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Amethi News: दुख में साथ देने वाला ही होता है सच्चा मित्र
Sat, 10 Jan 2026 12:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:57 AM IST
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जगदीशपुर के यूपीसीडी सेक्टर पांच में श्रीमद्भागवत कथा सुनतीं महिलाएं। स्रोत्र आयोजक
जगदीशपुर। भगवान कृष्ण और सुदामा की सच्ची मित्रता भक्ति और विनम्रता की कहानी है, जो बताती है कि प्रेम और निस्वार्थ रिश्तों में धन-संपत्ति का कोई महत्व नहीं है। सुदामा गरीबी के कारण कृष्ण से कुछ मांग नहीं पाते, लेकिन कृष्ण उनके प्रेम को समझते हैं और उन्हें बिना मांगे ही धनवान बना देते हैं। ये बातें यूपीसीडा सेक्टर पांच में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें व अंतिम दिन प्रवाचक पंडित यदुनाथ अवस्थी ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि सुदामा चरित्र प्रसंग यह शिक्षा देता है कि दुख में साथ देने वाला मित्र ही सच्चा मित्र होता है और सच्चा प्रेम भौतिकता से परे है। प्रवाचक ने परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि यह महाभारत के बाद राजा परीक्षित के जीवन और उनके मोक्ष की कथा है, जिसमें उन्हें एक ऋषि के कारण सातवें दिन तक्षक नाग से डसे जाने का श्राप मिलता है।
इससे मुक्ति पाने के लिए वे श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करते हैं, जिससे उनका मन भौतिक जगत से हटकर ईश्वर में लग जाता है और वे तक्षक के डसने के बाद भी परमधाम (मोक्ष) को प्राप्त करते हैं। यह कथा मोह, भय और आशक्ति त्याग कर भक्ति के मार्ग पर चलने का एक महान उदाहरण है, जिसे ऋषि शुकदेव ने सुनाई थी।
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प्रवाचक ने कहा कि सुदामा चरित्र प्रसंग यह शिक्षा देता है कि दुख में साथ देने वाला मित्र ही सच्चा मित्र होता है और सच्चा प्रेम भौतिकता से परे है। प्रवाचक ने परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि यह महाभारत के बाद राजा परीक्षित के जीवन और उनके मोक्ष की कथा है, जिसमें उन्हें एक ऋषि के कारण सातवें दिन तक्षक नाग से डसे जाने का श्राप मिलता है।
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इससे मुक्ति पाने के लिए वे श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करते हैं, जिससे उनका मन भौतिक जगत से हटकर ईश्वर में लग जाता है और वे तक्षक के डसने के बाद भी परमधाम (मोक्ष) को प्राप्त करते हैं। यह कथा मोह, भय और आशक्ति त्याग कर भक्ति के मार्ग पर चलने का एक महान उदाहरण है, जिसे ऋषि शुकदेव ने सुनाई थी।
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