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Amethi News: बहन का इंतजार कर रहा भाई, घर पहुंची मौत की खबर
Sun, 30 Aug 2026 01:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 30 Aug 2026 01:13 AM IST
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मुंशीगंज स्थित इंदिरा गांधी स्कूल ऑफ नर्सिंग कॉलेज में पहुंचे मृतक दीप्ति यादव के रोते बिलखते प
मुंशीगंज। रक्षाबंधन पर 12 वर्षीय समर बहन दीप्ति के हाथों राखी बंधवाने का इंतजार कर रहा है। सुबह दीप्ति ने मां सुनीता से फोन पर बात की थी। घर नहीं आ पाने पर उसने छोटी बहन सिंपल से भाई को राखी बांधने और राखी के बदले मिलने वाले रुपये अपने पास रखने की बात कही थी। परिवार को क्या पता था कि मां से हुई यह बातचीत आखिरी होगी। कुछ घंटे बाद दीप्ति की मौत की खबर पहुंचते ही रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदल गईं।
समर बहन की मौत के बाद गुमसुम है। रोते हुए वह कहता है कि दीदी ने कहा था कि बाद में आएगी। अब दीदी कैसे आएगी। जिस कलाई पर बहन के हाथों राखी सजनी थी, वहां अब उसकी यादें रह गई है। 16 वर्षीय सिंपल ने भाई को राखी बांधी, मगर त्योहार की खुशी में उसे बहन की कमी खलती रही। सुबह तक भाई को राखी बांधने की बात करने वाली दीप्ति कुछ घंटे बाद परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गई।
दीप्ति के पिता कुंवर बख्श और मां सुनीता दोनों दिव्यांग हैं। परिजनों के अनुसार दीप्ति उनके लिए बेटी के साथ भविष्य की उम्मीद भी थी। वह जीएनएम की पढ़ाई पूरी कर नौकरी करना चाहती थी। माता-पिता को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह परिवार की जिम्मेदारियां संभालेगी। दीप्ति की मौत से परिवार का यह सपना अधूरा रह गया। जिस दिन माता-पिता बेटी के घर लौटने की उम्मीद लगाए थे, उसी दिन उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।
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समर बहन की मौत के बाद गुमसुम है। रोते हुए वह कहता है कि दीदी ने कहा था कि बाद में आएगी। अब दीदी कैसे आएगी। जिस कलाई पर बहन के हाथों राखी सजनी थी, वहां अब उसकी यादें रह गई है। 16 वर्षीय सिंपल ने भाई को राखी बांधी, मगर त्योहार की खुशी में उसे बहन की कमी खलती रही। सुबह तक भाई को राखी बांधने की बात करने वाली दीप्ति कुछ घंटे बाद परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गई।
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दीप्ति के पिता कुंवर बख्श और मां सुनीता दोनों दिव्यांग हैं। परिजनों के अनुसार दीप्ति उनके लिए बेटी के साथ भविष्य की उम्मीद भी थी। वह जीएनएम की पढ़ाई पूरी कर नौकरी करना चाहती थी। माता-पिता को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह परिवार की जिम्मेदारियां संभालेगी। दीप्ति की मौत से परिवार का यह सपना अधूरा रह गया। जिस दिन माता-पिता बेटी के घर लौटने की उम्मीद लगाए थे, उसी दिन उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।
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