{"_id":"693dba0b45d9ef354c042c35","slug":"a-true-friend-is-one-who-supports-you-in-happiness-and-sorrow-amethi-news-c-96-1-ame1002-154353-2025-12-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: सच्चा मित्र वही जो सुख-दुख में साथ दे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: सच्चा मित्र वही जो सुख-दुख में साथ दे
Sun, 14 Dec 2025 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 14 Dec 2025 12:40 AM IST
विज्ञापन
जामों के भीखीपुर में कथा सुनते श्रद्धालु। स्त्रोत : आयोजक
जामों। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता आज के समाज और विशेषकर नवयुवकों के लिए प्रेरणास्रोत है। सच्ची मित्रता निस्वार्थ भाव से निभाई जाए तो वह जीवन भर साथ देती है। ये संदेश भीखीपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर वृंदावन धाम से आए प्रवाचक संत मुकेश आनंद महाराज ने दिया।
उन्होंने कहा कि जो मनुष्य दिनभर में अपने आराध्य का स्मरण करता है, उसका जीवन और परिवार दोनों सुख की दिशा में आगे बढ़ते हैं। मित्रता स्वार्थ रहित होने पर लंबे समय तक टिकती है, जबकि वर्तमान समय में कई रिश्ते अस्थायी हो गए हैं। काम निकलने के बाद लोग साथ छोड़ देते हैं। सच्चा मित्र वही होता है जो सुख और दुख दोनों स्थितियों में साथ निभाए और मित्र की उन्नति की चिंता करे।
प्रवाचक ने श्रीकृष्ण-सुदामा की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि दोनों ने संदीपन गुरु के आश्रम में साथ शिक्षा ग्रहण की थी। शिक्षा पूर्ण होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका के अधिपति बने, जबकि सुदामा निर्धन जीवन व्यतीत करते रहे। इसके बावजूद सुदामा ने कभी अपने मित्र को नहीं भुलाया। पत्नी के आग्रह पर सुदामा द्वारिका पहुंचे। मित्र के आगमन की सूचना मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण स्वयं बाहर आए और सुदामा का आत्मीय स्वागत किया।
विज्ञापन
सुदामा को धन देकर विदा किया गया। प्रवाचक ने कहा कि यह प्रसंग सिखाता है कि आराध्य का स्मरण जीवन को सही मार्ग देता है। भजन और कीर्तन से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। कथा के समापन पर मुख्य यजमान सुरेंद्र कुमार सिंह और उनकी पत्नी उमा सिंह ने व्यास पीठ की आरती की। इस मौके पर रामबरन सिंह, नीरज कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, विपिन सिंह, राहुल सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जो मनुष्य दिनभर में अपने आराध्य का स्मरण करता है, उसका जीवन और परिवार दोनों सुख की दिशा में आगे बढ़ते हैं। मित्रता स्वार्थ रहित होने पर लंबे समय तक टिकती है, जबकि वर्तमान समय में कई रिश्ते अस्थायी हो गए हैं। काम निकलने के बाद लोग साथ छोड़ देते हैं। सच्चा मित्र वही होता है जो सुख और दुख दोनों स्थितियों में साथ निभाए और मित्र की उन्नति की चिंता करे।
विज्ञापन
प्रवाचक ने श्रीकृष्ण-सुदामा की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि दोनों ने संदीपन गुरु के आश्रम में साथ शिक्षा ग्रहण की थी। शिक्षा पूर्ण होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका के अधिपति बने, जबकि सुदामा निर्धन जीवन व्यतीत करते रहे। इसके बावजूद सुदामा ने कभी अपने मित्र को नहीं भुलाया। पत्नी के आग्रह पर सुदामा द्वारिका पहुंचे। मित्र के आगमन की सूचना मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण स्वयं बाहर आए और सुदामा का आत्मीय स्वागत किया।
विज्ञापन
सुदामा को धन देकर विदा किया गया। प्रवाचक ने कहा कि यह प्रसंग सिखाता है कि आराध्य का स्मरण जीवन को सही मार्ग देता है। भजन और कीर्तन से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। कथा के समापन पर मुख्य यजमान सुरेंद्र कुमार सिंह और उनकी पत्नी उमा सिंह ने व्यास पीठ की आरती की। इस मौके पर रामबरन सिंह, नीरज कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, विपिन सिंह, राहुल सिंह आदि मौजूद रहे।