{"_id":"61914b24a640ae79416a9621","slug":"case-filed-against-mla-and-four-also-against-100-unknown-amethi-news-lko6044327152","type":"story","status":"publish","title_hn":"विधायक समेत चार नामजद, 100 अज्ञात पर केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विधायक समेत चार नामजद, 100 अज्ञात पर केस
विज्ञापन
01 : गौरीगंज : कादूनाला-थौरी मार्ग पर श्रमदान कर सड़क को गड्ढा मुक्त करते विधायक। (फाइल फोटो) - संवाद
- फोटो : AMETHI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौरीगंज (अमेठी)। मुसाफिरखाना-थौरी मार्ग पर बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पहुंचकर श्रमदान करने के मामले में गौरीगंज विधायक समेत चार नामजद व 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने उपनिरीक्षक की तहरीर पर सभी पर आधा दर्जन से अधिक गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
दो सड़कों की मरम्मत को लेकर गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह वर्ष 2018 से संघर्षरत थे। मरम्मत नहीं कराए जाने पर विधायक ने 31 अक्तूबर को पद से त्यागपत्र देते हुए धरना दिया फिर आमरण अनशन किया। हालांकि सरकार की ओर से कोई पहल नहीं होने पर उन्होंने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के आह्वान पर अनशन समाप्त कर दिया।
11 नवंबर को विधायक बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ जेसीबी मशीन, गिट्टी आदि लेकर मुसाफिरखाना-थौरी मार्ग पर पहुंचे और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने करीब सात किमी. की सड़क की मरम्मत कर डाली। हालांकि बाद में मौके पर पहुंची पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले गई जहां से देर शाम उन्हें रिहा कर दिया गया।
विज्ञापन
इसके बाद मुसाफिरखाना पुलिस ने थाने में तैनात उपनिरीक्षक संकठा प्रसाद मौर्य की तहरीर पर विधायक राकेश प्रताप सिंह, वार्ड संख्या एक के जिला पंचायत सदस्य धर्मेश धोबी, मुसाफिरखाना ब्लॉक प्रमुख पप्पू सिंह व कुंडा नेवादा किशुनगढ़ के ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव समेत 100 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पुलिस ने इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 332, 353, 431, 153, 157 तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 2/3 के तहत केस दर्ज किया है। केस दर्ज करने के बाद थाने में तैनात उपनिरीक्षक ममता रावत को विवेचक नियुक्त किया गया है।
जनसेवा में जेल जाने को तैयार हूं : विधायक
विधायक राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का नहीं बल्कि उसे सुदृढ़ व संरक्षित करने का काम किया है। इस सड़क पर उपजे गड्ढों में गिरकर अपने हाथ-पैर तोड़वाने व जान गंवाने वालों को बचाने का काम किया है। श्रमदान करके अंधे बहरे शासन-प्रशासन को जगाने का काम किया है। यदि जनसेवा के इस पुनीत कार्य के लिए प्रशासन उन्हें जेल भेजना चाहता है तो वे सहर्ष इसके लिए तैयार हैं।
विज्ञापन
दो सड़कों की मरम्मत को लेकर गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह वर्ष 2018 से संघर्षरत थे। मरम्मत नहीं कराए जाने पर विधायक ने 31 अक्तूबर को पद से त्यागपत्र देते हुए धरना दिया फिर आमरण अनशन किया। हालांकि सरकार की ओर से कोई पहल नहीं होने पर उन्होंने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के आह्वान पर अनशन समाप्त कर दिया।
विज्ञापन
11 नवंबर को विधायक बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ जेसीबी मशीन, गिट्टी आदि लेकर मुसाफिरखाना-थौरी मार्ग पर पहुंचे और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने करीब सात किमी. की सड़क की मरम्मत कर डाली। हालांकि बाद में मौके पर पहुंची पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले गई जहां से देर शाम उन्हें रिहा कर दिया गया।
विज्ञापन
इसके बाद मुसाफिरखाना पुलिस ने थाने में तैनात उपनिरीक्षक संकठा प्रसाद मौर्य की तहरीर पर विधायक राकेश प्रताप सिंह, वार्ड संख्या एक के जिला पंचायत सदस्य धर्मेश धोबी, मुसाफिरखाना ब्लॉक प्रमुख पप्पू सिंह व कुंडा नेवादा किशुनगढ़ के ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव समेत 100 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पुलिस ने इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 332, 353, 431, 153, 157 तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 2/3 के तहत केस दर्ज किया है। केस दर्ज करने के बाद थाने में तैनात उपनिरीक्षक ममता रावत को विवेचक नियुक्त किया गया है।
जनसेवा में जेल जाने को तैयार हूं : विधायक
विधायक राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का नहीं बल्कि उसे सुदृढ़ व संरक्षित करने का काम किया है। इस सड़क पर उपजे गड्ढों में गिरकर अपने हाथ-पैर तोड़वाने व जान गंवाने वालों को बचाने का काम किया है। श्रमदान करके अंधे बहरे शासन-प्रशासन को जगाने का काम किया है। यदि जनसेवा के इस पुनीत कार्य के लिए प्रशासन उन्हें जेल भेजना चाहता है तो वे सहर्ष इसके लिए तैयार हैं।