फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Water level decreased, crisis persists, paddy crops submerged, farmers in distress

Ambedkar Nagar News: जल घटा, संकट बरकरार, धान की फसलें डूबी, किसान बेहाल

Mon, 08 Sep 2025 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Mon, 08 Sep 2025 12:40 AM IST
विज्ञापन
Water level decreased, crisis persists, paddy crops submerged, farmers in distress
.मांझा कम्हरिया गांव में जलस्तर घटने के  बाद सरयू नदी 
सरयू नदी का जलस्तर भले ही घटने लगा हो, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों की मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। मांझा कम्हरिया और आराजी देवारा क्षेत्र के किसानों की धान की फसलें अब भी पानी में डूबी हैं और अगर एक सप्ताह तक यही हाल रहा तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी। शनिवार को जहां नदी का जलस्तर 85.45 मीटर था, वहीं रविवार को यह घटकर 85.30 मीटर पर आ गया। जलस्तर घटने की यह मामूली राहत गांवों तक अब तक कोई ठोस राहत नहीं पहुंचा सकी है।
विज्ञापन

आलापुर तहसील के बाढ़ प्रभावित गांव मांझा कम्हरिया और आराजी देवारा के एक दर्जन से अधिक मजरे अभी भी जलभराव से जूझ रहे हैं। स्थानीय किसान परमात्मा सिंह, रामपलट, लालचंद और राजेश ने बताया कि खेतों में लगातार पानी भरा है, जिससे लगभग 50 बीघा धान की फसल डूब चुकी है। अगर 4-5 दिन में पानी नहीं निकला, तो पूरी फसल सड़ जाएगी और हमारे पास अगली बुआई के लिए भी कुछ नहीं बचेगा। एसडीएम सुभाष सिंह धामी का कहना है कि बाढ़ का पानी पीछे हट रहा है और धान की डूबी फसलों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। एसडीएम सुभाष सिंह धामी ने दावा किया कि बाढ़ का पानी पीछे हट रहा है और फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को घबराने की जरूरत नहीं है और जो भी क्षति होगी, उसका पूरा आंकलन कर मुआवजा दिया जाएगा।
विज्ञापन

प्रशासनिक दावों और हकीकत में फासला
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि सर्वे महज कागजों तक सीमित है और जमीन पर कोई स्पष्ट कार्यवाही नहीं दिख रही। किसानों का आरोप है कि सर्वे में निष्क्रियता और भेदभाव देखा गया है। पिछले वर्षों के मुआवजे भी कई किसानों को नहीं मिले, जिससे उनमें सरकारी दावों के प्रति भरोसा नहीं बचा। जलस्तर घटना अच्छी खबर है, लेकिन प्रशासन को यह समझना होगा कि असली तबाही जल उतरने के बाद शुरू होती है। खेतों में जमा पानी और लगातार नमी से फसलें सड़ने लगती हैं, जो किसानों के लिए आर्थिक आपदा से कम नहीं। जलनिकासी के संसाधन, ट्रैक्टर पंप, राहत कैंप, और खेतों की निगरानी टीमों की तैनाती अब जरूरी हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्थानीय लोगों की मांगें
जलनिकासी की व्यवस्था के लिए तत्काल पंपिंग शुरू की जाए

बाढ़ के बाद के नुकसान को ध्यान में रखकर विशेष राहत पैकेज जारी हो

किसानों के बीच पारदर्शी सर्वे टीम भेजी जाए

गांवों में कृषि विभाग का संपर्क कर्मचारी तैनात किया जाए
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed