओर न तो अभिभावकों का ध्यान जाता है और न ही परिवहन विभाग इस पर संज्ञान लेता है।
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क्षेत्र में तो अधिकांश स्कूली वैन में एक साथ बीस-बीस बच्चे देखने को मिलते हैं। इसी तरह की स्थिति अब ई-रिक्शा जैसे वाहनों की हो गई है। स्कूल की छुट्टी के एक ई-रिक्शे पर बड़ी संख्या में बैठाए जाते हैं। ये बच्चे अक्सर इनपर झपकी लेते व सोते हुए भी नजर आ जाते हैं। ऐसे में हर समय हादसे का अंदेशा बना रहता है।
यूपी मोटर यान 26वां संशोधन नियमावली 2019 के अंतर्गत स्कूली बच्चों को लाने व ले जाने के लिए ई-रिक्शा को प्रतिबंधित किया गया है। परिवहन विभाग में अगर किसी बस या वैन का स्कूली वाहन के रूप में रजिस्ट्रेशन होता है। तो तय समय सीमा के अंदर उनकी फिटनेस की जांच की जाती है। पर चौराहों पर खड़े पुलिसकर्मी भी इसको देखकर अनजान बने रहते हैं।
कवर नहीं रिक्शे, सीटें भी बढ़ा रहे
संग्रामपुर क्षेत्र में संचालित अधिकतर स्कूली ई-रिक्शे कवर्ड नहीं है। पूरी तरह से खुले ई-रिक्शों के कारण बच्चों के गिरने और हादसा होने की अंदेशा लगा रहता है। एक ई-रिक्शा पर एक चालक सहित पांच लोगों के बैठने की इजाजत होती है पर स्कूल संचालकों ने ई-रिक्शे में अतिरिक्त सीटें लगवा रखी हैं। पीछे की सीटों पर आठ से दस बच्चे बैठाए जाते हैं। कुछ ई-रिक्शों पर सीटों पर बैठाने के साथ ही बच्चों को खड़ा भी कर दिया जाता है। इसके अलावा चालक के साथ भी तीन बच्चे बैठे हुए देखे जा सकते हैं। अधिक बच्चे होने के कारण ई-रिक्शों के पलटने की आशंका भी बनी रहती है।
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छात्रों को स्कूल से घर लाने और ले जाने के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित वाहन बसों को माना जाता रहा है। लेकिन समय के साथ वैन व अन्य वाहन भी बच्चों को लाने और ले जाने लगे। इस दौरान अधिकांश वाहन नियमों का उल्लंघन करते हैं। लेकिन इस दिशा में कार्रवाई नहीं होती।
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अब अभिभावकों की लापरवाही के कारण बच्चों को लाने और ले जाने में संग्रामपुर में ई-रिक्शा का चलन भी धड़ल्ले से बढ़ता जा रहा है। इसमें ई-रिक्शा चालक नियमों की अनदेखी करते हुए एक साथ कई बच्चों को बैठाते हैं। ऐसे में हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। हैरानी की बात यह है कि इस ओर न तो अभिभावकों का ध्यान जाता है और न ही परिवहन विभाग इस पर संज्ञान लेता है।
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क्षेत्र में तो अधिकांश स्कूली वैन में एक साथ बीस-बीस बच्चे देखने को मिलते हैं। इसी तरह की स्थिति अब ई-रिक्शा जैसे वाहनों की हो गई है। स्कूल की छुट्टी के एक ई-रिक्शे पर बड़ी संख्या में बैठाए जाते हैं। ये बच्चे अक्सर इनपर झपकी लेते व सोते हुए भी नजर आ जाते हैं। ऐसे में हर समय हादसे का अंदेशा बना रहता है।
यूपी मोटर यान 26वां संशोधन नियमावली 2019 के अंतर्गत स्कूली बच्चों को लाने व ले जाने के लिए ई-रिक्शा को प्रतिबंधित किया गया है। परिवहन विभाग में अगर किसी बस या वैन का स्कूली वाहन के रूप में रजिस्ट्रेशन होता है। तो तय समय सीमा के अंदर उनकी फिटनेस की जांच की जाती है। पर चौराहों पर खड़े पुलिसकर्मी भी इसको देखकर अनजान बने रहते हैं।
कवर नहीं रिक्शे, सीटें भी बढ़ा रहे
संग्रामपुर क्षेत्र में संचालित अधिकतर स्कूली ई-रिक्शे कवर्ड नहीं है। पूरी तरह से खुले ई-रिक्शों के कारण बच्चों के गिरने और हादसा होने की अंदेशा लगा रहता है। एक ई-रिक्शा पर एक चालक सहित पांच लोगों के बैठने की इजाजत होती है पर स्कूल संचालकों ने ई-रिक्शे में अतिरिक्त सीटें लगवा रखी हैं। पीछे की सीटों पर आठ से दस बच्चे बैठाए जाते हैं। कुछ ई-रिक्शों पर सीटों पर बैठाने के साथ ही बच्चों को खड़ा भी कर दिया जाता है। इसके अलावा चालक के साथ भी तीन बच्चे बैठे हुए देखे जा सकते हैं। अधिक बच्चे होने के कारण ई-रिक्शों के पलटने की आशंका भी बनी रहती है।