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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Which should be in prison , he remained PCS

जिसे जेल में होना चाहिए वह पीसीएस बना रहा

Sat, 25 Jul 2015 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर Updated Sat, 25 Jul 2015 11:17 PM IST
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उन्होंने कहा कि वे लोक सेवा आयोग में की जाने वाली मनमानी का मुद्दा अरसे से उठाते आ रहे हैं। पर आज तक कोई तब्दीली नहीं की गई। आयोग के जिस अध्यक्ष की जगह जेल में होना चाहिए वह इलाहाबाद में बैठकर लोगों को पीसीएस बना रहा है।

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एक ही जाति के लोगों को पीसीएस बनाए जाने पर सवाल करते हुए कहा कि ऐसा करना जरूरी ही है तो क्या सिर्फ 6-7 जिलों में ही उस जाति के लोगों को यह अधिकार मिलना चाहिए। प्रदेश के सभी जिलों में उस जाति के लोगों को नौकरी दी जाए तो भी कुछ बात बने।
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कहा कि लोक सेवा आयोग अध्यक्ष अनिल यादव पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद उसे बचाया जा रहा है। सवाल यहां व्यक्ति का नहीं है। यह बल्कि सिद्धांत व नैतिकता का सवाल है।
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सिंह ने कहा कि उन्होंने न तो किसी दबाव में स्वैच्छिक सेवानिवृत्त का आवेदन दिया है और न ही उन्हें सेवा में रहते हुए किसी प्रकार की प्रतिकूल कार्रवाई का भय है। एक जिम्मेदार व्यक्ति होने के कारण समाज में जो भी होते हुए देख रहे हैं, उसे कहना कोई अपराध नहीं।

किसी भी प्रकार की बगावत से इनकार करते हुए कहा कि जो लोग ऐसी बात करते हैं उन्हें पहले बगावत की सही परिभाषा जाननी होगी। किसानों के बकाए, आत्महत्या, पत्रकारों के उत्पीड़न, थानों में अत्याचार, तेजी से बढ़ी नकल आदि के जो मुद्दे उन्होंने उठाए हैं, इसे कतई बगावत नहीं कहा जा सकता।

कहा कि वे मन से सेवानिवृत्त हो गए हैं, अब कागजों पर सरकार उन्हें बनाए रखना चाहती है तो यह उसका अधिकार है। उन्होंने सविनय विनय अभियान शुरू कर रखा है जो सेवानिवृत्त होने या वीआरएस मंजूर होने के बाद और तेज होगा।

मुख्यमंत्री के कामकाज पर कोई सीधी टिप्पणी तो उन्होंने नहीं की, लेकिन एक सवाल के जवाब में कहा कि जो कुछ अच्छा हो उसका श्रेय खुद लेना और जो गड़बड़ हो उसे परिवार या अन्य लोगों पर थोप देने से नहीं चलता। जिम्मेदार व्यक्ति को हर जगह अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी।

केन्द्र सरकार के कामकाज पर कोई टिप्पणी करने से मना करते हुए कहा कि उनका कोई इरादा किसी दल में जाने का नहीं है। वे जो कर रहे हैं, वही आगे भी करते रहेंगे। प्रदेश की मौजूदा राजनीति पर चोट करते हुए कहा कि लखनऊ में तीन माह पूर्व एक मंत्री के दबाव के कारण उनके विभाग के एक सेक्शन अफसर की पुत्री की दहेज हत्या का केस हजरतगंज थाने में दर्ज नहीं हो पा रहा था।


इस पर उन्हें बात करनी पड़ी तब केस तो दर्ज हुआ, लेकिन अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। बोले कि जल्द ही वे उन जैसे मंत्रीजी के नाम का खुलासा करेंगे। प्रदेश में अफसरशाही के दबाव में होने की बात पर बोले कि अफसरों को इससे बाहर निकलने का प्रयास खुद करना होगा।

इसके लिए उन्हें जनता की ज्यादा से ज्यादा मदद करनी होगी। जनता के बीच वे लोकप्रिय होंगे तो जनप्रतिनिधि भी उन पर अनावश्यक दबाव डालने से बचेंगे।

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